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    मिथिला विश्वविद्यालय में पीएचडी कोर्स वर्क परीक्षा में धांधली, नियमों का खुला उल्लंघन

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 06:00 AM (IST)

    ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में पीएचडी रेगुलेशन के लगातार उल्लंघन से अकादमिक गलियारों में चिंता है। हालिया मामला पैट 2023 के कोर्स वर्क परीक्षा प ...और पढ़ें

    यह तस्वीर जागरण आर्काइव से ली गई है।

    यह तस्वीर जागरण आर्काइव से ली गई है।

    जागरण संवाददाता, दरभंगा । ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में पीएचडी रेगुलेशन के लगातार हो रहे उल्लंघन से अकादमिक गलियारों में चिंता है।लोकभवन से लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) तक कई शिकायतें दर्ज होने के बावजूद विवि प्रशासन की उदासीनता कम होने का नाम नहीं ले रही है।

    हालिया मामला पैट (पैट) 2023 के कोर्स वर्क परीक्षा परिणाम का है, इसे बिना किसी नियम-परिनियम और केंद्रीकृत परीक्षा के गोपनीय ढंग से विभाग स्तर पर ही आयोजित कर घोषित कर दिया गया।

    आश्चर्य की बात यह है कि इस परीक्षा में शामिल सभी अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण घोषित कर दिया गया है। राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में कोर्स वर्क पूरा होने पर बाकायदा परीक्षा फार्म भरवाकर, प्रवेश पत्र जारी किए जाते हैं और निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर केंद्रीकृत व पारदर्शी तरीके से परीक्षा होती है।

    इसके विपरीत, मिथिला विश्वविद्यालय में सभी नियमों को दरकिनार कर गोपनीय तरीके से परीक्षा करा दी गई। विश्वविद्यालय के बुद्धिजीवी वर्ग ने इस पर गहरा आश्चर्य जताया है।

    प्रो. अखिलेश मिश्रा, डा. प्रभोद कुमार, नितेश चंद्र आदि ने कहा कि देश के कई विश्वविद्यालयों में रेगुलेशन उल्लंघन के कारण पीएचडी की डिग्रियों पर रोक लगाई जा चुकी है या उन्हें संशय की दृष्टि से देखा जाता है।

    ऐसे में केंद्रीय सतर्कता आयोग और निगरानी विभाग की जांच के बावजूद ऐसा कदम उठाना चिंताजनक है। छह माह के नियमित कोर्सवर्क के बाद न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति वाले शोधार्थी ही फार्म भरने के पात्र हैं।

    परीक्षा में गोपनीयता व निष्पक्षता बनाए रखने के लिए संबंधित विभाग के शिक्षक परीक्षा प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकते और न ही उसी विभाग में केंद्र बनाया जा सकता है।

    परीक्षा पास करने के लिए न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य है। असफल अभ्यर्थियों को अगले सत्र में अंतिम मौका दिया जाता है। ऐसी परीक्षा के संबंध में पूछे जाने पर विश्वविद्यालय मीडिया प्रभारी डा. आरएन चौरसिया ने चुपी साध ली। उन्होंने किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

    पुरानी शिकायतों पर भी नहीं हुई कार्रवाई

    विश्वविद्यालय में पीएचडी में धांधली की शिकायतें नई नहीं हैं। निगरानी विभाग और केंद्रीय सतर्कता आयोग (शिकायत संख्या 38673/2023) में पहले से ही कई मामले लंबित हैं।

    इसके तहत पैट 2020, 2021-22 और 2023 में दोनों पेपर आब्जेक्टिव लेना, एक विषय में महज 10 सीटों पर 100 अभ्यर्थियों का नामांकन, निर्धारित क्षमता से चार गुना अधिक अभ्यर्थियों का गाइड बनाना एवं निजी कालेजों के शिक्षकों को गाइड नियुक्त करना के अलावा नौकरी-पेशा और प्रोबेशन अवधि वाले शिक्षकों को नियम विरुद्ध पीएचडी कराना समेत निगरानी विभाग और सतर्कता आयोग द्वारा विवि को पत्र निर्गत कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

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