भारत-नेपाल सीमा पर व्यापार और पर्यटन को लगेंगे पंख, रक्सौल एयरपोर्ट के निर्माण को मिली रफ्तार
रक्सौल एयरपोर्ट परियोजना को गति मिली है, जिसमें इंजीनियरिंग परामर्श के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को 10 प्रतिष्ठित कंपनियों से तकनीकी बोलियां प्र ...और पढ़ें

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
रक्सौल एयरपोर्ट के लिए 10 कंपनियों ने तकनीकी बोलियां दीं।
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण अब इन बोलियों का मूल्यांकन करेगा।
एयरपोर्ट से सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार और पर्यटन बढ़ेगा।
जागरण संवाददाता, रक्सौल (पूच)। भारत-नेपाल सीमा पर प्रस्तावित बहुप्रतीक्षित रक्सौल एयरपोर्ट के निर्माण की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है।
एयरपोर्ट की इंजीनियरिंग परामर्श (इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी) के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) को 10 प्रतिष्ठित कंपनियों से तकनीकी बोलियां प्राप्त हुई हैं। अब इन बोलियों का तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा।
इसके बाद चयनित एजेंसी एयरपोर्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), डिजाइन और निर्माण की रूपरेखा तैयार करेगी। इसकीं जानकारी भाजपा युवा नेता गुड्डू सिंह और प्रो.मनीष दुबे ने दी।
बताया कि पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ. सजंय जयसवाल के पहल रंग लाया है। संभवना व्यक्त किया कि आगमी लोकसभा चुनाव के पूर्व उड़ाने शुरू हो जाएगी।
आगे बताया कि तकनीकी बोली दाखिल करने वाली प्रमुख कंपनियों में राइट्स लिमिटेड, निप्पॉन कोएई इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, टिप्सा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ध्रुव कंसल्टेंसी सर्विसेज लिमिटेड, आरवी एसोसिएट्स आर्किटेक्ट्स इंजीनियर्स एंड कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड, स्टप कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, वैपकॉस लिमिटेड, कंसल्टिंग इंजीनियर्स ग्रुप तथा फीडबैक इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
प्रस्तावित रक्सौल एयरपोर्ट का निर्माण 352 एकड़ भूमि पर किया जाएगा। इसमें 213 एकड़ भूमि पहले से उपलब्ध है, जबकि शेष 139 एकड़ भूमि का अधिग्रहण अंतिम चरण में है। भूमि अधिग्रहण के लिए केंद्र सरकार ने 10 जनवरी, 2026 को 207.70 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की थी।
रक्सौल एयरपोर्ट के निर्माण से पूर्वी चंपारण सहित भारत-नेपाल सीमा से जुड़े सीमावर्ती क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे व्यापार, पर्यटन, उद्योग और निवेश को नई गति मिलेगी।
साथ ही स्थानीय लोगों को हवाई यात्रा के लिए पटना या अन्य शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। एयरपोर्ट शुरू होने के बाद सीमावर्ती क्षेत्र की हवाई संपर्क व्यवस्था मजबूत होगी और क्षेत्रीय विकास को नई उड़ान मिलेगी।
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