2013 के आतंकी हमले के बाद बदला महाबोधि मंदिर का सुरक्षा घेरा, 3 लेयर चेकिंग और 70 CCTV कैमरों से हो रही निगरानी
2013 के आतंकी हमले के बाद महाबोधि मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए गए हैं, जिसमें अब तीन-स्तरीय जांच और 70 सीसीटीवी कैमरे शामिल हैं। ...और पढ़ें

महाबोधि मंदिर का सुरक्षा घेरा
HighLights
2013 आतंकी हमले के बाद सुरक्षा में व्यापक बदलाव।
तीन-स्तरीय जांच, मोबाइल प्रतिबंध, 70 सीसीटीवी कैमरे।
मंदिर अब आधुनिक सुरक्षा और आस्था का प्रतीक।
संतोष कुमार, बोधगया। भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली और यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित महाबोधि मंदिर का स्वरूप पिछले एक दशक में काफी बदल चुका है। कभी शांत और सहज प्रवेश वाले इस विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थल पर आज सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं।
देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन व पुलिस विभाग ने महाबोधि मंदिर को अभेद सुरक्षा घेरे में बदल दिया है।
एक के बाद एक 10 बम विस्फोट
इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह 7 जुलाई 2013 का वह काला दिन है, जब सुबह करीब 5:30 से 6:00 बजे के बीच महाबोधि मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में एक के बाद एक 10 बम विस्फोट हुए थे।
इनमें मंदिर परिसर में पांच और आसपास के इलाकों, जैसे तेरगर मठ व 80 फुट बुद्ध प्रतिमा के पास अन्य धमाके किए गए थे। इस हमले में दो बौद्ध भिक्षु घायल हुए थे, हालांकि मुख्य मंदिर और पवित्र बोधिवृक्ष सुरक्षित रही।
मंदिर परिसर में चार जिंदा बम बरामद
इसके बाद 19 जनवरी 2018 को तिब्बत के धर्मगुरु दलाई लामा के प्रवचन के दौरान भी महाबोधि मंदिर परिसर में चार जिंदा बम बरामद किए गए थे। जिसमें गेट संख्या 4 से एक बम बरामद हुआ था। उसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते सभी विस्फोटकों को निरंजना नदी में डिफ्यूज कर एक बड़े हादसे को टाल दिया।
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बाद में इस मामले में विशेष एनआईए अदालत ने आठ दोषियों को सजा सुनाई। इन घटनाओं के बाद महाबोधि मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदल गई।
मंदिर में मोबाइल ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित
वर्तमान में मंदिर की सुरक्षा बी.सैफ के जिम्मे है और करीब 650 बी सैफ, 35 जिला पुलिस, 5 पदाधिकारी तैनात है। इसमें महिला एवं पुरुष पुलिसकर्मी अलग-अलग शिफ्ट में तैनात रहते हैं। मंदिर के मुख्य द्वार के आसपास नो हॉर्न जोन और नो पार्किंग जोन लागू है।
वहीं श्रद्धालुओं के लिए मंदिर में मोबाइल ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। पर्यटकों को गर्भगृह तक पहुंचने से पहले तीन स्तर की सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ता है। इसमें मेटल हैंड डिटेक्टर, डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर, बॉडी स्कैनिंग और सामान की एक्स-रे स्कैनिंग जैसी आधुनिक सुरक्षा व्यवस्थाएं शामिल हैं।

आज महाबोधि मंदिर केवल आस्था और शांति का प्रतीक ही नहीं, बल्कि आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था का भी उदाहरण बन चुका है। 2013 की दर्दनाक घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की तस्वीर बदल दी और अब विश्वभर से आने वाले श्रद्धालु कड़ी निगरानी के बीच भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली में दर्शन कर सुरक्षित वातावरण का अनुभव करते हैं।
पिछले तीन वर्षों में महाबोधि मंदिर में भी हुई विकास
पिछले तीन वर्षों में विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर परिसर में कई महत्वपूर्ण विकास कार्य किए गए हैं। मंदिर के गुंबद पर लगे स्वर्ण आवरण की सफाई कराई गई, वहीं परिसर के सभी स्तूपों का जीर्णोद्धार किया गया। बोधि वृक्ष की वैज्ञानिक देखभाल के लिए एफआरआई की टीम के साथ बीटीएमसी ने 10 वर्षों का एमओयू समझौता किया है।
इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए सीसीटीवी कैमरों की संख्या 20 से बढ़ाकर लगभग 70 कर दी गई। साथ ही सोलर सिस्टम के माध्यम से बिजली आपूर्ति शुरू होने से ऊर्जा की बचत हो रही है। हाइड्रो क्लीनिंग के जरिए मंदिर की विशेष सफाई कराई गई, जिससे इसकी भव्यता और आकर्षण पहले से अधिक बढ़ गया है।