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    पूर्वी चंपारण में कारतूस फैक्ट्री कांड की जांच तेज, आईबी ने दो आरोपितों से पूछताछ कर जुटाए अहम सुराग

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 04:21 PM (IST)

    पूर्वी चंपारण में अवैध कारतूस फैक्ट्री के खुलासे के बाद पुलिस ने हथियार तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई तेज कर दी है। केंद्रीय एजेंसी आईबी ने गिरफ्तार आरोप ...और पढ़ें

    मामले में गिरफ्तार श्रीकांत सिंह और रहमत अली को केंद्रीय कारा से 24 घंटे के डिमांड पर लेकर पूछताछ। फाइल फोटो

    मामले में गिरफ्तार श्रीकांत सिंह और रहमत अली को केंद्रीय कारा से 24 घंटे के डिमांड पर लेकर पूछताछ। फाइल फोटो

    संवाद सहयोगी, मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)। East Champaran Cartridge Factory: जिले में पहली बार अवैध कारतूस निर्माण फैक्ट्री का खुलासा होने के बाद पुलिस ने हथियार तस्करी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। मामले की जांच में केंद्रीय एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं।

    मामले में गिरफ्तार श्रीकांत सिंह और रहमत अली को केंद्रीय कारा से 24 घंटे के डिमांड पर लेकर आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) की टीम ने पूछताछ की।

    पूछताछ के बाद दोनों को दोबारा केंद्रीय कारा भेज दिया गया। पूछताछ में कई अहम सुराग मिलने की सूचना है, हालांकि जांच के हित में पुलिस ने जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

    चकिया के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी संतोष कुमार ने पूछताछ की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान मिले इनपुट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    कारतूस निर्माण की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने चकिया, मधुबन, गढ़हिया और फेनहारा समेत कई इलाकों में छापेमारी की। इस कार्रवाई में अवैध हथियारों के निर्माण और खरीद-बिक्री से जुड़े नेटवर्क की कई कड़ियां सामने आई हैं।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, 19 जुलाई को चकिया में अवैध कारतूस निर्माण फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया गया था। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि जिले में लंबे समय से अवैध हथियारों का कारोबार संचालित हो रहा था।

    कारतूस फैक्ट्री का खुलासा होने से नेटवर्क के संचालन के तरीके और उससे जुड़े लोगों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं।

    वर्ष 2020 से अब तक पूर्वी चंपारण में अवैध मिनी गन फैक्ट्रियों का पांच बार खुलासा हो चुका है। इन कार्रवाइयों में बड़ी संख्या में हथियार, कारतूस, हथियार बनाने के उपकरण और अन्य सामग्री बरामद की गई है। कई आरोपित गिरफ्तार भी हुए हैं, लेकिन पुलिस का मानना है कि नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

    पुलिस के अनुसार, नेपाल सीमा से जिले की निकटता हथियार तस्करों के लिए अनुकूल साबित होती रही है। सीमावर्ती क्षेत्रों के जरिए हथियार, कारतूस और अन्य अवैध सामग्री की तस्करी किए जाने की आशंका की भी जांच की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस बरामद दस्तावेजों, तकनीकी साक्ष्यों और गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर अन्य संदिग्धों की पहचान कर रही है।

    अधिकारियों का कहना है कि अवैध हथियार निर्माण और तस्करी से जुड़े पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा।

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