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    'काकोरी' ने रचा इतिहास, दूसरी बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता बने गोपालगंज के कमलेश मिश्र

    Updated: Mon, 20 Jul 2026 03:19 PM (GMT+05:30)

    गोपालगंज के कमलेश मिश्र की डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'काकोरी' को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ ऐतिहासिक पुनर्निर्माण फिल्म चुना गया है। ...और पढ़ें

    72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में काकोरी सर्वश्रेष्ठ फिल्म (ऐतिहासिक पुनर्निर्माण ) घोषित

    72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में काकोरी सर्वश्रेष्ठ फिल्म (ऐतिहासिक पुनर्निर्माण ) घोषित

    HighLights

    1. कमलेश मिश्र की 'काकोरी' को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।

    2. यह उनकी दूसरी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री फिल्म है।

    3. फिल्म काकोरी रेल एक्शन के शताब्दी वर्ष को समर्पित है।

    बाल्मीकि मणि तिवारी, गोपालगंज। गोपालगंज जिले की धरती ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी रचनात्मक पहचान दर्ज कराई है। हथुआ प्रखंड के सिंगहा गांव निवासी फिल्म निर्देशक एवं लेखक कमलेश मिश्र की डॉक्यूमेंट्री फिल्म काकोरी का चयन 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ फिल्म (ऐतिहासिक पुनर्निर्माण) श्रेणी के लिए हुआ है।

    भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने शनिवार को पुरस्कारों की घोषणा की। सितंबर में नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति के हाथों यह सम्मान प्रदान किया जाएगा।

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    यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि कमलेश मिश्र की यह दूसरी फिल्म है, जिसे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त हुआ। काकोरी फिल्म के निर्माता जसविंदर सिंह और मिंटी मिश्रा भी पुरस्कार ग्रहण करेंगी।

    राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए देशभर से गैर-फीचर श्रेणी की 164 फिल्मों की प्रविष्टियां आई थीं, जिनमें सात सदस्यीय जूरी ने 16 फिल्मों का चयन किया। इनमें काकोरी को ऐतिहासिक पुनर्निर्माण श्रेणी का सर्वोच्च सम्मान मिला।

    दैनिक जागरण से बातचीत में कमलेश मिश्र ने बताया कि काकोरी का निर्माण काकोरी रेल एक्शन के शताब्दी वर्ष को समर्पित श्रद्धांजलि के रूप में किया गया। दिसंबर 2024 में तैयार हुई इस फिल्म में 1925 के उस ऐतिहासिक घटनाक्रम को तथ्यात्मक और सिनेमाई रूप में पुनर्जीवित किया गया है, जब हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (एचआरए) के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी शासन के सरकारी खजाने को ले जा रही ट्रेन को लखनऊ और काकोरी के बीच रोककर कब्जे में लिया था। इसका उद्देश्य निजी लाभ नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के लिए आर्थिक संसाधन जुटाना था।

    कमलेश मिश्र ने बताया कि फिल्म में किसी प्रकार की ऐतिहासिक त्रुटि न रहे, इसके लिए महीनों तक शोध किया गया। वास्तविक घटनास्थलों शाहजहांपुर और काकोरी में जाकर फुटेज शूट किए गए। शाहजहांपुर इसलिए चुना गया, क्योंकि वहीं रामप्रसाद बिस्मिल, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और रोशन सिंह की गतिविधियां केंद्रित थीं तथा अंग्रेजी खजाना लूटने की रणनीति भी वहीं तैयार हुई थी।

    फिल्म में रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी, रोशन सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे महान क्रांतिकारियों के संघर्ष को प्रमुखता से दिखाया गया है।

    घटना के बाद अंग्रेज सरकार ने रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और रोशन सिंह को फांसी दे दी थी, जबकि चंद्रशेखर आजाद गिरफ्तारी से बच निकले और आगे भी स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व करते रहे।

    कमलेश मिश्र ने कहा कि इतिहास में कई क्रांतिकारियों के योगदान को अपेक्षित स्थान नहीं मिला। यह फिल्म उनके बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है।

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    राष्ट्रीय पुरस्कार से पहले काकोरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल चुकी है पहचान

    फिल्म निर्देशक एवं लेखक कमलेश मिश्र की डॉक्यूमेंट्री फिल्म काकोरी को राष्ट्रीय पुरस्कार से पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल चुकी है। फिल्म का चयन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (आईएफएफआई) के 56वें संस्करण में इंडियन पैनोरमा (नॉन फीचर) की उद्घाटन फिल्म के रूप में हुआ था, जहां इसका प्रदर्शन गोवा में किया गया था। सेंसर प्रमाणन के बाद इसे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिए भेजा गया था।

    दूसरी बार राष्ट्रीय सम्मान

    इससे पहले वर्ष 2018 में कमलेश मिश्र की फिल्म ''मधुबनी : द स्टेशन ऑफ कलर्स'' को 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं।

    काकोरी उनके करियर की दूसरी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म बन गई है। लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस उपलब्धि ने गोपालगंज को देश के फिल्म मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है।

    कलाकारों और तकनीकी टीम ने दिया जीवंत रूप

    फिल्म में रामप्रसाद बिस्मिल की भूमिका पियुष सुहाने, अशफाक उल्ला खान की भूमिका मानवेंद्र त्रिपाठी, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी की भूमिका संतोष ओझा, रोशन सिंह की भूमिका विकास श्रीवास्तव तथा चंद्रशेखर आजाद की भूमिका रजनीश कौशिक ने निभाई है।

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    अंग्रेज जज ए. हैमिल्टन के किरदार में संजय मोदियानी नजर आए हैं। फिल्म के संगीत निर्देशक बाबी भट्टाचार्य, साउंड डिजाइनर शांतनु मुखर्जी और सिनेमैटोग्राफर देव अग्रवाल हैं।

    काकोरी रेल कांड नहीं, अब काकोरी रेल एक्शन

    फिल्म निर्देशक कमलेश मिश्र ने बताया कि जिस ऐतिहासिक घटना को वर्षों तक काकोरी रेल कांड के नाम से पढ़ाया और जाना जाता रहा, उसे वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश सरकार ने आधिकारिक रूप से काकोरी रेल एक्शन नाम दिया।

    उनका कहना है कि यह कोई आपराधिक कांड नहीं था, बल्कि अंग्रेजी शासन के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम के लिए चलाया गया एक सुनियोजित क्रांतिकारी अभियान था।

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