गया के शेरघाटी में गहराया जल संकट: नल जल योजना विफल, ग्रामीण कुएं के पानी पर निर्भर
शेरघाटी अनुमंडल में गर्मी की शुरुआत के साथ ही गहराया जल संकट। भू-जलस्तर गिरने से कुएं, तालाब सूख रहे हैं, और चापाकल जवाब दे रहे हैं। चिलिम टोला पत्थलक ...और पढ़ें
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समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सहयोगी, शेरघाटी (गया)। गर्मी की शुरुआत होते ही अनुमंडल क्षेत्र में जल संकट गहराने लगा है। भू-जलस्तर नीचे खिसकने से कुएं, तालाब, नदी, पोखर सूखने लगे हैं तो चापाकल और सबमर्सिबल भी जवाब देने लगे हैं। इसकी एक बानगी शेरघाटी प्रखंड के ग्राम चिलिम टोला पत्थलकट्टी के वार्ड नंबर 5 में देखने को मिली।
सोमवार को जागरण पड़ताल में पता चला कि मार्च में ही यहां जल संकट ने भयावह रूप ले लिया है। यहां नल जल योजना विफल है। कुछ दिन पहले नल जल योजना का मोटर चालू किया गया है, लेकिन पाइपलाइन की स्थिति इतनी खराब है कि यह सिर्फ तीन से चार घरों तक ही पानी पहुंच रहा है, जो घर टंकी के आसपास स्थित हैं, उन्हीं तक पानी पहुंच पा रहा है।
ग्रामवासी त्रिभुवन मांझी और रामू मांझी का कहना है कि हर साल गर्मी शुरू होते ही जल संकट गहरा जाता है। उनके घर में लगा चापाकल भी अप्रैल आते-आते पानी देना बंद कर देता है। कहते हैं कि इस स्थिति में, गांव के लोग किसी तरह पुराने पक्के कुएं का पानी ही पीने और उपयोग करने के लिए मजबूर हो जाते हैं।
नल जल योजना से नहीं मिल रहा पानी
कुएं से पानी खींच रही पिंकी कुमारी ने बताया कि यहां के सभी लोग इसी कुएं का पानी पीते हैं, क्योंकि नल जल योजना से पानी नहीं मिल रहा है। गांव की महिला देवंती देवी का कहना है कि कुएं का पानी लेने के लिए हमें बहुत मेहनत करनी पड़ती है। जब मोटर चालू कर दी जाती है, तो अगले दिन पानी जमा होने के बाद सबको पानी मिल पाता है।
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इस पर गुस्साई हुई महिलाएं कहती हैं कि हर साल सरकारी अधिकारी आते हैं, फोटो खींचते हैं और जाते हैं, लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं होता। मंजू देवी बताती हैं कि हम गरीबों की कोई सुनवाई नहीं है। बरसात में घर गिरने पर भी सिर्फ काले प्लास्टिक और 5 किलो चावल ही दिया गया था। बाकी सब खत्म हो गया, फिर कोई पूछने नहीं आता। नल जल योजना की स्थिति वार्ड 4 और 5 दोनों में एक जैसी है।
पूर्व वार्ड सदस्य रघुनंदन यादव का कहना है कि उनके घर के पास लगाए गए नल जल योजना के मोटर पिछले तीन महीने से बंद हैं। पीएचईडी के लोग मोटर लेकर गए थे, लेकिन अब तक उसे लगाया नहीं गया। वर्तमान वार्ड सदस्य महेंद्र मांझी भी कहते हैं कि हम पीएचईडी से कहते-कहते थक गए हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जिला द्वारा एक सर्वे के मुताबिक 144 योजना बंद बताई गई है, जबकि विभागीय सर्वे में मात्र 27 बंद है। चालू योजना तीन समय में नियमित रूप से जल आपूर्ति करती है। खराब योजना की वास्तविक जानकारी देना मुश्किल है। क्योंकि अब बोरिंग फेल होने आदि के कारण किसी भी समय आंकड़े में परिवर्तन होते रहते हैं।
धर्मेंद्र कुमार आनंद, कार्यपालक अभियंता, लोक स्वास्थ्य प्रमंडल शेरघाटी।
शेरघाटी में पीआरडी की 1456 और पीएचईडी की 600 योजनाएं
| प्रखंड का नाम | पीआरडी | पीएचईडी |
|---|---|---|
| मोहनपुर | 184 | 99 |
| इमामगंज | 172 | 67 |
| शेरघाटी | 172 | 07 |
| डोभी | 167 | 16 |
| गुरुआ | 132 | 42 |
| बांकेबाजार | 124 | 37 |
| बाराचट्टी | 110 | 41 |
| डुमरिया | 106 | 41 |
| आमस | 68 | 47 |
| कुल | 1,456 | 600 |