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    दरभंगा से कहां जा रहा था एंटी स्नेक वेनम? नोएडा छापे के बाद जांच एजेंसियां अलर्ट

    Updated: Fri, 24 Jul 2026 09:22 PM (IST)

    दिल्ली क्राइम ब्रांच की नोएडा छापेमारी से दरभंगा में एंटी स्नेक वेनम की तस्करी का खुलासा हुआ है, जिससे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप है। सरकारी अस्पतालों ...और पढ़ें

    इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है। (फोटो-AI)

    इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है। (फोटो-AI)

    HighLights

    1. दिल्ली क्राइम ब्रांच ने दरभंगा से एंटी स्नेक वेनम तस्करी का खुलासा किया।

    2. सरकारी अस्पतालों से बड़े पैमाने पर एंटी स्नेक वेनम की तस्करी की आशंका।

    3. स्वास्थ्य कर्मियों की संलिप्तता पर पुलिस सरगना की तलाश में जुटी।

    संवाद सहयोगी, दरभंगा । नई दिल्ली क्राइम ब्रांच टीम के द्वारा नोएडा में छापेमारी के दौरान दरभंगा से एंटी स्नेक वेनम की तस्करी के तार जुड़ने से जिला स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच हुआ है।

    खुले बाजार में एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता नाममात्र को है। कुछेक निजी अस्पतालों के दवा दुकान पर महज 50-60 वायरल मौजूद है। बाजार में लिक्विड स्नेक वेनम के 10 एमएल डोज 550 रुपये और पाउडर वेनम की बिक्री 700 रुपये में हो रही है। वहीं सरकारी स्तर एंटी स्नेक वेनम भरपूर मात्रा में उपलब्ध रहता है।

    इसलिए स्वास्थ्य अधिकारियों के कान खड़े हो गए है। पीएचसी और डीएमसीएच में उपलब्ध एंटी स्नेक वेनम की डिमांड, खपत और उपलब्ध डोज का मिलान हो रहा हैं।

    सिविल सर्जन कार्यालय के मुख्य दवा भंडार और डीएमसीएच में बीएमएसआईसीएल (बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कार्पोरेशन लिमिटेड) के माध्यम से दवा आपूर्ति होती है। इसमें 10 एमएल पाउडर नुमा एंटी स्नेक वेनम भी शामिल हैं।

    डीएमसीएच में मुख्य दवा भंडार से सिर्फ इमरजेंसी विभाग में डिमांड के अनुरूप आपूर्ति होती है। इसके बाद इमरजेंसी दवा स्टोर से डाक्टरों के परामर्श पर मरीज के नाम से स्वजन दवा प्राप्त करते हैं। जिसे नर्सिंग स्टाफ 10 एमएल पानी में घोलकर इंजेक्शन के माध्यम से मरीज को निर्धारित डोज देते हैं।

    जबकि सिविल सर्जन कार्यालय के दवा भंडार से 19 पीएचसी, दो अनुमंडलीय अस्पताल और आठ अर्बन प्राइमरी हेल्थ सेंटरों में एंटी स्नेक वेनम की आपूर्ति होती है। जहां सर्पदंश के शिकार हुए लोगों को मुफ्त में डोज दिया जाता है। जानकारों का कहना है कि एंटी स्नेक वेनम के उपयोग को लेकर सख्त मेडिकल गाइडलाइंस है।

    चिकित्सक इसका प्रयोग एतिहाद से करते हैं। डीएमसीएच के डाक्टर बताते हैं कि सर्पदंश के मरीजों को दो से तीन घंटे तक वेट एंड वाच की स्थिति में रखा जाता है। इस दौरान मरीज के सर्प विष से प्रभावित होने की पुष्टि होने पर ही एंटी स्नेक वेनम का डोज जरूरत के अनुरूप दिया जाता है।

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    सख्त मेडिकल गाइडलाइंस के बावजूद जिले से एंटी स्नेक वेनम की तस्करी कहां से हो रही है इसका खुलासा पुलिस जांच से ही होगी। हालांकि, जानकारों की मानें तो निजी दवा दुकानों से इसकी तस्करी संभव नहीं है। सरकारी अस्पतालों में ही एंटी स्नेक वेनम भारी मात्रा में उपलब्ध रहता है।

    ऐसी स्थिति में तस्कर के गिरोह में स्वास्थ्य कर्मियों के जुड़े होने की आशंका है। इधर नई दिल्ली से दरभंगा पहुंची क्राइम ब्रांच की टीम गुप्त तौर पर एंटी स्नेक वेनम खरीद-फरोख्त में शामिल लोगों को तलाश रही है।

    पुलिस तस्करी गिरोह के पूरे नेटवर्क को खंगालने में लगी है। पुलिस के निशाने पर गिरोह सरगना आका है। जानकार सूत्रों का कहना है कि नोएडा में गिरफ्तार युवक ने दरभंगा से सर्पदंश में इस्तेमाल होनेवाले इंजेक्शन की तस्करी करने की बात कबूल किया है। साथ ही अन्य जानकारी दी है। इसके आधार पर पुलिस कार्य कर रही है।

    बरामद हुई एंटी स्नेक वेनम का सैंपल देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। पुलिस जांच स्वास्थ्य कर्मियों की संलिप्तता सत्यापित होने पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
    - डा. अरुण कुमार, सिविल सर्जन दरभंगा ।