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    हावड़ा-जोधपुर एक्सप्रेस सोना लूटकांड में बड़ा एक्शन, फरार 4 सिपाही और 2 सिविलियन पर गिरफ्तारी वारंट

    Updated: Mon, 12 Jan 2026 08:57 PM (IST)

    हावड़ा-जोधपुर एक्सप्रेस में हुए सोना लूटकांड में रेल पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आई है। गया रेल न्यायालय ने फरार चार सिपाहियों और दो सिविलियनों क ...और पढ़ें

    फरार 4 सिपाही और 2 सिविलियन पर गिरफ्तारी वारंट जारी

    फरार 4 सिपाही और 2 सिविलियन पर गिरफ्तारी वारंट जारी

    HighLights

    1. सोना लूटकांड में चार सिपाही और दो सिविलियन फरार।

    2. रेल न्यायालय ने सभी छह आरोपितों के खिलाफ वारंट जारी किया।

    3. एसआईटी ने आरोपितों की तलाश तेज की, कुर्की की तैयारी।

    जागरण संवाददाता, गयाजी। हावड़ा-जोधपुर एक्सप्रेस में यात्री से हुई सोना लूट की सनसनीखेज घटना में रेल पुलिस के ही जवानों की संलिप्तता सामने आने के बाद अब कार्रवाई तेज हो गई है। गया रेल थाना क्षेत्र से जुड़े इस हाईप्रोफाइल कांड में फरार चल रहे चार सिपाहियों और दो सिविलियनों के खिलाफ रेल न्यायालय ने सोमवार को गिरफ्तारी वारंट निर्गत कर दिया है।

    मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने रेल न्यायालय से वारंट प्राप्त कर लिया है और अब आरोपितों की तलाश तेज कर दी गई है।

    रेल न्यायालय से जिन लोगों के खिलाफ वारंट जारी हुआ है, उनमें गया रेल थाना के सिपाही करण कुमार, अभिषेक चतुर्वेदी, रंजय कुमार और आनंद मोहन शामिल हैं। इनके अलावा दो सिविलियन परवेज आलम और रेल थाना के पूर्व चालक सीताराम उर्फ अमन शर्मा भी नामजद हैं।

    एसआईटी के अनुसार, यदि आरोपितों ने शीघ्र गिरफ्तारी नहीं दी या न्यायालय में आत्मसमर्पण नहीं किया तो अगली प्रक्रिया के तहत उनके खिलाफ इश्तिहार जारी किया जाएगा और उसके बाद कुर्की की कार्रवाई भी की जाएगी।

    गौरतलब है कि यह घटना 21 नवंबर की है, जब कानपुर के स्वर्ण व्यवसायी मनोज सोनी का कर्मचारी धनंजय शाश्वत हावड़ा-बीकानेर एक्सप्रेस से सोना लेकर यात्रा कर रहा था। किसी तरह इसकी सूचना गया रेल थाना के कुछ कर्मियों को मिल गई। इसके बाद चार सिपाही और दो सिविलियन कोडरमा में ट्रेन में सवार हुए और गया पहुंचने से पहले धनंजय के साथ मारपीट कर उससे सोना लूट लिया।

    घटना की भनक जब रेल पुलिस के वरीय अधिकारियों को लगी तो 29 नवंबर को गया रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई। मामला गंभीर और विभाग की छवि से जुड़ा होने के कारण रेल पुलिस पटना ने एसआईटी का गठन कर जांच कराई।

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    जांच में थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह समेत चारों सिपाही और दो सिविलियन की संलिप्तता पाई गई। इसके बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए रेल थानाध्यक्ष और चारों सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया।

    थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि अन्य आरोपित फरार चल रहे हैं। अब रेल न्यायालय से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद माना जा रहा है कि जल्द ही इस कांड में और भी बड़ी कार्रवाई देखने को मिलेगी।