दरभंगा में मौसम ने बढ़ाई किसानों की चिंता, कहीं बिचड़ा डूबा, कहीं पटवन से रोपनी
दरभंगा में धान की रोपनी ने रफ्तार पकड़ी है, लेकिन असंतुलित मौसम किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। कहीं जलजमाव से धान की नर्सरी सड़ गई है तो कहीं ब ...और पढ़ें

दरभंगा जिले के तारडीह में खेतों में पटवन करते किसान। जागरण
संवाद सहयोगी, तारडीह (दरभंगा)। बिहार के दरभंगा जिले में खेतों में धान की रोपनी ने रफ्तार तो पकड़ ली है, लेकिन मौसम का मिजाज किसानों की उम्मीदों पर भारी पड़ रहा है।
कहीं मूसलाधार बारिश ने धान की नर्सरी (बिचड़ा) को डुबो दिया है तो कहीं बारिश नहीं होने से किसान डीजल पंप से पटवन कर रोपनी कराने को मजबूर हैं। ऐसे में खेती का खर्च बढ़ने के साथ-साथ बेहतर उत्पादन की उम्मीद भी कमजोर पड़ती दिख रही है।
जलजमाव से सड़ गई धान की नर्सरी
बीते दिनों हुई तेज बारिश से कई खेतों में जलजमाव की स्थिति बन गई। लगातार पानी भरे रहने के कारण धान की नर्सरी पूरी तरह सड़ गई। जिन किसानों ने समय पर बिचड़ा तैयार किया था, उन्हें अब दोबारा नर्सरी तैयार करने की चिंता सताने लगी है। इससे रोपनी का कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
पटवन के सहारे हो रही रोपनी
दूसरी ओर, कई गांवों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में नमी की कमी बनी हुई है। ऐसे क्षेत्रों के किसान डीजल पंप से सिंचाई कर धान की रोपनी करा रहे हैं। इससे खेती की लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। किसानों का कहना है कि डीजल और मजदूरी दोनों महंगे होने से खेती करना पहले की तुलना में अधिक खर्चीला हो गया है।
मौसम ने बिगाड़ा संतुलन
किसानों का कहना है कि इस बार मौसम पूरी तरह असंतुलित है। कहीं जरूरत से ज्यादा बारिश हुई तो कहीं पर्याप्त पानी नहीं मिला। इसी कारण एक ही प्रखंड में किसानों को अलग-अलग तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जलजमाव वाले क्षेत्रों में फसल खराब हुई है, जबकि सूखे इलाकों में सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।
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मौसम पर टिकी किसानों की उम्मीद
किसान काली राम, दुर्गेश पासवान, सागर पासवान और रूपेश झा का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में मौसम सामान्य रहा तो रोपनी का कार्य समय पर पूरा हो जाएगा।
लेकिन यदि बारिश का यही असंतुलित दौर जारी रहा तो धान की पैदावार पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। फिलहाल कहीं खेतों से पानी निकालने की मशक्कत चल रही है तो कहीं पटवन कर रोपनी का काम तेजी से जारी है। किसानों की नजर अब पूरी तरह मौसम के अगले मिजाज पर टिकी है।