25000000 रुपये की संदिग्ध दवाएं और रैपर-सीलिंग मशीन... क्या गया में ही तैयार हो रहा था 'नकली दवा' का पूरा खेल?
गया में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स की 5 दिवसीय कार्रवाई में 2.50 करोड़ रुपये की संदिग्ध दवाएं बरामद की गईं, चार गोदाम सील हुए और दो आरोपी गिरफ्तार ह ...और पढ़ें

चार गोदामों से मिले सुराग
HighLights
गया में 2.50 करोड़ की संदिग्ध दवाएं जब्त, 2 गिरफ्तार।
चार गोदाम सील, पैकिंग सामग्री और सीलिंग मशीन भी मिली।
ऑक्सीटोसिन सहित कई ब्रांडों की नकली दवाओं का संदेह।
जागरण संवाददाता, गयाजी। गयाजी में दवाओं के कथित अवैध कारोबार के खिलाफ हुई पांच दिन की कार्रवाई ने एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा किया है। सेंट्रल ब्यूरो आफ नारकोटिक्स (सीबीएन) के आपरेशन स्प्यूरियस के तहत 23 से 27 जुलाई तक चली संयुक्त कार्रवाई में करीब 2.50 करोड़ रुपये मूल्य की संदिग्ध दवाएं बरामद की गईं।
चार गोदाम सील किए गए और दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। अब जांच एजेंसियों की नजर इस बात पर है कि इन दवाओं की सप्लाई कहां-कहां तक फैली थी।
चार गोदामों से मिले सुराग, अब नेटवर्क की तलाश
सीबीएन, जिला औषधि प्रशासन और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीम ने मानपुर, मुरारपुर और बोधगया में छापेमारी की। अधिकारियों के अनुसार, बरामद दवाओं के नकली या मानकविहीन होने की अंतिम पुष्टि प्रयोगशाला जांच के बाद होगी।
हालांकि, बड़ी मात्रा में संदिग्ध दवाओं के साथ पैकिंग सामग्री मिलने से जांच का दायरा बढ़ गया है।
मुरारपुर में छापेमारी से खुली नई कड़ी
अभियान का सबसे अहम पड़ाव सोमवार को मुरारपुर रहा। कोतवाली थाना क्षेत्र में चार गोदामों पर एक साथ कार्रवाई की गई और करीब 17.50 लाख रुपये की संदिग्ध दवाएं जब्त हुईं।
गोदाम संचालक सुमित बरनवाल और संजय कुमार शर्मा को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है। इससे पहले मानपुर के बुनियादगंज थाना क्षेत्र से करीब 50 लाख रुपये की संदिग्ध दवाएं मिली थीं।
ऑक्सीटोसिन से लेकर बड़े ब्रांडों तक, जांच का दायरा बढ़ा
जिला औषधि नियंत्रक डा. सच्चिदानंद विक्रम के अनुसार, कार्रवाई का मुख्य फोकस ऑक्सीटोसिन के कथित अवैध निर्माण और आपूर्ति पर है। प्रारंभिक जांच में आशंका है कि ऑक्सीटोसिन सहित अन्य दवाओं की सप्लाई बिहार के अलावा दूसरे राज्यों तक भी की जा रही थी।अब जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के स्रोत और सप्लाई चेन का पता लगाने में जुटी हैं।
दवा के साथ रैपर और सीलिंग मशीन ने बढ़ाया शक
छापेमारी में क्लैवम-625, ओ2 टैबलेट, एमवीआई इंजेक्शन, पैनटॉप-डी टैबलेट और जिंकविट जैसे प्रमुख ब्रांडों के नाम से जुड़ी संदिग्ध दवाएं मिलीं।
इसके अलावा खाली लेबल, रैपर, पैकिंग सामग्री और सीलिंग मशीन भी जब्त की गई। इन सामानों की बरामदगी से जांच टीम को आशंका है कि कहीं दवाओं की पैकिंग और लेबलिंग का काम मौके पर ही तो नहीं किया जा रहा था।
खबरें और भी

अब लैब रिपोर्ट बताएगी असली खेल
बरामद दवाओं के नमूने गुणवत्ता जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दवाएं नकली, स्प्यूरियस या निर्धारित गुणवत्ता मानकों से बाहर थीं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपितों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पांच दिन की कार्रवाई के बाद अब नेटवर्क की बारी
पूरे अभियान में करीब 2.50 करोड़ रुपये की संदिग्ध दवाओं की बरामदगी, चार गोदामों को सील करने और दो गिरफ्तारियों के बाद जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल नेटवर्क की अगली कड़ी का है।
आखिर ये दवाएं कहां बन रही थीं, इनकी सप्लाई किन इलाकों में हो रही थी और इस कथित कारोबार से और कौन लोग जुड़े हैं?
अधिकारियों के अनुसार, इन सभी बिंदुओं पर जांच जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।