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    दरभंगा में हाथी दांत के दुर्लभ पुरावशेषों की अनदेखी पर केंद्र का एक्शन, जांच के आदेश

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 07:56 PM (IST)

    केंद्र सरकार ने दरभंगा के महाराजाधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय में दुर्लभ हाथी दांत के पुरावशेषों के संरक्षण में देरी पर सख्त कार्रवाई की है। प्रधा ...और पढ़ें

    हाथी दांत से बना सोफा ।

    हाथी दांत से बना सोफा ।

    HighLights

    1. दरभंगा संग्रहालय में हाथी दांत के पुरावशेषों के संरक्षण में देरी।

    2. प्रधानमंत्री की शिकायत पर केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने जांच के आदेश दिए।

    3. एनआरएलसी को लंबित कार्य जल्द पूरा करने का निर्देश।

    जागरण संवाददाता, दरभंगा। दरभंगा के महाराजाधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय में सुरक्षित दुर्लभ हाथी दांत के पुरावशेषों के संरक्षण में वर्षों की देरी अब केंद्र सरकार के निशाने पर है।

    प्रधानमंत्री से शिकायत के बाद केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संरक्षण कार्य में लापरवाही की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही, लंबित कार्य जल्द पूरा कर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट सौंपने का निर्देश भी जारी किया गया है।

    संरक्षण में देरी पर मंत्रालय सख्त

    केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने नेशनल रिसर्च लेबोरेट्री फॉर कंजर्वेशन ऑफ कल्चरल प्रॉपर्टी (एनआरएलसी), लखनऊ को पत्र भेजकर संग्रहालय में रखे हाथी दांत के दुर्लभ पुरावशेषों और कलाकृतियों के संरक्षण कार्य में हो रही देरी पर जवाब मांगा है।

    छह अगस्त को जारी पत्र में कार्य में बरती गई कथित लापरवाही और शिथिलता की तत्काल जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

    2019 में हुआ था संरक्षण का करार

    पूर्व संग्रहालयाध्यक्ष एवं इंटैक बिहार स्टेट के सह-संयोजक डॉ. शिव कुमार मिश्र ने प्रधानमंत्री को भेजी शिकायत में बताया था कि वर्ष 2019 में संग्रहालय और एनआरएलसी के बीच 155 दुर्लभ पुरावशेषों एवं कलाकृतियों के संरक्षण का समझौता हुआ था। इसके लिए कुल स्वीकृत राशि का 50 प्रतिशत यानी 82.50 लाख रुपये अग्रिम के रूप में एनआरएलसी को दे दिए गए थे।

    तीन साल की समयसीमा भी बीत गई

    समझौते के अनुसार संरक्षण कार्य तीन वर्षों में पूरा होना था, लेकिन निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी काम अधूरा है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि एनआरएलसी की लापरवाही के कारण संरक्षण कार्य लंबित रहा, जिससे अमूल्य पुरावशेषों का क्षरण लगातार बढ़ता गया।

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    जल्द पूरी करनी होगी प्रक्रिया

    संस्कृति मंत्रालय ने एनआरएलसी के महानिदेशक को स्पष्ट निर्देश दिया है कि शिकायत की निष्पक्ष जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन जल्द उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, लंबे समय से लंबित संरक्षण कार्य को बिना किसी और देरी के पूरा कर उसकी अनुपालन रिपोर्ट भी मंत्रालय को भेजी जाए।

    संग्रहालय की धरोहर बचाने पर जोर

    मंत्रालय की इस कार्रवाई से उम्मीद जगी है कि वर्षों से उपेक्षा का शिकार दुर्लभ हाथी दांत के पुरावशेषों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण हो सकेगा। साथ ही, इस मामले में जिम्मेदारी तय होने से सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।