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    दरभंगा: रैयाम चीनी मिल चालू होने की संभावना से किसानों में खुशी, सरकार को मिली DPR

    Updated: Mon, 08 Jun 2026 02:47 PM (IST)

    वर्ष 1994 से बंद रैयाम चीनी मिल को सहकारिता विभाग के माध्यम से पुनः चालू करने के प्रयास तेज हैं। इसके लिए वसंतदादा शुगर संस्थान से समझौता हुआ है और दर ...और पढ़ें

    रैयाम चीनी मिल चालू होने की संभावना से किसानों में खुशी (AI Generated Image)

    रैयाम चीनी मिल चालू होने की संभावना से किसानों में खुशी (AI Generated Image)

    संवाद सहयोगी, केवटी। रैयाम चीनी मिल को फिर से चालू करने के लिए तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। इस दिशा में गन्ना विभाग सक्रिय है। किसानों को गन्ना खेती के लिए ना सिर्फ प्रेरित किया जा रहा है, बल्कि बीज भी उपलब्ध भी कराई गई है। ऐसे में मिल चालू होने की संभावना से किसानों में खुशी और उत्साह का माहौल है।

    जिला ईख पदाधिकारी पुष्कर राज ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना कारखाना संध, नई दिल्ली की टीम ने फरवरी माह में साइट का दौरा करके विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और व्यवहार्यता रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। आगे की प्रक्रिया जारी है।

    गन्ना क्षेत्र विस्तार योजना चलाई जा रही है, जिसमें गन्ना किसानों को मुफ्त बीज प्रदान किया जाता है। वर्ष 2025 - 26 में करीब सौ एकड़ क्षेत्र में गन्ना की खेती में वृद्धि हुई है। आगामी ढ़ाई सौ एकड़ भूमि पर गन्ना की खेती का रकवा बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित है, जिसकी तैयारी विभाग द्वारा किया जा रहा है।

    बता दें कि दो जून 2026 को गन्ना विभाग ने पुणे स्थित वसंतदादा शुगर संस्थान के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया है। इससे चीनी मिल के पुनर्जीवन से लेकर किसानों की आय बढ़ाने तक में उक्त संस्थान से रणनीतिक और तकनीकी सहयोग भी मिलेगा। मिल का संचालन सहकारिता विभाग के माध्यम से किया जाएगा।

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    इसको देखते हुए गन्ना उद्योग विभाग ने पर्याप्त मात्रा में गन्ना आपूर्ति करने के लिए दरभंगा और मधुबनी जिले के 1018 गांवों को आरक्षित कर लिया है, जिसमें दरभंगा जिले के केवटी, बहादुरपुर, हायाधाट, हनुमाननगर, जाले और सिंहवाड़ा प्रखंड के कुल 580 और मधुबनी जिले के बासोपट्टी, बेनीपट्टी, बिस्फी, हरलाखी, जयनगर, कलुआही, खजौली, रहिका और मधवापुर प्रखंड के कुल 438 गांव शामिल हैं।

    तैयारी के बीच 22 मई को विभाग के सहायक निदेशक अभिनव प्रियदर्शी ने किसानों के साथ बैठक अधिक से अधिक गन्ना उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित किया था। इस दौरान रजौड़ा, फुलकाही, मलंगिया, पाली और गंधवार आदि गांवों के किसानों को लगभग पांच एकड़ में गन्ना बीज उत्पादन के लिए मुफ्त बीज उपलब्ध कराया था।

    इसमें सौ एकड़ में गन्ने की खेती होने की बात सामने आई, जिसे अक्टूबर 2026 तक करीब ढ़ाई सौ एकड़ तक में खेती करने का लक्ष्य लिया गया। इससे पहले फरवरी माह में राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ, नई दिल्ली और नौ मई को गन्ना उद्योग विभाग, बिहार सरकार के ईख आयुक्त अनिल कुमार झा भी दौरा कर चुके हैं।

    बता दें कि कि वर्ष 1914 में स्थापित रैयाम चीनी मिल वर्ष 1994 में बंद है। इस चीनी मिल में 68.176 एकड़ भूमि उपलब्ध है। वहीं मिल के पास मोकद्दमपुर तक 14 किमी लंबी अपनी ट्राली लाइन भी थी।

    उल्लेखनीय है कि किसी जमाने में रैयाम चीनी मिल में बनने वाली चीनी की गुणवत्ता इतनी बेहतरीन थी कि यह विदेशों और भारतीय सेना को भी आपूर्ति की जाती थी। इसके बंद होने से 135 स्थायी कर्मी व 554 मौसमी तथा 125 दैनिक कर्मी बेरोजगार हो गए थे।