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    'पहले पंखा-पानी चाहिए'... गया में सरकारी स्कूल के बच्चों ने SDM ऑफिस पहुंचकर मचा दी हलचल; हुआ ये असर

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 09:30 AM (IST)

    टिकारी अनुमंडल के सिमुआरा मिडिल स्कूल के 40 से अधिक छात्रों ने खराब सुविधाओं के खिलाफ एसडीएम कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। डीएम के निर्देश पर ...और पढ़ें

    टिकारी के मध्य विद्यालय सिमुआरा के निरीक्षण के दौरान बच्चों से बातचीत करते डीपीओ। सौजन्य-शिक्षा विभाग

    टिकारी के मध्य विद्यालय सिमुआरा के निरीक्षण के दौरान बच्चों से बातचीत करते डीपीओ। सौजन्य-शिक्षा विभाग

    HighLights

    1. सिमुआरा स्कूल के छात्रों ने खराब सुविधाओं के खिलाफ विरोध किया।

    2. एसडीएम ने जांच समिति बनाई, शिक्षा विभाग ने निरीक्षण किया।

    3. प्रधानाध्यापक को 7 दिन में व्यवस्था सुधारने का अल्टीमेटम मिला।

    जागरण संवाददाता, गयाजी। टिकारी अनुमंडल क्षेत्र के मिडिल स्कूल सिमुआरा की बदहाल व्यवस्था के खिलाफ छात्रों का गुस्सा आखिरकार प्रशासन तक पहुंच गया।

    छोटे-छोटे बच्‍चों ने आंदोलन का रास्‍ता अख्त‍ियार कर लिया। स्कूल में महीनों से चली आ रही बुनियादी सुविधाओं की कमी से परेशान 40 से अधिक छात्र-छात्राएं मंगलवार को सीधे टिकारी अनुमंडल कार्यालय पहुंच गए।

    हाथों में आवेदन लेकर पहुंचे बच्चों ने न सिर्फ अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं, बल्कि स्कूल की अव्यवस्थाओं के खिलाफ नारेबाजी भी की।

    छात्रों के अचानक बड़ी संख्या में अनुमंडल कार्यालय पहुंचने से कुछ देर के लिए वहां हलचल मच गई। उस समय एसडीएम प्रवीण कुंदन किसी सरकारी कार्य से बाहर गए हुए थे।

    छात्रों की शिकायत सुनने के लिए कार्यपालक दंडाधिकारी रंजीत कुमार सिंह को भेजा गया, लेकिन बच्चे एसडीएम से सीधे मिलने की मांग पर अड़े रहे। गुरारू से लौटने के बाद एसडीएम ने स्वयं छात्रों से मुलाकात की। 

    स्कूल में पंखे, पानी और भोजन तक की शिकायत

    छात्रों ने प्रशासन को बताया कि विद्यालय में कई महीनों से अधिकांश पंखे खराब पड़े हैं, पेयजल के लिए लगा चापाकल ठीक से काम नहीं करता। 

    मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है, कई बेंच-डेस्क टूटे हुए हैं और कक्षाओं में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। बच्चों का कहना था कि इन समस्याओं की शिकायत पहले भी कई बार की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम ने तत्काल जांच समिति गठित कर चार दिनों के भीतर समस्याओं की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया।

    डीएम के निर्देश पर पहुंची शिक्षा विभाग की टीम

    इधर, बच्चों की शिकायत जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर तक भी पहुंची। डीएम के निर्देश पर बुधवार को प्रारंभिक शिक्षा एवं समग्र शिक्षा अभियान के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) नित्यम कुमार गौरव तथा प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) अभय कुमार रमण ने विद्यालय का औचक निरीक्षण किया।

    निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, साफ-सफाई, मध्याह्न भोजन, पेयजल, शौचालय, बिजली, कक्षा संचालन और आधारभूत सुविधाओं का जायजा लिया।

    जांच में कई कमियां सामने आने पर प्रधानाध्यापक को सात दिनों के भीतर सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का अल्टीमेटम दिया गया।

    बच्चों से सीधे पूछे सवाल, अभिलेख भी खंगाले

    निरीक्षण टीम ने छात्र-छात्राओं से सीधे बातचीत कर विद्यालय में मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी ली। बच्चों से पठन-पाठन, मध्याह्न भोजन, पेयजल, शौचालय, बिजली और कक्षा संचालन से जुड़े सवाल पूछे गए।

    इसके अलावा अधिकारियों ने विभिन्न कक्षाओं का निरीक्षण कर शिक्षण व्यवस्था का आकलन किया तथा विद्यालय के अभिलेखों, उपस्थिति पंजी और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की।

    सात दिनों में सुधार का आदेश

    जांच के बाद अधिकारियों ने प्रधानाध्यापक को निर्देश दिया कि सात दिनों के भीतर सभी कक्षाओं एवं शौचालयों की साफ-सफाई सुनिश्चित कराई जाए, आवश्यक मरम्मत कार्य पूरा कराया जाए तथा मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता में सुधार किया जाए।

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    इसके अलावा सभी कक्षाओं में सुरक्षित विद्युत वायरिंग, खराब पंखों की मरम्मत या नए पंखों की व्यवस्था करने, निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार नियमित कक्षाएं संचालित करने और सभी शिक्षकों को प्रतिदिन पाठ्य-टीका तैयार कर उसका संधारण करने का निर्देश दिया गया।

    लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

    डीपीओ नित्यम कुमार गौरव ने स्पष्ट कहा कि विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधारभूत सुविधाओं के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो संबंधित प्रधानाध्यापक, पदाधिकारियों और जिम्मेदार कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

    उन्होंने कहा कि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना शिक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी उद्देश्य से विद्यालयों का नियमित औचक निरीक्षण किया जा रहा है।