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    दरभंगा में करोड़ों खर्च, न उद्घाटन न रोजगार... टेराकोटा भवन बना नशेड़ियों का अड्डा

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 12:05 PM (GMT+05:30)

    दरभंगा के मदारपुर में पांच करोड़ की लागत से बना टेराकोटा क्लस्टर छह साल से बंद पड़ा है, जो अब नशेड़ियों का अड्डा और कचरा डंपिंग साइट बन गया है। इस परि ...और पढ़ें

    दरभंगा में बदहाल टेराकोटा क्लस्टर। जागरण

    दरभंगा में बदहाल टेराकोटा क्लस्टर। जागरण

    HighLights

    1. पांच करोड़ का टेराकोटा क्लस्टर छह साल से बंद।

    2. भवन नशेड़ियों का अड्डा, कचरा डंपिंग साइट बना।

    3. कुम्हार समाज, युवाओं को रोजगार नहीं मिला।

    जागरण संवाददाता, दरभंगा। केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से दरभंगा शहर के मदारपुर में पांच करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सामान्य सुविधा केंद्र (टेराकोटा क्लस्टर) उद्घाटन से पहले ही बदहाली का शिकार हो गया है। करीब छह वर्षों से यह भवन उद्घाटन का इंतजार कर रहा।

    परिसर में नशेड़ियों का जमावड़ा

    अब भवन जर्जर हो चुका है, जिसके परिसर में नशेड़ियों का जमावड़ा होता है। नगर निगम यहां कचरा डंप कर रहा है। इस योजना से न तो कुम्हार समाज को लाभ मिला और न ही स्थानीय युवाओं को रोजगार।

    भवन के मुख्य द्वार पर ताला लटका है। सजावट के लिए लगाए गए शीशे टूट चुके हैं और भीतर स्थापित करीब 50 लाख की मशीनें जंग खा रही हैं।

    परिसर में चारों ओर कचरे का अंबार, झाड़ियां और बेसहारा पशुओं का जमावड़ा इसकी बदहाली की कहानी बयां कर रहा है।


    उद्योग विभाग ने इस क्लस्टर का निर्माण पारंपरिक मिट्टी कला को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से कराया था। योजना के तहत कारीगरों को आधुनिक मशीनें, प्रशिक्षण, डिजाइन विकास, उत्पादों की मार्केटिंग तथा रोजगार उपलब्ध कराया जाना था, ताकि उनकी आय बढ़ाई जा सके।

    इसके संचालन पर विधानसभा में भी आवाज उठी, लेकिन गोलमोल जवाब देकर टाल दिया गया। लोगों का कहना है कि भवन निर्माण पूरा होने के बाद आज तक इसका उद्घाटन नहीं कराया गया।

    प्रजापति (कुम्हार) समाज के लोगों ने कई बार जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों, सांसदों और अधिकारियों से इसे चालू कराने की मांग की, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।

    आंदोलन करते-करते समाज के लोग भी थक चुके हैं। यदि यह केंद्र शुरू हो जाए तो टेराकोटा शिल्पियों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन नहीं करना पड़ेगा।

    कहना है कि प्रधानमंत्री के लोकल फार वोकल अभियान को धरातल पर उतारने का यह महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता था, लेकिन सरकारी उदासीनता के कारण योजना दम तोड़ रही है।

    समाज के लोगों का आरोप है कि सदन में यह जानकारी दी थी कि टेराकोटा क्लस्टर जीविका दीदियों के माध्यम से संचालित हो रहा है, जबकि, जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल विपरीत है। लोगों का कहना है कि भवन आज तक चालू ही नहीं हुआ।

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    हाल ही में बिहार प्रजापति (कुम्हार) समाज समन्वय समिति के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाध्यक्ष रमेश कुमार पंडित के नेतृत्व में बिहार सरकार के मंत्री मदन सहनी, सांसद गोपालजी ठाकुर से मुलाकात कर टेराकोटा भवन के पुनरुद्धार, परिसर की चारदीवारी, छात्रावास निर्माण तथा भवन को समाज को हस्तांतरित करने की मांग की।

    कुमार विवेक, शंकर पंडित, सुबोध पंडित, नरेंद्र नारायण, रमेश पंडित, प्रमोद पंडित अशोक पंडित, नंदकिशोर पंडित, सुरेंद्र नारायणआदि ने बताया कि बंद परिसर में नशेड़ियों का जमावड़ा रहता है, जिससे आसपास के बच्चों और युवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

    मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि टेराकोटा भवन को चालू कराने, माटी कला को बढ़ावा देने और समाज की मांगों को पूरा कराने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार माटी कला बोर्ड के गठन की दिशा में भी काम कर रही है।

    इसके संचालन के लिए जीविका और उपेंद्र महारथी कला संस्थान, पटना से पांच वर्षों के लिए एकरारनामा हुआ था, लेकिन वर्तमान में यह बंद है। विभाग को इससे अवगत कराया गया है।
    सुरूची कुमारी, प्रबंधक, उद्योग विभाग, दरभंगा