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    दिल्ली-काठमांडु कनेक्टिविटी की अहम कड़ी पर ब्रेक, रक्सौल का पुल अब भी अधूरा

    Updated: Mon, 01 Jun 2026 05:25 PM (IST)

    रक्सौल में 5 करोड़ की लागत से बन रहा पुल एक साल से अधिक समय से अधूरा है, जिससे यातायात बाधित हो रहा है और दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं। स्थानीय लोग और व्यापा ...और पढ़ें

    रक्सौल दिल्ली काठमांडु को जोड़ने वाले मुख्य पथ कोइरिया टोला पुल की स्थिति। जागरण

    रक्सौल दिल्ली काठमांडु को जोड़ने वाले मुख्य पथ कोइरिया टोला पुल की स्थिति। जागरण

    HighLights

    1. रक्सौल में 5 करोड़ का पुल एक साल से अधूरा।

    2. अधूरे पुल से यातायात बाधित, कई दुर्घटनाएं हुईं।

    3. स्थानीय लोग, व्यापारी निर्माण में देरी से परेशान।

    विजय कुमार गिरि, रक्सौल (पूर्वी चंपारण) । अंतरराष्ट्रीय महत्व के सीमावर्ती शहर रक्सौल के मुख्य पथ स्थित कोइरिया टोला में करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से बन रहा पुल अब विकास के बजाय अव्यवस्था और लापरवाही की मिसाल बनता जा रहा है।

    एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। स्थिति यह है कि शहर को दक्षिण से उत्तर दिशा से जोड़ने वाली यह महत्वपूर्ण कड़ी आम लोगों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बन गई है।

    यह पुल न केवल रक्सौल शहर के आंतरिक यातायात की धुरी है, बल्कि पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन, पश्चिमी चंपारण तथा सैनिक रोड को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग भी है। प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन और राहगीर इसी रास्ते से गुजरते हैं। इसके बावजूद निर्माण कार्य की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार पुल का ढांचा सड़क की सतह से तीन से चार फीट ऊंचा बना दिया गया है, जबकि दोनों किनारों पर समुचित एप्रोच रोड का निर्माण नहीं हुआ है। नतीजतन पुल के आसपास दलदली स्थिति बनी रहती है और वाहन अक्सर फिसलकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।

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    निर्माण एजेंसी द्वारा बनाया गया अस्थायी डायवर्जन भी कुछ दिनों में ही टूट गया। वर्तमान में राहगीरों को कीचड़, धूल और गड्ढों से होकर गुजरना पड़ रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि निर्माण स्थल पर संवेदक का कोई सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है।

    परियोजना की लागत, निर्माण एजेंसी, कार्य प्रारंभ और समाप्ति की तिथि जैसी अनिवार्य जानकारियां भी सार्वजनिक नहीं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें यह तक पता नहीं है कि पुल का निर्माण कब पूरा होगा और विभाग इसे कब हैंडओवर करेगा।

    निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य पूरा नहीं होने से प्रतिदिन जाम की समस्या उत्पन्न हो रही है। बरसात के मौसम में हालात और विकट हो जाते हैं। स्कूली बच्चों, मरीजों, व्यापारियों और आम नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

    पुल निर्माण स्थल पर जाम और अव्यवस्था को लेकर पूर्व में भी कई बार समाचार प्रकाशित हो चुके हैं, लेकिन संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी की ओर से कोई ठोस पहल नहीं दिखी है।

    स्थानीय लोगों ने प्रशासन और विभागीय अधिकारियों से निर्माण कार्य में तेजी लाने, सुरक्षित डायवर्जन की व्यवस्था करने, सूचना बोर्ड लगाने तथा जल्द से जल्द पुल को चालू कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की यह परियोजना यदि समय पर पूरी नहीं हुई तो यह विकास के बजाय सरकारी उदासीनता का प्रतीक बनकर रह जाएगी।

    क्या बोले- व्यवसायी

    राजू महतो ने बताया कि पुल के निर्माण करीब दो वर्षों से हो रहा है। इस दौरान आवागमन बंद ही समझिए। जाम से लोग बेचैन रहे। डायवर्सन भी गजब का था। दलदल और बेतरतीब बना था। पुल टूटने से शहर दो भागों में बट गया था। इसका असर व्यपार पर पड़ा है।

    धर्मेंद्र प्रसाद, युवा व्यपारी बताया कि उपभोक्ताओं का इधर से उधर आना जाना जाम के कारण बंद हो गया था। जिसका असर व्यपार गंभीर रूप से पड़ा है। दुकान का खर्च निकलना कठिन हो गया है। इसका सुधि लेने वाला कोई नही है। निर्माण की गति काफी धीमी चल रही है।

    रौशन कुमार ने बताया कि पुल सड़क निर्माण से विकास व व्यपार बढ़ता है। इस पुल के निर्माण शुरू होते ही व्यपार आवागमन सब प्रभावित हो गया। वगैर किसी प्लान का निर्माण हुआ। व्यपारियो को जो छती हुई उसकी भरपाई कौन करेगा।

    रामबच्चन प्रसाद बताया कि पुल जान लेवा साबित हुआ। अबतक वाहन पलटने से 15 से 20 लोग गंभीर रूप जख्मी हुए है। इसके अलावा ब्रेकेटिंग नही होने से रास्ता बंद है, इसका कोई सांकेतिक चिन्ह नही लगा था। इस बिच एक बाइक सवार युवक पुल के दक्षणी छोर पर गिरने से मृत्यु हो गई थी। कबतक निर्माण होगा। किंतने लागत से बन रहा है। कोई बोर्ड नही लगा है।

    पुल निर्माण की धीमी रफ्तार से व्यापार प्रभावित, लोगों ने जताई नाराजगी

    राजू महतो ने बताया कि पुल का निर्माण कार्य करीब दो वर्षों से चल रहा है। इस दौरान आवागमन लगभग बाधित ही रहा। लगातार लगने वाले जाम से लोग परेशान रहे। डायवर्सन भी अव्यवस्थित और दलदली था, जिससे लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। पुल के टूटने से शहर दो हिस्सों में बंट गया था, जिसका सीधा असर व्यापार पर पड़ा।

    धर्मेंद्र प्रसाद, युवा व्यवसायी, ने बताया कि जाम और आवागमन में बाधा के कारण उपभोक्ताओं का आना-जाना लगभग बंद हो गया था। इसका व्यापार पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। दुकानों का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि उनकी समस्याओं की सुध लेने वाला कोई नहीं है तथा निर्माण कार्य की गति काफी धीमी रही है।

    रौशन कुमार ने कहा कि पुल और सड़क निर्माण से विकास तथा व्यापार को बढ़ावा मिलता है, लेकिन इस पुल का निर्माण शुरू होते ही व्यापार और आवागमन दोनों प्रभावित हो गए। बिना समुचित योजना के निर्माण कार्य किए जाने से व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने सवाल उठाया कि व्यापारियों को हुई क्षति की भरपाई कौन करेगा।

    रामबच्चन प्रसाद ने बताया कि निर्माणाधीन पुल लोगों के लिए जानलेवा साबित हुआ। अब तक वाहन पलटने की कई घटनाओं में 15 से 20 लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि पर्याप्त बैरिकेडिंग नहीं होने से रास्ता बंद रहने के बावजूद कोई सांकेतिक बोर्ड या चेतावनी संकेत नहीं लगाया गया था।

    इसी दौरान पुल के दक्षिणी छोर पर गिरकर एक बाइक सवार युवक की मौत भी हो गई थी। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य कब तक पूरा होगा और इसकी लागत कितनी है, इसकी जानकारी देने वाला कोई सूचना बोर्ड भी नहीं लगाया गया है।

    अंतिम चरण में है निर्माण कार्य : एसडीओ

    एसडीओ मनीष कुमार ने बताया कि पुल निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और फिलहाल आवागमन शुरू कर दिया गया है। दलदली और कीचड़युक्त स्थानों से लोगों को राहत दिलाने के लिए पुल के अप्रोच मार्ग को मोटरेबल बनाने हेतु पत्थर डाले जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि अभी पुल का हैंडओवर नहीं हुआ है, लेकिन अगले 10 से 15 दिनों के भीतर सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। इसके लिए निर्माण एजेंसी को सख्त निर्देश दिए गए हैं।