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    दरभंगा में कोसी नदी का पानी घटा, परेशानी नहीं, सात हजार आबादी आज भी सरकारी नाव के इंतजार में

    Updated: Wed, 22 Jul 2026 04:17 PM (IST)

    दरभंगा में कोसी नदी का जलस्तर मामूली रूप से घटा, दो दिन में 29 हजार क्यूसेक की कमी। बाढ़ की तैयारियों और सरकारी नावों की कमी से 7 हजार आबादी वाले गांव ...और पढ़ें

    किरतपुर के जमालपुर के पास कोसी नदी में निजी नाव से आवागमन करते लोग। जागरण

    किरतपुर के जमालपुर के पास कोसी नदी में निजी नाव से आवागमन करते लोग। जागरण

    HighLights

    1. कोसी नदी का जलस्तर दो दिन में 29 हजार क्यूसेक घटा।

    2. जल संसाधन विभाग द्वारा तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही।

    3. सरकारी नावों की कमी से हजारों ग्रामीण आपात स्थिति में परेशान।

    संवाद सहयोगी, गौड़ाबौराम (दरभंगा)। किरतपुर प्रखंड क्षेत्र से होकर गुजरने वाली पश्चिमी कोसी नदी के जलस्तर में मंगलवार को मामूली कमी दर्ज की गई।

    नेपाल स्थित कोसी बराज पर सोमवार को लगभग 2.10 लाख क्यूसेक जलप्रवाह दर्ज किया गया था, वहीं मंगलवार को यह घटकर 1.96 लाख क्यूसेक रह गया।

    वहीं बुधवार को जल प्रवाह एक लाख 81 हजार क्यूसेक दर्ज किया गया है। यानी दो दिन में जल प्रवाह में 29 हजार क्यूसेक की कमी दर्ज की गई है।

    जल संसाधन विभाग के कनीय अभियंता मनोज कुमार ने बताया कि नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार और रुक-रुक कर होने वाली वर्षा के कारण कोसी नदी के जलप्रवाह में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है। फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है।

    विभाग द्वारा पश्चिमी कोसी नदी, पश्चिमी कोसी तटबंध तथा कटाव संभावित स्थलों की लगातार निगरानी की जा रही है। जहां कहीं भी कटाव या अन्य तकनीकी समस्या सामने आती है, वहां तत्काल मरम्मत एवं सुरक्षात्मक कार्य कराया जाता है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि तटबंधों की सुरक्षा, नदी की निगरानी, कटावरोधी कार्य तथा जलप्रवाह का आकलन जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी है, जबकि बाढ़ की स्थिति में राहत, बचाव, सुरक्षित निकासी, नावों की व्यवस्था, राहत शिविरों का संचालन और अन्य आपदा संबंधी कार्य आपदा प्रबंधन विभाग एवं जिला प्रशासन के दायरे में आते हैं।

    इधर, तेतरी गांव के दीपक दिवाकर का कहना है कि जल संसाधन विभाग अपने स्तर पर निगरानी और मरम्मत का कार्य कर रहा है, लेकिन बरसात के मौसम में पूर्वी और पश्चिमी कोसी नदी के बीच बसे गांवों तथा पश्चिमी कोसी नदी के किनारे रहने वाले लोगों की परेशानियां कम होती नहीं दिख रही।

    उनका कहना है कि बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करना आपदा प्रबंधन विभाग और प्रशासन की जिम्मेदारी है, जिस पर और गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।

    जलप्रवाह में उतार-चढ़ाव से लोगों में अनिश्चितता

    लक्ष्मीपुर-ककोरवा निवासी रमानंदन राय ने बताया कि कोसी नदी के जलप्रवाह में लगातार होने वाले उतार-चढ़ाव से लोगों में अनिश्चितता का माहौल बना रहता है।

    पूर्वी और पश्चिमी कोसी नदी के बीच बसे लगभग सात हजार की आबादी वाले गांवों के लिए किरतपुर अंचल से लेकर मुख्यालय स्तर तक आज भी एक भी सरकारी नाव की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है।

    आपातकालीन स्थिति में लोगों को निजी नावों पर निर्भर रहना पड़ता है।रघुनाथपुर के ओम प्रकाश राय ने कहा कि क्षेत्र में पुलों की कमी और सरकारी नावों के अभाव का खामियाजा ग्रामीणों को लगातार भुगतना पड़ रहा है।

    उन्होंने हाल ही में मूंग की फसल तोड़ने के दौरान नाव दुर्घटना में तीन लोगों की हुई मौत का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं बताती हैं कि केवल तटबंधों की सुरक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुरक्षित आवागमन और आपदा के समय त्वरित बचाव संसाधनों की उपलब्धता भी उतनी ही आवश्यक है।

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