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    RTE की खुली पोल: गया में 1439 गरीब बच्चों का निजी स्कूलों में दाखिला अटका, मान्यता रद करने की चेतावनी

    Updated: Sat, 23 May 2026 10:27 AM (GMT+05:30)

    शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत गया में 1439 गरीब बच्चों का निजी स्कूलों में दाखिला अटका हुआ है, जिससे अभिभावकों में नाराजगी है। ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक तस्वीर (AI Generated)

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    विश्वनाथ प्रसाद, गयाजी। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों को निजी विद्यालयों में निशुल्क शिक्षा देने की व्यवस्था जिले में दम तोड़ती नजर आ रही है। शिक्षा विभाग की तमाम कवायद और आनलाइन चयन प्रक्रिया के बावजूद बड़ी संख्या में निजी विद्यालय चयनित बच्चों का नामांकन लेने से बच रहे हैं।

    स्थिति यह है कि ज्ञानदीप पोर्टल के माध्यम से चयनित 1439 बच्चों का अब तक निजी स्कूलों में दाखिला नहीं हो सका है। इसे लेकर शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। विभाग से मिली जानकारी जिले के 648 निजी विद्यालयों में आरटीई के तहत गरीब परिवारों के बच्चों के निशुल्क नामांकन के लिए 5794 छात्र-छात्राओं का चयन लाटरी प्रणाली से किया गया था।

    चयन प्रक्रिया पूरी तरह आनलाइन और पारदर्शी तरीके से कराई गई थी, ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। लेकिन चयन के बाद निजी विद्यालयों की उदासीनता ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अब तक केवल 3839 बच्चों का ही नामांकन निजी विद्यालयों द्वारा लिया गया है। वहीं 516 आवेदन अब भी पेंडिंग की स्थिति में पड़े हुए हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि 1439 बच्चों को अब तक स्कूलों में प्रवेश ही नहीं मिल पाया है। इससे गरीब अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। कई अभिभावक रोज स्कूलों और शिक्षा विभाग के कार्यालयों का चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

    अभिभावकों का आरोप है कि कई निजी विद्यालय जानबूझकर नामांकन प्रक्रिया में टालमटोल कर रहे हैं। कहीं सीट नहीं होने का बहाना बनाया जा रहा है तो कहीं दस्तावेजों में कमी बताकर बच्चों को वापस लौटा दिया जा रहा है। जबकि विभाग की ओर से स्पष्ट निर्देश है कि पोर्टल पर चयनित बच्चों का नामांकन अनिवार्य रूप से लिया जाए।

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    जिन निजी विद्यालयों द्वारा आरटीई के तहत चयनित विद्यार्थियों का नामांकन नहीं लिया जा रहा है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ज्ञानदीप पोर्टल के माध्यम से चयनित विद्यार्थियों का नामांकन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। 24 घंटे के अंदर नामांकन नहीं लेने वाले विद्यालयों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कार्रवाई शुरू की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर ई-संबंधन की मान्यता भी रद की जा सकती है।

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    गौरव राज, डीपीओ , बिहार शिक्षा परियोजना सह समग्र शिक्षा