गैस नहीं तो कोयला ही सही, दरभंगा में भट्ठी चूल्हे की अचानक बढ़ी डिमांड
दरभंगा में गैस सिलिंडर की किल्लत से होटल, रेस्टोरेंट और चाय की दुकानों को कोयले व भट्ठी चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है। वाणिज्यिक गैस सिलिंडर की अनुप ...और पढ़ें

मौलागज मे भट्टी चूल्हा तैयार करते कारीगर। जागरण
HighLights
गैस सिलिंडर की किल्लत से बढ़ी कोयले की मांग।
कोयले का दाम 18 से बढ़कर 24 रुपये प्रति किलो।
भट्ठी चूल्हे और इंडक्शन की बिक्री में उछाल।
जागरण संवाददाता, दरभंगा । गैस सिलिंडर की किल्लत और अनियमित आपूर्ति से घर से लेकर होटलों, रेस्टारेंटों और चाय-नाश्ते की दुकान की मुश्किलें बढ़ा दी है। दुकानदारी के लिए अब दुकानदार भट्ठी चूल्हे की इस्तेमाल करने लगे हैं।
ऐसे में कोयले की अचानक डिमांड बढ़ गई है। इससे मूल्य में भी जबरदस्त उछाल आया है। छह दिन पहले तक 18 रुपये प्रति किलो इसकी बिक्री होती थी। जो रविवार को बाजार में इसका मूल्य बढ़कर 24 रुपये पहुंच गया।
दुकानदारों का कहना है कि मूल्य में वृद्धि होने के पीछे डिमांड में उछाल होना मूल कारण है। कल तक गैस चूल्हा पर दुकानदारी करते थे। कुछ दिनों से इसकी किल्लत है। ऐसे में दुकानदारी के लिए गैस चूल्हा हटाकर भट्ठी खरीदना पड़ा है।
लहेरियासराय सैदनगर के रामलखन सहनी, बेंता के प्रमोद साह, स्टेशन रोड के पवन चौधरी, कादिराबाद के उदय दास, दोनार के प्रदीप गु्प्ता आदि ने बताया कि कल तक बाजार में कोयला की बिक्री काफी कम थी। लेकिन, अचानक बिक्री बढ़ गई है।
दुकानदारी करने के लिए इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। कामर्शियल गैस सिलिंडर नहीं मिल रही है। यहीं कारण है कि महंगा होने के बाद भी कोयला खरीद रहे हैं। उधर, कोयला के साथ-साथ भट्ठी चूल्हा के कारोबार में भी तेजी देखने को मिला है।
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जो दुकानदार अपने यहां से भट्ठी को हटा दिए थे अथवा फेंक दिए थे, वे आज ऊंचे दाम में खरीदने के लिए विवश हैं। इसके कारोबार में तेजी को देख कुम्हार जाति को लोग मूर्ति, सुराही आदि बनाना छोड़ युद्ध स्तर पर भट्टी चूल्हा बना रहे हैं।
बाजार में 25 सौ, 35 सौ और 45 सौ रुपये तक का भट्ठी चूल्हा उपलब्ध है। शहर के मौलागंज, हसनचक आदि जगहों पर इसे बनाकर बेचा जा रहा है। कारीगर उमेश पंडित, दुर्गा प्रजापति आदि ने बताया कि भट्ठी चूल्हे की डिमांड अधिक है।
इस कारण अन्य धंधा पर कम, इस पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। 220 लीटर वाले ड्राम को कटिंग कर चूल्हे का रूप दिया जाता है। इसे एक जगह से दूसरे जगह उठाकर भी ले जाया जा सकता है। इस कारण होटल और रेस्टारेंटों में इसकी मांग अधिक है।
कल तक जो प्रतिष्ठान बंद कर दिया गया था अथवा बंद होने वाला था वह आज तेजी से चल रहा है। कामर्शियल गैस सिलेंडर न मिलने या बहुत महंगा होने के कारण होटलों, रेस्टोरेंटों और ढाबों को कोयले की भट्टी पर निर्भर होना पड़ रहा है। अब तो आम लोग भी कोयले के चूल्हे खरीदने को विवश हो रहे हैं।
इंडक्शन चूल्हा की भी बढ़ी बिक्री
गैस सिलेंडर के कारण कोयले अथवा भट्ठी चूल्हें की ही नहीं बल्कि, इंडक्शन चूल्हे की भी बिक्री बढ़ी है। हालांकि, इसके ग्राहक मध्यम वर्ग के लोग काफी कम है। दरअसल, घर में इस्तेमाल होने वाले इंडक्शन की कीमत 15 सौ से लेकर 45 सौ रुपये तक की है।
जबकि, कामर्शियल इस्तेमाल होने वाली इंडक्शन की कीमत नौ हजार से लेकर 12 हजार रुपये तक की है। कहा जा रहा है कि मांग बढ़ने की वजह से इन चूल्हों की कीमतें काफी बढ़ी हैं। उधर, हीटर चूल्हा भी बाजार मे काफी मात्रा में उपलब्ध हो गया है।