दरभंगा में सील हुए, फिर खुल गए... आखिर किसके भरोसे चल रहे ये नर्सिंग होम?
दरभंगा के बेनीपुर अनुमंडल में 60 निजी नर्सिंग होम में से केवल 8 पंजीकृत हैं, बाकी बिना मानकों के चल रहे हैं। ये अवैध क्लीनिक मरीजों की जान जोखिम में ड ...और पढ़ें

दरभंगा के बेनीपुर में मरीजों का चल रहा इलाज।
HighLights
बेनीपुर में 60 में से केवल 8 निजी नर्सिंग होम पंजीकृत।
अवैध क्लीनिकों में बुनियादी सुविधाएं और प्रशिक्षित स्टाफ नहीं।
कार्रवाई के बावजूद सील हुए नर्सिंग होम फिर से खुले।
संवाद सहयोगी, बेनीपुर (दरभंगा)। दरभंगा के बेनीपुर अनुमंडल में निजी नर्सिंग होम और क्लीनिक की बढ़ती संख्या के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कस्बाई क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक करीब 60 छोटे-बड़े निजी नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनमें से महज आठ ही स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत बताए जाते हैं।
शेष अधिकांश संस्थान सरकार द्वारा निर्धारित मानकों का पालन किए बिना मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जिससे लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। जागरण की पड़ताल में सामने आया कि बेनीपुर, आशापुर, अलीनगर, बहेड़ा और पकड़ी समेत कई स्थानों पर संचालित निजी नर्सिंग होम में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है।
कई जगह मरीजों का इलाज साधारण चौकी पर किया जा रहा है। ड्रिप स्टैंड नहीं होने पर सलाइन की बोतल बिजली के बोर्ड, खिड़की या अन्य अस्थायी सहारे से टांग दी जाती है।
कई संस्थानों में आक्सीजन, जीवनरक्षक उपकरण, इमरजेंसी दवाएं और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ तक उपलब्ध नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के कई नर्सिंग होम सामान्य प्रसव से लेकर गंभीर मरीजों का इलाज शुरू कर देते हैं। स्थिति बिगड़ने पर मरीजों को दरभंगा रेफर कर दिया जाता है। इससे इलाज में देरी होने के साथ मरीजों की जान पर भी खतरा मंडराता है।
संकरी इमारतों में चल रहे अस्पताल
बेनीपुर और अलीनगर बाजार सहित आसपास के क्षेत्रों में कई निजी अस्पताल संकरी इमारतों में संचालित हो रहे हैं। अधिकांश जगह अग्निशमन व्यवस्था, आपातकालीन निकास, पर्याप्त वेंटिलेशन और बिजली बाधित होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है।
ऐसे में किसी भी आपात स्थिति में मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।स्वास्थ्य विभाग के नियमानुसार किसी भी निजी नर्सिंग होम के संचालन के लिए पंजीकरण, योग्य चिकित्सक, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, आवश्यक चिकित्सा उपकरण, स्वच्छता, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन और अग्नि सुरक्षा की व्यवस्था अनिवार्य है। इसके बावजूद बेनीपुर अनुमंडल में अधिकांश संस्थानों में इन मानकों का पालन नहीं होने की शिकायतें लगातार मिलती रही हैं।
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कार्रवाई के बाद भी नहीं थम रही मनमानी
सूत्रों के अनुसार, सिविल सर्जन एवं बेनीपुर अनुमंडल पदाधिकारी के निर्देश पर अनुमंडलीय अस्पताल प्रभारी उपाधीक्षक डा. कुमारी भारती के नेतृत्व में गठित जांच टीम ने पिछले दो वर्षों में दो बार अभियान चलाकर करीब 10 अवैध नर्सिंग होम को सील किया था।
लेकिन, ठोस कार्रवाई नहीं होने से कुछ ही दिनों बाद संचालकों ने सील तोड़कर फिर से मरीजों का इलाज शुरू कर दिया। इससे कार्रवाई की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
सिविल सर्जन ने कहा कि जिले एवं अनुमंडलों में संचालित सभी निजी नर्सिंग होम का समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है। बिना पंजीकरण संचालित होने वाले अथवा निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने आम लोगों से भी अपील की कि यदि कहीं स्वास्थ्य संबंधी अनियमितता या अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम की जानकारी मिले तो इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दें, ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके।