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    न्यूयॉर्क में लगी आग की लपटें बोधगया तक पहुंचीं,, आखिर क्यों निकला कैंडल मार्च?

    Updated: Sat, 11 Jul 2026 10:16 PM (IST)

    बोधगया में तिब्बती मंदिर से तिब्बत की स्वतंत्रता, मानवाधिकारों और विश्व शांति के लिए एक कैंडल मार्च निकाला गया। इसमें न्यूयॉर्क में दिवंगत लोबसांग रंग ...और पढ़ें

    लोबसांग रंगजेन को दी गई श्रद्धांजलि

    लोबसांग रंगजेन को दी गई श्रद्धांजलि

    HighLights

    1. तिब्बत की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के लिए बोधगया में कैंडल मार्च।

    2. न्यूयॉर्क में दिवंगत तिब्बती कार्यकर्ता लोबसांग रंगज़ेन को श्रद्धांजलि अर्पित।

    3. महाबोधि मंदिर में विश्व शांति और सद्भाव के लिए विशेष प्रार्थना।

    संवाद सूत्र, बोधगया(गयाजी)। तिब्बत की स्वतंत्रता, मानवाधिकारों की रक्षा और विश्व शांति की कामना को लेकर शनिवार शाम बोधगया स्थित तिब्बती मंदिर से कैंडल मार्च और शांति जुलूस निकाला गया। इसमें विभिन्न देशों के बौद्ध मठों के भिक्षु, मठाधीश, तिब्बती समुदाय के सदस्य तथा बड़ी संख्या में हिमालयी और पहाड़ी क्षेत्रों के लोग शामिल हुए।

    जुलूस के दौरान शांति, अहिंसा और मानवता का संदेश दिया गया। प्रतिभागियों ने तिब्बत में शांति और मानवाधिकारों की रक्षा की मांग भी उठाई।

    तिब्बती मंदिर से शुरू हुआ शांति मार्च

    कैंडल मार्च की शुरुआत बोधगया स्थित तिब्बती बौद्ध मठ से हुई। वहां से जुलूस थाई बौद्ध मठ होते हुए महाबोधि मंदिर परिसर तक पहुंचा।

    पूरे मार्ग में भिक्षुओं ने शांति मंत्रों का जाप किया और करुणा तथा अहिंसा के संदेश को लोगों तक पहुंचाया। हाथों में मोमबत्तियां लिए लोग शांतिपूर्वक जुलूस में शामिल रहे।

    लोबसांग रंगजेन को दी गई श्रद्धांजलि

    इस दौरान 2 जुलाई को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले तिब्बती कार्यकर्ता लोबसांग रंगज़ेन को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

    उनकी स्मृति में उपस्थित लोगों ने मौन रखकर श्रद्धासुमन अर्पित किए और विश्व शांति की कामना की।

    महाबोधि मंदिर में हुई विशेष प्रार्थना

    शांति मार्च के समापन पर श्रद्धालु और भिक्षु महाबोधि मंदिर पहुंचे, जहां पूजा-अर्चना के साथ विशेष प्रार्थना की गई।

    भिक्षुओं ने लोबसांग रंगज़ेन की स्मृति में प्रार्थना करते हुए शांति, मानवाधिकारों की रक्षा और वैश्विक सद्भाव का संदेश दिया।