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    वट सावित्री व्रत 2026: वट वृक्ष की 108 बार परिक्रमा के बाद कथा सुनने का मिलता विशेष फल

    By Vijay Kumar Rai Edited By: Ajit kumar
    Updated: Thu, 14 May 2026 02:59 PM (IST)

    Bihar News Vat Savitri Puja: वट सावित्री व्रत 2026, जो 16 मई को है, में वट वृक्ष की परिक्रमा और सावित्री कथा सुनने का विशेष महत्व है। यह व्रत पति की ल ...और पढ़ें

    बरगद के पेड़ के नीचे पूजन करतीं व्रती। सौ. इंटरनेट मीडिया

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    संवाद सहयोगी, केवटी (दरभंगा)। Vat Savitri Puja Samagri List: वट सावित्री व्रत 2026 को लेकर महिलाओं में खास उत्साह देखा जा रहा है।

    इस बार 16 मई को पड़ने वाले इस पर्व में वट वृक्ष की 7 या 108 बार परिक्रमा और सावित्री कथा सुनने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा और कथा श्रवण करने से अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और परिवार में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    वट वृक्ष की पूजा की मान्यता

    पंडित मिथिलेश झा का कहना है कि वट यानी बरगद का वृक्ष त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण वट सावित्री व्रत में इसकी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

    विवाहित महिलाएं सुबह स्नान कर नए वस्त्र और शृंगार धारण करती हैं। इसके बाद वट वृक्ष के नीचे जाकर जल, रोली, अक्षत, फूल और कच्चा सूत अर्पित कर पूजा करती हैं।

    पूजा के दौरान महिलाएं वट वृक्ष की 7 या 108 बार परिक्रमा करती हैं और कच्चे धागे को वृक्ष के तने में लपेटती जाती हैं। मान्यता है कि इससे वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और स्थिरता बनी रहती है।

    कथा श्रवण से मिलता पुण्य फल

    वट सावित्री व्रत में कथा सुनने और सुनाने की परंपरा भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। धार्मिक कथाओं के अनुसार माता सावित्री ने अपने पतिव्रता धर्म, तप और बुद्धिमानी के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे।

    कहा जाता है कि जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जा रहे थे, तब सावित्री भी उनके पीछे चलती रहीं। उनकी भक्ति और निष्ठा से प्रसन्न होकर यमराज ने अंततः सत्यवान को जीवनदान दे दिया।

    इसी कथा के कारण यह व्रत नारी शक्ति, समर्पण और अटूट विश्वास का प्रतीक माना जाता है।

    बिहार में विशेष परंपरा

    बिहार में वट सावित्री व्रत को विशेष पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है। महिलाएं पूजा की थाली में बांस का पंखा, भीगा चना, गुड़, मौसमी फल, सिंदूर और सुहाग सामग्री रखती हैं।

    पूजा के बाद महिलाएं अपने पति का आशीर्वाद लेती हैं और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं सामूहिक रूप से वट वृक्ष के पास बैठकर कथा सुनती हैं और भजन-कीर्तन भी करती हैं।

    आस्था और संयम का संदेश

    वट सावित्री व्रत नारी के धैर्य, त्याग और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व महिलाओं को सावित्री जैसी दृढ़ निष्ठा और संयम से प्रेरणा देता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष की पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है और वैवाहिक जीवन मजबूत होता है।

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