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    नीतीश कुमार के 20 साल पुराने साथी ने दिया जदयू से इस्तीफा, पार्टी में मठाधीशों की राजनीति से नाराज

    Updated: Wed, 07 Jan 2026 07:11 PM (IST)

    जनता दल यूनाइटेड को गया में बड़ा झटका लगा है। पार्टी के प्रदेश सचिव डॉ. चंदन यादव ने 20-22 साल बाद पद और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने ...और पढ़ें

    नीतीश कुमार के 20 साल पुराने साथी ने दिया जदयू से इस्तीफा

    नीतीश कुमार के 20 साल पुराने साथी ने दिया जदयू से इस्तीफा

    HighLights

    1. डॉ. चंदन यादव ने जदयू के प्रदेश सचिव पद से इस्तीफा दिया।

    2. उन्होंने पार्टी में 'मठाधीशों की राजनीति' पर नाराजगी जताई।

    3. गया जिले में जदयू के लिए इसे बड़ा झटका माना जा रहा है।

    जागरण संवाददाता, गयाजी। जनता दल यूनाइटेड को गया जिले में उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के प्रदेश सचिव एवं 20-22 वर्षों से समर्पित कार्यकर्ता रहे डॉ. चंदन यादव ने पद एवं पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की। बुधवार को चंदौती स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने अपने इस्तीफे का पत्र सार्वजनिक किया।

    डॉ. चंदन यादव ने प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा को संबोधित इस्तीफे में संगठन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पार्टी में कुछ वरीय नेता संगठन और सरकार में अपने लोगों को स्थापित कर रहे हैं, जबकि वर्षों से संघर्षरत और नीतीशवादी विचारधारा से जुड़े कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा हो रही है। 

    कुछ लोग का संगठन और सत्ता पर कब्जा

    उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यालय में बैठे कुछ लोग संगठन और सत्ता पर कब्जा जमाए हुए हैं, जिनकी परिक्रमा किए बिना न संगठनात्मक जिम्मेदारी मिलती है और न ही नेतृत्व तक पहुंच संभव है।

    gaya jdu

    उन्होंने कहा कि छात्र जीवन से अब तक उन्होंने बिना किसी भय और लोभ के पार्टी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए कार्य किया। ऐसे समय में, जब गयाजी जिले में पार्टी के लिए काम करना जोखिम भरा था, तब भी उन्होंने जानमाल की परवाह किए बिना संगठन को मजबूत किया। 

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    पार्टी में उनकी कोई उपयोगिता नहीं 

    बावजूद इसके आज उन्हें और उनके जैसे लाखों पुराने कार्यकर्ताओं को यह महसूस कराया जा रहा है कि पार्टी में उनकी कोई उपयोगिता नहीं रही। डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि उनका त्याग किसी असंतोष से नहीं, बल्कि पार्टी और नेता के हाथ मजबूत करने की भावना से है। 

    उन्होंने कहा कि वे मठाधीशों की राजनीति और परिक्रमा की संस्कृति का हिस्सा नहीं बन सकते। इसी पीड़ा के साथ उन्होंने इस्तीफा स्वीकार करने का अनुरोध किया। प्रेसवार्ता के दौरान कई अन्य कार्यकर्ताओं के भी इस्तीफा देने की चर्चा रही। राजनीतिक हलकों में इसे जदयू के लिए संगठनात्मक दृष्टि से बड़ा झटका माना जा रहा है।