पढ़ाई दिल्ली में, दिल गांव के लिए... पॉकेट मनी से लिख दी बिहार के अनिमेष ने हरियाली की नई कहानी
गोपालगंज के अनिमेष आनंद ने अपनी पॉकेट मनी बचाकर माड़ीपुर गांव में 500 से अधिक पौधे लगाए हैं, जिससे गांव में हरियाली बढ़ रही है। दिल्ली में पढ़ाई के बा ...और पढ़ें

पौधा लगाते अनिमेष
HighLights
अनिमेष आनंद ने पॉकेट मनी से 500 पौधे लगाए।
दिल्ली में पढ़ाई के बावजूद गांव में पौधारोपण।
युवाओं की टीम भी अभियान में शामिल हुई।
विवेक कुमार तिवारी, फुलवरिया (गोपालगंज)। बढ़ते तापमान, घटती हरियाली और पर्यावरण संकट के बीच गोपालगंज के फुलवरिया प्रखंड के माड़ीपुर गांव के युवा अनिमेष आनंद ने एक ऐसी पहल शुरू की है, जो आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है। अपनी पॉकेट मनी की बचत से उन्होंने अब तक करीब 500 पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल पेश की है।
छात्र जीवन में लिया गया उनका छोटा-सा संकल्प अब एक जन-अभियान का रूप ले चुका है। अनिमेष का मानना है कि पर्यावरण बचाने के लिए बड़े संसाधनों से ज्यादा जरूरी मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास है।

दिल्ली में पढ़ाई, छुट्टियों में गांव आकर करते हैं पौधारोपण
अनिमेष आनंद ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली में रहकर फ्रेंच विषय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है। उनके पिता आमोद सिंह रेलवे में अधिकारी हैं।
पढ़ाई के दौरान जब भी उन्हें छुट्टियां मिलती हैं, वह अपने गांव लौट आते हैं और पौधारोपण अभियान में जुट जाते हैं। वे गांव के लोगों को भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का काम करते हैं।

पॉकेट मनी से खरीदते हैं पौधे
इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि अनिमेष किसी सरकारी सहायता या संस्था पर निर्भर नहीं हैं। वह अपनी पॉकेट मनी की बचत से ही पौधे खरीदते हैं और उन्हें लगाते हैं।
उन्होंने आम, जामुन, कटहल और लीची जैसे फलदार पौधों के साथ-साथ नीम, पीपल, बरगद और वटवृक्ष जैसे छायादार पौधे भी लगाए हैं। उनका मानना है कि हर व्यक्ति अपनी आय का थोड़ा हिस्सा पर्यावरण संरक्षण के लिए खर्च कर सकता है।
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केवल पौधे लगाना नहीं, उनकी देखभाल भी जरूरी
अनिमेष का कहना है कि सिर्फ पौधारोपण कर देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पौधों की नियमित देखभाल और सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
इसी वजह से वह लगाए गए पौधों की निगरानी और संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देते हैं। उनका मानना है कि जीवित और सुरक्षित पौधे ही भविष्य में हरियाली का आधार बनेंगे।
गांव की हरियाली से मिली प्रेरणा
अनिमेष बताते हैं कि बचपन में गांव की हरियाली और गर्मियों में पेड़ों की ठंडी छांव ने उन्हें प्रकृति के महत्व का एहसास कराया था। यही अनुभव आगे चलकर उनके अभियान की प्रेरणा बना।
उनका कहना है कि यदि जनसंख्या के अनुपात में पर्याप्त संख्या में पेड़ लगाए जाएं, तो ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ते तापमान जैसी समस्याओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
युवाओं की टीम भी निभा रही जिम्मेदारी
अनिमेष के इस अभियान में अब कई युवा भी उनके साथ जुड़ चुके हैं। राकेश कुमार सिंह उर्फ छोटे, हिमांशु आर्यन समेत अन्य साथी पौधों की सिंचाई, सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
निजी जमीन पर लगाए गए पौधों की देखरेख संबंधित भू-स्वामी करते हैं, जबकि सार्वजनिक स्थानों पर रोपे गए पौधों की जिम्मेदारी उनकी टीम संभालती है।
हरियाली का संदेश दे रहा एक युवा
अनिमेष की यह पहल बताती है कि बदलाव की शुरुआत किसी बड़े मंच या बड़े बजट से नहीं, बल्कि एक छोटे संकल्प और निरंतर प्रयास से भी हो सकती है।
उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो समाज और पर्यावरण के लिए कुछ अलग करना चाहते हैं। एक छात्र की पॉकेट मनी से शुरू हुआ यह अभियान अब गांव में हरियाली की नई पहचान बनता जा रहा है।