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    मछली पालन से आगे बढ़कर झींगा से कमाई का मौका, 1.10 लाख की यूनिट पर बिहार सरकार देगी 60% अनुदान

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 05:25 PM (IST)

    बिहार सरकार मत्स्य प्रजाति विविधिकरण योजना के तहत झींगा पालन को बढ़ावा दे रही है, जिसमें किसानों को 60% तक अनुदान मिलेगा। गया जिले में झींगा, कैटफिश औ ...और पढ़ें

    झींगा मछली

    झींगा मछली

    HighLights

    1. झींगा पालन पर बिहार सरकार दे रही 60% अनुदान।

    2. गया में झींगा, कैटफिश, मोती पालन के लक्ष्य निर्धारित।

    3. किसानों के लिए कमाई के नए विकल्प उपलब्ध हैं।

    जागरण संवाददाता, गया। खेती-किसानी के साथ कमाई के नए विकल्प तलाश रहे किसानों और युवाओं के लिए झींगा पालन कारोबार का विकल्प बन सकता है। बिहार सरकार मत्स्य प्रजाति विविधिकरण योजना के तहत झींगा पालन को बढ़ावा दे रही है।

    इसके लिए पात्र लाभार्थियों को इकाई लागत पर 60 प्रतिशत तक अनुदान देने का प्रविधान है। गया जिले में भी इस योजना के तहत झींगा पालन की एक यूनिट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    जिला मत्स्य विभाग के अनुसार, करीब आधा एकड़ क्षेत्र में झींगा पालन की यूनिट स्थापित की जा सकती है।

    इसकी अनुमानित इकाई लागत करीब 1.10 लाख रुपये है। ऐसे में सरकारी अनुदान मिलने से लाभार्थी पर शुरुआती आर्थिक बोझ काफी कम हो सकता है।

    आधा एकड़ में शुरू हो सकता है झींगा पालन

    झींगा पालन वैज्ञानिक तरीके से किया जाने वाला मत्स्य पालन है, जिसमें मीठे पानी की झींगा प्रजातियों को तालाबों में पाला जाता है। बिहार की जलवायु और उपलब्ध जल संसाधनों को इसके लिए अनुकूल माना जाता है।

    विभाग के अनुसार, पानी की गुणवत्ता, संतुलित आहार और वैज्ञानिक प्रबंधन पर ध्यान देकर झींगा पालन में बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सकता है।

    बिहार में बड़ी संख्या में तालाब, जलाशय और आहर-पईन मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल मत्स्य पालन के लिए किया जा सकता है।

    बाजार में मांग के कारण बढ़ रही संभावना

    झींगा की बाजार में मांग सामान्य मछलियों की तुलना में अधिक बताई जाती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बाजार में झींगा का न्यूनतम भाव करीब 500 रुपये प्रति किलो तक बताया जा रहा है।

    इसी वजह से मत्स्य पालन से जुड़े लोगों के लिए यह अतिरिक्त आमदनी का विकल्प बन सकता है।

    झींगा को प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है। इसमें आयोडीन समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। हालांकि, वास्तविक कमाई उत्पादन, बाजार भाव, लागत और प्रबंधन पर निर्भर करेगी।

    1.10 लाख की यूनिट पर 60 प्रतिशत सब्सिडी

    गया जिला मत्स्य विस्तार पदाधिकारी नागेन्द्र कुमार के अनुसार, झींगा पालन के लिए करीब 0.5 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी। एक यूनिट स्थापित करने की अनुमानित लागत 1.10 लाख रुपये है।

    इस लागत पर सरकार की ओर से 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। गया जिले में इस वर्ष झींगा पालन के लिए एक यूनिट का लक्ष्य मिला है। इच्छुक पात्र किसान योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं।

    कैटफिश पालन पर भी मिल रहा सरकारी सहयोग

    झींगा पालन के अलावा सरकार कैटफिश पालन को भी बढ़ावा दे रही है। इसमें किसान सिंघी जैसी मछली का उत्पादन कर सकते हैं। गया जिले में कैटफिश पालन के लिए भी एक यूनिट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    खबरें और भी

    कैटफिश पालन की एक यूनिट की अनुमानित लागत करीब 1.35 लाख रुपये बताई गई है। इसके जरिए पारंपरिक मछली पालन के साथ मत्स्य प्रजातियों में विविधता लाने का प्रयास किया जा रहा है।

    मोती पालन के लिए 2 यूनिट का लक्ष्य

    गया जिले में मोती पालन को लेकर भी विभाग की ओर से योजना शामिल की गई है। इसके लिए इस वर्ष दो यूनिट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    आधा एकड़ के तालाब में मोती पालन की अनुमानित इकाई लागत 2.24 लाख रुपये बताई गई है।

    इस तरह झींगा, कैटफिश और मोती पालन के जरिए किसानों के सामने मत्स्य क्षेत्र में अलग-अलग कारोबार शुरू करने के विकल्प उपलब्ध हैं। सरकारी योजनाओं के माध्यम से इन गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

    यहां कर सकते हैं योजना के लिए आवेदन

    झींगा, कैटफिश या मोती पालन में रुचि रखने वाले इच्छुक किसान बिहार मत्स्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट fisheries.bihar.gov.in के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

    आवेदन से पहले संबंधित योजना की पात्रता, अनुदान की शर्तें, आवश्यक दस्तावेज और वर्तमान दिशा-निर्देश जरूर जांच लें। विभागीय स्वीकृति और योजना के नियमों के अनुसार ही अनुदान का लाभ दिया जाएगा।