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    पूर्वी चंपारण में फिर सियार का हमला, छह लोगों को काटा, पहले दो की गई थी जान

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 07:13 PM (GMT+05:30)

    पूर्वी चंपारण के नोनौरा गांव में सियार के हमले से छह लोग घायल हो गए, जिनमें बुजुर्ग और बच्चे शामिल हैं। घायलों को अस्पताल में एंटी-रैबीज टीका नहीं मिल ...और पढ़ें

    पूर्वी चंपारण में सियार के हमले में घायल बच्चा।

    पूर्वी चंपारण में सियार के हमले में घायल बच्चा।

    HighLights

    1. पूर्वी चंपारण के नोनौरा गांव में सियार का हमला।

    2. हमले में छह लोग घायल, जिनमें बुजुर्ग और बच्चे।

    3. अस्पताल में एंटी-रैबीज टीके की अनुपलब्धता से चिंता।

    संवाद सहयोगी, बनकटवा (पूर्वी चंपारण)। पूर्वी चंपारण के बनकटवा प्रखंड स्थित नोनौरा गांव में बुधवार को उस समय अफरातफरी मच गई, जब एक सियार आबादी में घुस आया और राह चलते लोगों पर हमला कर दिया।

    कुछ ही मिनटों में बुजुर्गों और बच्चों समेत छह लोग घायल हो गए। ग्रामीणों ने लाठी-डंडों के सहारे सियार को गांव से खदेड़ा, लेकिन घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। सबसे बड़ी चिंता यह रही कि घायलों को अस्पताल पहुंचने पर एंटी रैबीज टीका भी उपलब्ध नहीं मिला।

    गांव में घुसते ही लोगों पर किया हमला

    घोड़ासहन प्रखंड के नोनौरा गांव में अचानक पहुंचे सियार ने लोगों पर हमला शुरू कर दिया। घरों के बाहर और रास्ते से गुजर रहे लोगों को उसने निशाना बनाया। हमले में चार बुजुर्ग और दो बच्चे घायल हो गए। घटना के बाद पूरे गांव में अफरातफरी मच गई।

    ग्रामीणों ने लाठी-डंडे से खदेड़ा

    सियार के हमले की सूचना फैलते ही ग्रामीण मौके पर जुट गए। लोगों ने लाठी-डंडों की मदद से सियार को गांव से बाहर खदेड़ा। इसके बाद घायल लोगों को तत्काल इलाज के लिए घोड़ासहन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।

    बुजुर्गों और बच्चों समेत छह घायल

    घायलों में 62 वर्षीय जियालाल बैठा, 60 वर्षीय नागेंद्र सिंह, छह वर्षीय शम्या खातून, शोयब आलम, सत्यम कुमार, 60 वर्षीय माधो मुखिया और 65 वर्षीय राम बहादुर मुखिया शामिल हैं। सभी का प्राथमिक उपचार किया गया। चिकित्सकों ने घायलों को आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी।

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    पहले भी हो चुकी है जानलेवा घटना

    यह पहली बार नहीं है जब पूर्वी चंपारण में सियार के हमले ने लोगों की चिंता बढ़ाई है। इससे पहले पताही प्रखंड में सियार के काटने से दीनानाथ राउत और गनी साह की मौत हो चुकी थी। इस घटना के बाद एक बार फिर ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। लोग वन विभाग से जंगली जानवरों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने और स्वास्थ्य विभाग से पर्याप्त मात्रा में एंटी रैबीज टीका उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।

    अस्पताल में नहीं मिला एंटी रैबीज टीका

    घटना के बाद एक और गंभीर समस्या सामने आई। ग्रामीणों का आरोप है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटी रैबीज टीका उपलब्ध नहीं था, जिससे कई घायलों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. संजय कुमार ने बताया कि फिलहाल टीका उपलब्ध नहीं है। नई खेप आने पर सभी जरूरतमंदों को टीका लगाया जाएगा।

    वन विभाग और पुलिस ने बरतने को कहा सतर्कता

    सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस और वन विभाग की टीम गांव पहुंची। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और जंगली जानवर दिखने पर तुरंत सूचना देने की अपील की। उल्लेखनीय है कि इससे पहले पताही प्रखंड में सियार के हमले में दो ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। ऐसे में ग्रामीणों ने वन विभाग से इलाके में विशेष निगरानी और स्वास्थ्य विभाग से जल्द एंटी रैबीज टीका उपलब्ध कराने की मांग की है।