नीतीश ने दिखाया सपना, लालू ने किया शिलान्यास; शेरघाटी में क्यों अटकी 550 करोड़ की रेल योजना?
शेरघाटी के लोगों को 25 वर्षों से रेल सेवा का इंतजार है। नीतीश कुमार ने सपना दिखाया, लालू ने शिलान्यास किया, फिर भी रेल नहीं चली। ...और पढ़ें

25 वर्षों बाद भी शेरघाटी के लोगों को रेल का इंतजार। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
25 वर्षों से रेल सेवा का इंतजार
नीतीश ने दिखाया सपना, लालू ने किया शिलान्यास
550 करोड़ की योजना अब तक अधूरी
संवाद सहयोगी, शेरघाटी (गया)। अनुमंडल के लोगों को पिछले 25 वर्षों से रेल सेवा का इंतजार है। वर्ष 1998 में तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार ने इमामगंज की एक सभा में क्षेत्रवासियों को रेलवे लाइन निर्माण का सपना दिखाया था।
अब तक यह सपना साकार नहीं हो सका। इस दौरान कई सरकारें आईं, पर परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी, जिससे लोगों में निराशा और बेचैनी बनी हुई है।
रेलवे लाइन को विकास का प्रमुख पैमाना माना जाता है। आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के बाद भी इस क्षेत्र में रेल सुविधा का अभाव है।
देश जहां अमृत महोत्सव मना रहा है, वहीं शेरघाटी अनुमंडल के लोग अब भी रेल की बाट जोह रहे हैं। स्थानीय लोगों ने ‘इमामगंज रेलवे लाइन संघर्ष समिति’ के बैनर तले कई बार सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया है।
समिति के अध्यक्ष विगन पासवान के अनुसार, इस मुद्दे पर कई बार पत्राचार और शिष्टमंडल के माध्यम से पहल की गई, लेकिन ठोस परिणाम नहीं निकला।
झारखंड में शुरू हुआ था भूमि अधिग्रहण
करीब 97 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत बोधगया सहित अनुमंडल के दो हिस्सों में स्टेशन प्रस्तावित थे।
वर्ष 2016 में तत्कालीन रेल राज्य मंत्री ने संसद में बताया था कि गया-चतरा रेल लाइन सहित 28 परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। बावजूद इसके, अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।
जगी थी विकास की उम्मीदें
नक्सल प्रभावित रहे इस क्षेत्र में रेलवे लाइन को विकास की बड़ी उम्मीद के रूप में देखा गया था। वर्ष 2008 में परियोजना के लिए सर्वे कार्य भी शुरू हुआ था।
बांकेबाजार, बिहारगांई, चांदपुर, गुरिया और इमामगंज सहित कई स्थानों पर लगाए गए सर्वे के पत्थर आज भी इस अधूरे सपने की गवाही दे रहे हैं।
लालू प्रसाद ने किया था शिलान्यास
वर्ष 2009 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने शेरघाटी के रंगलाल उच्च विद्यालय मैदान में इस परियोजना का शिलान्यास किया था।
उस समय 550 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे लाइन निर्माण को मंजूरी दी गई थी। हालांकि, 15 साल बीतने के बाद भी परियोजना का 10 प्रतिशत कार्य भी पूरा नहीं हो सका है।
बताया जाता है कि गया-डाल्टनगंज रेल लाइन (शेरघाटी, बांकेबाजार, इमामगंज होते हुए) और गुरारू-शेरघाटी-डोभी-चतरा रेल मार्ग जैसी योजनाएं भी प्रस्तावित थीं ।
लेकिन ये सभी योजनाएं अब ठंडे बस्ते में पड़ी हैं। शिलान्यास स्थल पर लगे पत्थरों के अक्षर भी अब धुंधले पड़ चुके हैं, जो अधूरी उम्मीदों की कहानी बयां कर रहे हैं।
यदि यह परियोजना पूरी होती, तो गया और चतरा के नक्सल प्रभावित इलाकों में आवागमन आसान होता, साथ ही खनिज और कृषि उत्पादों के परिवहन को भी बड़ा लाभ मिलता।
आज भी क्षेत्रवासी उसी सवाल के साथ इंतजार कर रहे हैं—आखिर शेरघाटी में रेल कब चलेगी?