पितरों के मोक्ष के महापर्व की तारीख तय, गयाजी में तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार
गया जिला प्रशासन ने 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले पितृपक्ष मेला की व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। श्रद्धालुओं के लिए आवास, स्वच्छ ...और पढ़ें

पितृपक्ष मेला की व्यापक तैयारियां शुरू(फाइल फोटो)
HighLights
पितृपक्ष मेला 2026 के लिए गया में तैयारियां शुरू।
श्रद्धालुओं के लिए आवास, स्वच्छता, स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान।
सुरक्षा, यातायात और अन्य सुविधाओं हेतु 21 कोषांग गठित।
जागरण संवाददाता, गयाजी। पितृपक्ष मेला 2026 के सफल, स्वच्छ और श्रद्धालु-अनुकूल आयोजन को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। आगामी 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले इस धार्मिक आयोजन के सफल संचालन के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मेला प्रबंधन के लिए 21 कोषांगों का गठन किया गया है। इस संबंध में बुधवार को जिला परिषद सभागार में जिला पदाधिकारी Shashank Shubhankar की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
पिछले वर्ष की व्यवस्थाओं को मिली थी सराहना
बैठक में डीएम ने कहा कि पिछले वर्ष पंडा-पुरोहितों, समाजसेवियों और प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोग से पितृपक्ष मेला सफलतापूर्वक संपन्न हुआ था।
गयाजी डैम में प्रवाहित पूजन सामग्री की नाव के माध्यम से सफाई और लेजर शो के जरिए पिंडदान के महत्व के प्रचार को श्रद्धालुओं ने सराहा था।
राज्य सरकार की ओर से की गई व्यवस्थाओं की भी व्यापक प्रशंसा हुई थी। प्रशासन ने इस बार भी बेहतर आयोजन के लिए लोगों से सुझाव मांगे हैं।
आवासीय सुविधाओं को लेकर विशेष तैयारी
जिला प्रशासन ने आवासन कोषांग को निर्देश दिया है कि होटल, धर्मशाला, गेस्ट हाउस, विद्यालय, महाविद्यालय और अन्य चिन्हित भवनों में श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
जरूरत पड़ने पर टेंट सिटी भी विकसित की जाएगी। बिस्तर, पेयजल, शौचालय, प्रकाश, पंखे और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी तथा सभी आवास स्थलों का ऑनलाइन पंजीकरण और विवरण उपलब्ध कराया जाएगा।
स्वच्छता और पेयजल व्यवस्था पर रहेगा फोकस
मेला क्षेत्र के प्रमुख मार्गों, घाटों, वेदियों और सार्वजनिक स्थलों की नियमित सफाई के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। खुले नालों और मैनहोल की मरम्मत के साथ कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
श्रद्धालुओं को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक 200 से 500 मीटर पर पेयजल की व्यवस्था होगी। पुराने चापाकलों की मरम्मत, पानी के टैंकर और अस्थायी शौचालयों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
सड़क, बिजली और रोशनी की व्यवस्था होगी मजबूत
मेला क्षेत्र की सभी प्रमुख और संपर्क सड़कों, गलियों और ड्रेनेज व्यवस्था की मरम्मत प्राथमिकता के आधार पर कराई जाएगी।
क्षतिग्रस्त सड़कों और नालियों को दुरुस्त कर श्रद्धालुओं के आवागमन को सुरक्षित बनाया जाएगा। इसके साथ ही पूरे मेला क्षेत्र में पर्याप्त प्रकाश और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी।
24 घंटे सक्रिय रहेंगी स्वास्थ्य सेवाएं
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए Vishnupad Temple, प्रमुख घाटों और आवास स्थलों पर स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। पर्याप्त संख्या में चिकित्सक, पैरामेडिकल कर्मी, एम्बुलेंस, ऑक्सीजन और जीवनरक्षक दवाएं उपलब्ध रहेंगी।
सरकारी अस्पतालों के साथ निजी अस्पतालों में भी जरूरत के अनुसार बेड आरक्षित रखने की व्यवस्था की जाएगी। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और संक्रामक रोगों की रोकथाम पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी।
यातायात और सुरक्षा व्यवस्था होगी हाईटेक
मेला अवधि में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक ट्रैफिक प्लान लागू किया जाएगा। पार्किंग स्थलों का निर्धारण, पुलिस सहायता केंद्र और रेलवे स्टेशन व बस स्टैंड से प्रमुख धार्मिक स्थलों तक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त संख्या में दंडाधिकारी और पुलिस बल की तैनाती होगी। पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी कैमरों के जरिए की जाएगी और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात रहेंगे।
खोया-पाया केंद्र और हेल्प डेस्क देंगे सहायता
श्रद्धालुओं की मदद के लिए 24 घंटे नियंत्रण कक्ष और कॉल सेंटर संचालित किया जाएगा। प्रमुख स्थानों पर सूचना केंद्र और हेल्प डेस्क स्थापित किए जाएंगे।
खोया-पाया केंद्रों के माध्यम से बिछड़े श्रद्धालुओं को उनके परिजनों से मिलाने की व्यवस्था की जाएगी। इस कार्य में स्वयंसेवी संस्थाओं और एनसीसी के स्वयंसेवकों का भी सहयोग लिया जाएगा।