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    पूर्वी चंपारण में गैरमजरुआ जमीन खरीद-बिक्री मामले में बड़ी कार्रवाई, प्रधान लिपिक समेत तीन हटाए गए

    Updated: Thu, 02 Jul 2026 07:02 PM (IST)

    Motihari Land Registry Investigation: मोतिहारी में हनुमान शुगर मिल की जमीन से जुड़े गैरमजरुआ भूमि घोटाले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिला ...और पढ़ें

    सौरभ सुमन यादव, जिलाधिकारी! फाइल फोटो

    सौरभ सुमन यादव, जिलाधिकारी! फाइल फोटो

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    संजय कुमार उपाध्याय, मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)। Motihari Sugar Mill Land Scam: मोतिहारी स्थित हनुमान शुगर मिल की जमीन की आड़ में सरकारी (गैरमजरुआ) जमीन की अवैध खरीद-बिक्री के मामले में जिला प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई की है।

    जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिला राजस्व कार्यालय के प्रधान लिपिक प्रेम नारायण दिसवा समेत तीन कर्मियों को उनके पदों से हटा दिया है। विवादित खाता संख्या 109 की जमीन को 'रोक सूची' से हटाए जाने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।

    जिला राजस्व कार्यालय की पूरी टीम बदली

    जिलाधिकारी द्वारा की गई इस समीक्षात्मक कार्रवाई के तहत जिला राजस्व कार्यालय में पिछले 7 वर्षों से जमे प्रधान लिपिक प्रेम नारायण दिसवा को हटा दिया गया है। उनके साथ ही विवादों में रहे अन्य कर्मियों पर भी गाज गिरी है:

    • कुमारी ममता सिन्हा: इन्हें राजस्व शाखा से हटाकर राष्ट्रीय बचत कार्यालय भेज दिया गया है।
    • मुन्ना कुमार सिंह: इन्हें जिला बैंकिंग शाखा में स्थानांतरित किया गया है। मुन्ना कुमार पर पूर्व में रिकॉर्ड रूम में रहने के दौरान गलत तरीके से दस्तावेजों की कॉपी देने का आरोप लगा था, जिसके बाद तत्कालीन डीएम ने उन्हें हटाया था, लेकिन हाल ही में वे दोबारा राजस्व शाखा में आ गए थे।

    जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यह फेरबदल प्रशासनिक दृष्टिकोण से काम में पारदर्शिता और बेहतरी लाने के लिए किया गया है।

    जमीन खरीदने वालों के खिलाफ FIR

    जिला निबंधन कार्यालय से वर्ष 2017 से लेकर अब तक के दस्तावेजों की मंगाई गई रिपोर्ट में एक नया खुलासा हुआ है। जिला अवर निबंधन पदाधिकारी की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2023 के बाद से अब तक खाता-109 की जमीन की कोई भी नई आधिकारिक रजिस्ट्री नहीं हुई है।

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    इस तथ्य के सामने आने के बाद प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जो लोग मौखिक बातचीत या आपसी एग्रीमेंट के आधार पर इस प्रतिबंधित सरकारी जमीन को खरीद रहे हैं या निर्माण करा रहे हैं, उन्हें भू-माफिया माना जाएगा।

    मोतिहारी सदर के अंचल अधिकारी और अमीन को इस पूरी भूमि का भौतिक सत्यापन करने का निर्देश दिया गया है। जहां कहीं भी अवैध कब्जा या निर्माण पाया जाएगा, उसे ढहाने के साथ ही संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई जाएगी।

    'खाता-109' का यह पूरा विवाद

    यह पूरा मामला माननीय उच्च न्यायालय के एक आदेश से जुड़ा है। हाई कोर्ट ने सीडब्ल्यूजेसी नंबर 13711/2024 (हर्षवर्धन बहेती बनाम बिहार राज्य) में 16 मई 2025 को एक आदेश जारी किया था।

    कमेटी का फैसला: इस आदेश के आलोक में जब अपर समाहर्ता की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय कमेटी रोक सूची पर पुनर्विचार करने बैठी, तो चीनी मिल की रैयती जमीन के साथ-साथ सरकारी 'गैरमजरूआ' किस्म की खाता संख्या 109 की भूमि को भी रोक सूची से मुक्त कर दिया गया। इसका आधिकारिक आदेश 1 दिसंबर 2025 को जारी हुआ था।

    पहली कार्रवाई: इस लापरवाही और गड़बड़ी का खुलासा तब हुआ जब इस जमीन के ऑनलाइन सुधार (परिमार्जन) का खेल शुरू हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए पहली कार्रवाई 30 जून 2026 को संबंधित अंचल कर्मचारी पर की गई थी, जिसके बाद अब जिला मुख्यालय स्तर के बड़े बाबुओं पर गाज गिरी है। 

    जमीन को रोक सूची से हटाने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया समीक्षा में ठीक पाई गई है। गैरमजरूआ जमीन की खरीद-बिक्री कहीं भी होती है तो इसके लिए क्रेता व विक्रेता दोनों ही जिम्मेदार होंगे। जरूरी है कि लोग जागरूक रहें। जो भी इस तरह की गड़बड़ी करेगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। रोक सूची जिला निबंधन कार्यालय को उपलब्ध है।

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    सौरभ सुमन यादव, जिलाधिकारी, पूर्वी चंपारण