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    दरभंगा में 40 बेड का पोषण केंद्र, भर्ती सिर्फ एक बच्चा, आखिर कहां खो गई योजना?

    Updated: Tue, 28 Jul 2026 05:39 PM (IST)

    दरभंगा के बेनीपुर अनुमंडलीय अस्पताल में 40 बेड वाला पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) अधिकारियों की उदासीनता के कारण अपने उद्देश्य से भटक गया है, जहां सिर ...और पढ़ें

    पोषण पुनर्वास केंद्र पर एक बच्ची एवं उसकी मां। जागरण।

    पोषण पुनर्वास केंद्र पर एक बच्ची एवं उसकी मां। जागरण।

    HighLights

    1. दरभंगा के पोषण पुनर्वास केंद्र में 40 में से सिर्फ एक बच्चा।

    2. अधिकारियों और कर्मियों की उदासीनता से योजना विफल हो रही है।

    3. स्थानीय लोग फर्जी वाउचर से राशि के दुरुपयोग का आरोप लगा रहे हैं।

    संवाद सहयोगी, बेनीपुर (दरभंगा)। अनुमंडलीय अस्पताल में संचालित जिला स्तरीय पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) अधिकारियों और कर्मियों की उदासीनता के कारण अपने उद्देश्य से भटकता नजर आ रहा है।

    जिले के 10 प्रखंडों के कुपोषित बच्चों के उपचार एवं पुनर्वास के लिए स्थापित इस केंद्र में अधिकांश समय सन्नाटा पसरा रहता है। पड़ताल के दौरान केंद्र में केवल एक कुपोषित बच्चा भर्ती मिला, जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि बेनीपुर अनुमंडल क्षेत्र में दर्जनों कुपोषित बच्चे हैं।

    जानकारी के अनुसार, सरकार ने कुपोषित बच्चों को 14 दिनों तक केंद्र में रखकर उपचार, पौष्टिक भोजन एवं स्वास्थ्य देखभाल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है।

    एक साथ 40 बच्चों के रहने की क्षमता वाले इस केंद्र में प्रति बच्चे के भोजन पर प्रतिदिन 90 रुपये, साथ रहने वाली माता के भोजन पर 160 रुपये तथा माता को प्रतिदिन 300 रुपये पारिश्रमिक देने का प्रविधान है। बावजूद इसके केंद्र में बच्चों की संख्या नगण्य है।

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि केंद्र में बच्चों के नहीं रहने के बावजूद भोजन एवं अन्य मदों में फर्जी वाउचर बनाकर सरकारी राशि की बंदरबांट की जाती है। हालांकि स्वास्थ्य प्रबंधक राहुल सिंह ने इन आरोपों से इन्कार किया है।

    बताते हैं कि करीब दो माह पूर्व स्वास्थ्य विभाग के क्षेत्रीय अपर निदेशक एवं सिविल सर्जन ने केंद्र का निरीक्षण किया था।

    निरीक्षण के दौरान सभी 10 प्रखंडों के गांवों में माइकिंग कराकर कुपोषित बच्चों को केंद्र तक लाने, आंगनबाड़ी सेविकाओं के माध्यम से अभियान चलाने तथा सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों (सीडीपीओ) को पत्र भेजने का निर्देश प्रभारी उपाधीक्षक एवं स्वास्थ्य प्रबंधक को दिया था।

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    आशा को भी इस अभियान से जोड़ने को कहा गया था, लेकिन स्थानीय स्तर पर इन निर्देशों का प्रभाव नहीं दिख रहा है। अभी केंद्र में भर्ती एकमात्र बच्चा कन्हौली गांव निवासी अमरजीत कुमार का पुत्र सत्या है। इससे योजना के क्रियान्वयन पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ जरूरतमंद बच्चों तक नहीं पहुंच रहा है। केंद्र में फीडिंग डेमोंस्ट्रेटर, एएनएम सहित कई कर्मियों की तैनाती होने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं।

    केंद्र तक नहीं पहुंच पा रहे बच्चे

    अस्पताल परिसर में मौजूद रामा यादव, सुनील सिंह, रामलोचन झा और योगी ठाकुर ने बताया कि पोषण पुनर्वास केंद्र से कुपोषित बच्चों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।

    उनका कहना है कि अनुमंडल क्षेत्र में दर्जनों कुपोषित बच्चे हैं, लेकिन आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका और आशा उन्हें केंद्र तक नहीं ला पा रही हैं। जबकि इस कार्य की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग द्वारा तय की गई है।

    कुपोषित बच्चों को केंद्र तक लाने की जिम्मेदारी आशा एवं आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका की है, जिसमें एएनएम को भी सहयोग करना होता है। सभी प्रखंडों की सीडीपीओ को पत्र भेजा गया है, लेकिन अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के कारण बच्चों की संख्या कम है। फर्जी वाउचर और अनियमितता के आरोप सही नहीं हैं।

    --राहुल सिंह, स्वास्थ्य प्रबंधक, अनुमंडलीय अस्पताल।