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    बाघ-तेंदुए के हमले में मौत पर अब 10 लाख रुपये, बिहार सरकार की नई गाइडलाइन

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 05:47 PM (IST)

    बिहार सरकार ने जंगलों के बाहर मानव-वन्यजीव संघर्ष में जान-माल के नुकसान पर आर्थिक सहायता के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत मौत पर 10 लाख रुपये, ...और पढ़ें

    इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

    इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

    जागरण संवाददाता, मोतिहारी । अब जंगलों से बाहर आबादी वाले क्षेत्रों में बाघ, तेंदुआ, हाथी या अन्य जंगली जानवरों के हमले से जान-माल की क्षति होने पर पीड़ितों को बिहार सरकार की ओर से आर्थिक सहायता मिलेगी।

    पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने गैर-वन क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष से होने वाले नुकसान पर राहत देने के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी की है।

    वन प्रमंडल पदाधिकारी मोतिहारी अमित कुमार ने बताया कि हाल के वर्षों में वन्यजीवों के गांवों और रिहायशी इलाकों में पहुंचने की घटनाएं बढ़ी हैं। ऐसे मामलों में अब निर्धारित प्रक्रिया के तहत पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    गाइडलाइन के अनुसार, वन्यजीव के हमले में किसी व्यक्ति की मौत होने पर आश्रितों को 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायल होने पर 1.44 लाख रुपये तथा सामान्य रूप से घायल होने पर 24 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।

    इसके अलावा हाथी या अन्य वन्यजीवों के हमले से दुधारू पशु, बैल, बकरी, भेड़ अथवा अन्य पालतू पशुओं की मौत होने पर भी निर्धारित श्रेणी के अनुसार मुआवजा मिलेगा।

    मकान, फसल और अन्य संपत्ति को हुए नुकसान का विभागीय आकलन कर आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। वन विभाग ने सहायता प्राप्त करने के लिए समयबद्ध सूचना देना अनिवार्य किया है।

    किसी व्यक्ति की मौत या घायल होने की स्थिति में 24 घंटे के भीतर निकटतम वन प्रक्षेत्र कार्यालय, वन प्रमंडल कार्यालय और संबंधित थाना को सूचना देनी होगी।

    पालतू पशु के शिकार की स्थिति में संबंधित थाना में प्राथमिकी दर्ज कराना आवश्यक होगा तथा मृत पशु को वन अधिकारियों की जांच से पहले घटनास्थल से नहीं हटाया जा सकेगा।

    वहीं, फसल या मकान को नुकसान होने पर दो दिनों के भीतर वन प्रक्षेत्र कार्यालय अथवा अंचल अधिकारी कार्यालय में सूचना देनी होगी। आवेदन के साथ संबंधित भूमि के दस्तावेज और लगान रसीद की प्रति भी संलग्न करनी होगी।

    डीएफओ अमित कुमार ने लोगों से अपील की कि यदि किसी गांव या आबादी वाले क्षेत्र में हाथी या अन्य वन्यजीव दिखाई दें तो लोग उन्हें स्वयं भगाने या पकड़ने का प्रयास न करें।

    ऐसी स्थिति में तत्काल वन विभाग को सूचना दें, ताकि प्रशिक्षित टीम मौके पर पहुंचकर सुरक्षित तरीके से कार्रवाई कर सके। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी और प्रभावित परिवारों को समय पर राहत मिल सकेगी।