पवित्र बोधि वृक्ष पर मिला मिलीबग का संक्रमण, देहरादून के वैज्ञानिकों ने किया 'इको-फ्रेंडली' इलाज
बोधगया के महाबोधि मंदिर परिसर में स्थित पवित्र बोधि वृक्ष पर मिलीबग का हल्का संक्रमण पाए जाने के बाद उसका इको-फ्रेंडली उपचार किया गया। ...और पढ़ें

देहरादून के वैज्ञानिकों ने किया इको-फ्रेंडली इलाज
HighLights
पवित्र बोधि वृक्ष पर मिलीबग का हल्का संक्रमण पाया गया।
देहरादून के वैज्ञानिकों ने किया इको-फ्रेंडली पेस्ट मैनेजमेंट।
मानसून से पहले वृक्ष की सुरक्षा और दीर्घायु सुनिश्चित।
संवाद सूत्र, बोधगया। विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर परिसर स्थित पवित्र बोधि वृक्ष की सुरक्षा और दीर्घायु सुनिश्चित करने के लिए गुरुवार को एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक पहल की गई।
मानसून के आगमन से पहले बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति (बीटीएमसी) ने फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफआरआई), देहरादून के वैज्ञानिकों की देखरेख में पवित्र बोधि वृक्ष एवं उसके समीप स्थित एक अन्य वृक्ष पर इको-फ्रेंडली पेस्ट मैनेजमेंट ट्रीटमेंट कराया।
बोधि वृक्ष पर मिलीबग का हल्का संक्रमण
नियमित वैज्ञानिक निरीक्षण के दौरान एफआरआई के वैज्ञानिक शैलेश पांडे और संतन भरथवाल ने बोधि वृक्ष पर मिलीबग का हल्का संक्रमण पाया। संक्रमण के कारण कुछ पत्तियों के पीले होने के संकेत मिले।
वैज्ञानिकों ने बताया कि मानसून के दौरान नमी बढ़ने से ऐसे कीट तेजी से फैल सकते हैं। इसे देखते हुए संक्रमण को बढ़ने से रोकने के लिए पर्यावरण के अनुकूल विशेष स्प्रे का प्रयोग किया गया।
पास के वृक्ष पर भी समान उपचार
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह उपचार पूरी तरह एहतियाती है और इसका उद्देश्य पवित्र बोधि वृक्ष की समग्र सेहत को सुरक्षित रखते हुए भविष्य में किसी भी प्रकार के संक्रमण को रोकना है। संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए पास के वृक्ष पर भी समान उपचार किया गया।
यह विशेष उपचार एफआरआई के वैज्ञानिकों की प्रत्यक्ष निगरानी में संपन्न हुआ। इस दौरान बीटीएमसी की सचिव डॉ महाश्वेता महारथी, सदस्य डॉ अरविंद कुमार सिंह, सदस्य किरण लामा, महाबोधि मंदिर के मुख्य भिक्षु भिक्खु चालिंदा, वरिष्ठ भिक्षु भिक्खु डॉ मनोज, रेजिडेंट भिक्षु नीमा लामा, मंदिर सुपरवाइजर शिव शंकर सिंह सहित बीटीएमसी के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
आसपास के वृक्षों की भी बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित
बीटीएमसी के अधिकारियों ने बताया कि मानसून शुरू होने से पहले इस तरह का वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल उपचार कर पवित्र बोधि वृक्ष को संभावित कीट संक्रमण से सुरक्षित रखने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल बोधि वृक्ष, बल्कि उसके आसपास के वृक्षों की भी बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी और उनकी दीर्घकालिक सेहत बनी रहेगी।