रक्सौल में दोहरी मार झेल रहे किसान; नलकूप से सिंचाई बना सपना, खाद की भी समस्या
रक्सौल के किसान सिंचाई और खाद की दोहरी मार झेल रहे हैं। सरकारी नलकूप लगे होने के बावजूद चालू नहीं हैं, जिससे किसानों को महंगे पंपसेट से सिंचाई करनी पड ...और पढ़ें
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जहां पानी मिल रहा है वहीं पंपसेट लगाकर गेहूं का पटवन कर रहे है किसान। फोटो जागरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, रक्सौल। गांवों के सरेहों में लगाए गए नलकूप के पास विद्युत आपूर्ति बहाल है। यहां से गुजरते समय रात में बल्ब की दुधिया रोशनी मिलती है। लेकिन, जब-जब पानी की आवश्यकता पड़ती है। किसानों के लिए आज भी नलकूप से पानी सपना बना हुआ है। इस बार कनाल में पानी नहीं है। खेतों में गेहूं की फसलें लहलहा रही है।
किसान सिंचाई को लेकर चिंतित हो रहे है। किसान पटवन के लिए व्याकूल हो रहे है। बुआई विलंब होने के बाद भी खेतों में गेहूं की फसल के विकास को देख किसानों प्रफुल्लित हो रहे है। जिसका समय से पटवन और रसायनिक उर्वरक का छिड़काव बेहतर उत्पादन दे सकता है। इसको लेकर किसान नहर, नाला, पोखर जहां पानी दिख रहा है वहीं पंपसेट के जरिए गेहूं की पटवन में जुट जा रहे है। लेकिन, सरकार की व्यवस्था नलकूप या फिर नहर से सिंचाई की व्यवस्था मानसून से कम नहीं है। इसके आने का समय तो सुनिश्चित है लेकिन, कब आएगा यह कहना मुश्किल हो जाता है।
उसी तरह सिंचाई के लिए सरेह में लगाए नलकूप की स्थिति है। यह सरकार के द्वारा लगाया गया है। जो चालू होगा किसानों को भरोसा है। लेकिन, कब चालू होगा कहा नहीं जा सकता है। सरकार इसे चालू कराकर सरेह में पानी पहुंचाने के लिए माकूल व्यवस्था सुनिश्चित करती है तो निश्चित ही किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त होगा। जो किसानों को खेती करने के लिए प्रेरित करेगा।
पंपसेट और बोरिंग के सहारे हो रही है गेहूं की सिंचाई
अनुमंडल क्षेत्र के गांवों के खेतों में लहलहा रही गेहूं की फसलों में सिंचाई का कार्य शुरु हो गया है। लेकिन, सरेह में लगाए गए नलकूप के बजाए पंपसेट से किसान गेहूं का पटवन कर रहे है। नलकूप विभाग की उदासीनता के कारण बंद पड़े नलकूपों से सिंचाई के लिए पानी किसानों को नहीं मिल रहा है। इसे चालू कराने के लिए किसान स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ अधिकारियों का दरवाजा खटखटा चुके है। लेकिन, इस समस्या का निदान अभी तक नहीं हुआ है।
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हालांकि विभाग के द्वारा अनुदानित दर पर गांवों में बोरिंग कराया जा रहा है। जिसे पटवन का कार्य किसानों के लिए आर्थिक बोझ बन रहा है। लेकिन, किसानों को राहत देने के लिए बंद नलकूप को सूचारु कराने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। जिसे किसान उर्वरक और सिंचाई की दोहरी मार झेलने को विवश हो रहे है।