35 मीटर ऊंचा पहाड़ काटकर बना 250 मीटर का नया ट्रैक, भीषण बाढ़ के बाद फिर खुली भारत-नेपाल को जोड़ने वाली सड़क
नेपाल में बाढ़ से क्षतिग्रस्त भारत-नेपाल को जोड़ने वाले पृथ्वी राजमार्ग के कृष्णभीर ट्रैक को 35 मीटर ऊंचा पहाड़ काटकर बहाल कर दिया गया है।

भारत-नेपाल को जोड़ने वाली सड़क बहाल। फोटो पीएमओ नेपाल
HighLights
नेपाल में बाढ़ से क्षतिग्रस्त पृथ्वी राजमार्ग का कृष्णभीर ट्रैक खुला।
35 मीटर ऊंचा पहाड़ काटकर 250 मीटर नया ट्रैक बनाया गया।
भारत से काठमांडू व पर्यटक स्थलों की राह हुई आसान।
संजय कुमार उपाध्याय, मोतिहारी। नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ में तबाह आधारभूत संरचनाओं को ठीक करने में लगी सरकार ने भारत-नेपाल को जोड़नेवाले महत्वपूर्ण पृथ्वी राजमार्ग के नागढुंगा-मुग्लिन सड़क के कृष्णभीर ट्रैक को खोलने का काम पूरा कर लिया है।
इसी के साथ भारत की ओर से नेपाल की राजधानी काठमांडू व अन्य पर्यटक स्थलों को जानेवाले पर्यटक व अन्य लोगों की राह आसान हुई है।

नेपाल के पृथ्वी राजमार्ग में कृष्णभीर के पास बन रही सड़क। सौजन्य: पीएमओ नेपाल
बता दें कि रसुवा जिले में 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी से शुरू हुई बाढ़ का प्रभाव नेपाल के कई इलाकों में पड़ा था। तीन जिले सीधे तौर पर बाढ़ का प्रकोप झेलने पर मजबूर हुए। उनमें रसुवा, नुवाकोट व धादिंग शामिल रहा।
धादिंग जिले में 27 अगस्त की सुबह आई बाढ़ से पृथ्वी राजमार्ग स्थित कृष्णभीर की ‘सुरक्षा दीवार’ को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद 31 अगस्त को आई दूसरी बाढ़ में उक्त दीवार ढह गई। इस कारण यातायात सेवा पूरी तरह बाधित हो गई थी।

प्रधानमंत्री कार्यालय नेपाल की ओर से इस सिलसिले में दी गई जानकारी में बताया गया है कि प्रधानमंत्री ने दो सितंबर को प्रतिनिधि सभा में दिए गए बयान को पूरा किया।
सड़क इसी महीने में बनकर तैयार हो गई। पीएमओ के फेसबुक अकाउंट पर सड़क निर्माण से जुड़ी तस्वीरें भी साझा की गई हैं।
चार दिनों के अध्ययन के बाद पहाड़ काट तैयार की गई सड़क
नेपाल सरकार के सूत्रों के मुताबिक 31 अगस्त को दूसरी बाढ़ में इस सड़क से आवागमन ठप होने के बाद भारत से नेपाल ले जाई जानेवाली जरूरी चीजों की आपूर्ति करीब 60 प्रतिशत प्रभावित हो गई। बिहार व उत्तर प्रदेश के कई इलाकों से होनेवाला पर्यटन व्यापार भी प्रभावित हो गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार के बुनियादी ढांचा विकास मंत्रालय ने सड़क विभाग और नेपाल जियोटेक्निकल सोसाइटी के तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता से चार दिनों तक सड़क संपर्क बहाल करने के लिए त्वरित अध्ययन किया।
विशेषज्ञों ने कृष्णभीर की पहाड़ी को काटकर 250 मीटर लंबा नया ट्रैक बनाने का सुझाव प्राथमिक विकल्प के रूप में दिया।
विशेषज्ञों के सुझाव पर पांच सितंबर से पेड़ों की कटाई शुरू की गई। इसके बाद 35 मीटर ऊंचाई और 20 मीटर तक भीतर पहाड़ को काटकर ट्रैक का निर्माण किया गया।
17 सितंबर से दो तरफा आवागमन होगा शुरू
सड़क संपर्क बहाल करने के इस कार्य में तकनीकी विशेषज्ञों सहित 50 लोग लगातार प्रतिदिन 12 से 16 घंटे तक काम कर रहे। नतीजतन काम शुरू होने के दसवें दिन 14 सितंबर से परीक्षण के तौर पर गैस बुलेट समेत कुछ वाहनों का संचालन शुरू किया गया।
इसके बाद से सुबह और शाम आवश्यक वाहनों की आवाजाही जारी है। सड़क पर ग्रेवल बिछाने, नाली निर्माण और सड़क को और मजबूत बनाने का काम चल रहा है। ग्रेवल बिछाने का काम बुधवार की देर रात तक चला। 17 सितंबर यानी विश्वकर्मा पूजा के दिन गुरुवार की सुबह से दोनों दिशाओं में यातायात का संचालन शुरू हो जाएगा।
आवश्यक सामग्री का 60-70 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते पहुंचता काठमांडू
बता दें कि पृथ्वी राजमार्ग के नागढुंगा-मुग्लिन सड़क भारत-नेपाल (तराई क्षेत्र) को जोड़ने का लाइफ लाइन कारीडोर है। यह सड़क बिहार व उत्तर प्रदेश के कई जिलों को काठमांडू से जोड़ती है। मुग्लिन से एक हाईवे सीधे दक्षिण की ओर जाती है। इससे नेपाल की औद्योगिक राजधानी वीरगंज जुड़ती है।
वीरगंज बिहार के पूर्वी चंपारण के रक्सौल सीमा से जुड़ता है। भारत से काठमांडू जानेवाले मालवाहक वाहन 60 से 70 प्रतिशत सामान लेकर इसी रास्ते काठमांडू पहुंचते हैं। उत्तर प्रदेश के रूपडीहा और सोनौली बार्डर का रूट पोखरा व बुटवल होकर मुग्लिन के रास्ते ही काठमांडू से जुड़ते हैं।
इसके अतिरिक्त पर्यटन के लिहाज से भी यह सड़क काफी अहम मानी जाती है। भारत के रक्सौल, रुपडीहा व सोनौली बार्डर से प्रवेश करनेवाले पर्यटक इसी रास्ते से होकर जाना पसंद करते हैं।
बता दें कि मुग्लिन की प्राकृतिक छटा पर्यटकों को लुभाती है। इसके अतिरिक्त मनोकामना मंदिर जाने के लिए भी यह सड़क खास है। बांदीपुर, गोरखा, नागढुंगा सुरंग मार्ग व त्रिशूली नदी आदि पर्यटक स्थल भी पर्यटकों को खूब लुभाते हैं।
