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    46 सालों से मोहनपुर-बाराचट्टी सड़क का नहीं हुआ चौड़ीकरण, भारी वाहनों के कारण हो चुकी जर्जर

    Updated: Mon, 16 Mar 2026 05:41 PM (GMT+05:30)

    गया जिले की मोहनपुर-बाराचट्टी मुख्य सड़क का चौड़ीकरण वर्षों से लंबित है, जिससे लाखों लोगों को आवागमन में भारी परेशानी हो रही है। 1980 में बनी यह 9 फीट ...और पढ़ें

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    संवाद सूत्र, मोहनपुर (गया)। गया जिले के मोहनपुर से बाराचट्टी को जोड़ने वाली लगभग 13 किलोमीटर लंबी मुख्य सड़क आज भी चौड़ीकरण के इंतजार में है। यह सड़क गया जिला मुख्यालय को राज्य मुख्यालय पटना से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्गों में से एक मानी जाती है।

    लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी इसका विस्तार नहीं हो सका है। स्थानीय लोगों ने कई बार विधायक और सांसद के समक्ष सड़क चौड़ीकरण की मांग उठाई है, बावजूद इसके अब तक कोई ठोस पहल धरातल पर नजर नहीं आई है।

    चार लाख की आबादी मार्ग पर निर्भर

    मोहनपुर प्रखंड के लिए यह सड़क बेहद महत्वपूर्ण है। प्रखंड की 18 पंचायतों के करीब चार लाख से अधिक की आबादी इसी मार्ग पर निर्भर है। लगभग 231 गांवों के लोग प्रतिदिन इसी सड़क से आवागमन करते हैं। मोहनपुर से गया के लिए कई बसें नियमित रूप से इसी मार्ग से चलती हैं। इसके अलावा मोहनपुर से झारखंड के लिए भी बस सेवा संचालित होती है, जिससे इस सड़क पर वाहनों का दबाव लगातार बना रहता है।

    भारी वाहनों को सड़क से नीचे उतारना खतरनाक

    स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब तीन नदी घाटों से बालू ढोने वाले भारी वाहन भी इसी मार्ग से गुजरते हैं। यहां से 16 चक्का और 18 चक्का ट्रकों से बालू का परिवहन किया जाता है, जिन पर 40 टन से लेकर 55 टन तक बालू लोड रहता है। जबकि सड़क की चौड़ाई महज करीब 9 फीट ही है। ऐसे में जब दोनों ओर से वाहन आते हैं तो साइड देने में काफी परेशानी होती है। भारी वाहन को सड़क से नीचे उतारना भी खतरे से खाली नहीं होता है।

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    सड़क की संकरी स्थिति के कारण गर्मी हो या बरसात, हर मौसम में लोगों को आवागमन में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। खासकर मोटरसाइकिल चालकों और छोटे वाहनों के लिए यह मार्ग काफी जोखिम भरा बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को यहां से राजस्व तो मिल रहा है, लेकिन सड़क के चौड़ीकरण की दिशा में अब तक ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

    1980 के बाद से नहीं हुआ सड़क का चौड़ीकरण

    स्थानीय लोगों के अनुसार, इस सड़क का निर्माण वर्ष 1980 में हुआ था। इसके बाद कई बार मरम्मत का कार्य तो कराया गया, लेकिन चौड़ीकरण नहीं हो सका। वर्तमान में सड़क की स्थिति ऐसी हो गई है कि कहीं-कहीं केवल नाम मात्र की सड़क बची है।

    लोगों ने बताया कि जब सांसद जीतन राम मांझी पहली बार सांसद बनने के बाद मोहनपुर प्रखंड के बांदेगढा गांव पहुंचे थे, तब स्थानीय लोगों ने उनसे इस सड़क के चौड़ीकरण की मांग की थी। उस समय उन्होंने तीन महीने के अंदर चौड़ीकरण कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन दो वर्ष बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई काम शुरू नहीं हो पाया है। इससे लोगों में निराशा बढ़ती जा रही है।

    जरूरत से भारी ट्रकों का हो रहा परिचालन 

    इधर पथ निर्माण विभाग के एक अधिकारी से जब पूछा गया कि इस सड़क पर कितने वजन के वाहन चलने की क्षमता है, तो उन्होंने बताया कि यह सड़क अधिकतम 10 टन तक के वाहनों के लिए उपयुक्त है। इसके बावजूद भारी ट्रकों का परिचालन लगातार जारी है।

    वहीं स्थानीय विधायक ज्योति देवी ने बताया कि सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रस्ताव पथ निर्माण विभाग को भेजा जा चुका है। विभाग की ओर से एनओसी भी दे दी गई है और जल्द ही सड़क चौड़ीकरण का कार्य शुरू होने की उम्मीद है।

    एनएच में परिवर्तित करने की चल रही प्रक्रिया

    इधर सांसद जीतन राम मांझी ने भी कुछ दिन पहले कहा था कि इस सड़क के चौड़ीकरण को लेकर पथ निर्माण विभाग और केंद्र सरकार को विभागीय पत्र लिखा गया है। उन्होंने कहा कि मोहनपुर से फतेहपुर होते हुए इस सड़क को एनएच में परिवर्तित करने की भी प्रक्रिया चल रही है।

    अब देखने वाली बात यह होगी कि वर्षों से चौड़ीकरण का इंतजार कर रही इस सड़क पर काम कब शुरू होता है। फिलहाल क्षेत्र के लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही इस सड़क का विस्तार होगा और उन्हें सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।