गोपालगंज में 191 स्कूलों के लिए जमीन की तलाश तेज, कहीं भवन का इंतजार तो कहीं भूमि बनी सबसे बड़ी बाधा
गोपालगंज जिले में 191 विद्यालयों (84 प्राथमिक, 107 उच्च माध्यमिक) के भवन निर्माण के लिए जमीन की कमी एक बड़ी बाधा है। शिक्षा विभाग ने अब इन विद्यालयों ...और पढ़ें

जमीन की तलाश तेज
HighLights
गोपालगंज में 191 स्कूलों के पास भवन निर्माण हेतु जमीन नहीं।
शिक्षा विभाग ने भूमि तलाशने की प्रक्रिया तेज की।
प्राथमिक स्कूलों को 10 डिसमिल, उच्च माध्यमिक को 75 डिसमिल जमीन चाहिए।
जागरण संवाददाता, गोपालगंज। जिले में विद्यालयों के भवन निर्माण की राह में जमीन की कमी बड़ी बाधा बन गई है। अब शिक्षा विभाग ने ऐसे विद्यालयों के लिए भूमि उपलब्ध कराने की कवायद तेज कर दी है। जिले में 84 प्राथमिक विद्यालय भूमिहीन चिह्नित किए गए हैं, जबकि 107 उच्च माध्यमिक विद्यालयों के पास भी भवन निर्माण के लिए अपनी जमीन उपलब्ध नहीं है।
इन विद्यालयों के लिए अब संबंधित स्कूल प्रबंधन को अपने स्तर से जमीन तलाशने का निर्देश दिया गया है।
शिक्षा विभाग ने विद्यालयों के पोषक क्षेत्र में सरकारी और निजी जमीन की तलाश करने को कहा है।
इसके लिए पंचायत प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का सहयोग लेने के साथ अंचल स्तर के अधिकारियों से समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया है।
विद्यालय प्रबंधन को दी गई जमीन तलाशने की जिम्मेदारी
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने सभी संबंधित प्रधान शिक्षक, प्रधानाध्यापक और प्रभारी प्रधानाध्यापकों को निर्देश जारी किया है।
उन्हें अपने विद्यालय के पोषक क्षेत्र में उपलब्ध सरकारी भूमि की पहचान करने को कहा गया है। गैरमजरुआ जमीन के साथ इच्छुक लोगों से दान के रूप में निजी भूमि प्राप्त करने का भी प्रयास किया जाएगा।
विभाग का जोर इस बात पर है कि जमीन की उपलब्धता जल्द सुनिश्चित हो, ताकि भवन निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
इसके लिए संबंधित अंचल अधिकारियों और अन्य पदाधिकारियों से भी सहयोग लेने का निर्देश दिया गया है।
प्राथमिक स्कूल के लिए 10 डिसमिल जमीन जरूरी
बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित किए गए कई नवसृजित प्राथमिक विद्यालयों के पास अभी अपनी जमीन और भवन नहीं है।
ऐसे स्कूल फिलहाल आसपास के प्राथमिक या मध्य विद्यालयों से संबद्ध कर संचालित किए जा रहे हैं।
विभागीय मानक के अनुसार नए प्राथमिक विद्यालय के लिए कम से कम 10 डिसमिल जमीन जरूरी है।
जमीन उपलब्ध होने के बाद ही संबंधित विद्यालय के भवन निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
107 उच्च माध्यमिक विद्यालयों के सामने भी जमीन का संकट
जिले में बड़ी संख्या में मध्य विद्यालयों को उत्क्रमित कर उच्च माध्यमिक विद्यालय बनाया गया था। इसका उद्देश्य प्रत्येक पंचायत में विद्यार्थियों को उच्च माध्यमिक स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराना था।
हालांकि, इनमें से कई विद्यालयों के पास आज भी अपना भवन बनाने के लिए जमीन उपलब्ध नहीं है।
विभागीय सूची के अनुसार जिले में ऐसे 107 उच्च माध्यमिक विद्यालय हैं। इन विद्यालयों के लिए 75 डिसमिल भूमि का मानक निर्धारित किया गया है। जमीन उपलब्ध होने के बाद भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
कुचायकोट में सबसे ज्यादा 21 प्राथमिक विद्यालय भूमिहीन
प्राथमिक विद्यालयों की बात करें तो कुचायकोट प्रखंड में सबसे अधिक 21 विद्यालय भवनहीन हैं। बैकुंठपुर में 9, बरौली में 11, भोरे में 5, गोपालगंज में 3 और हथुआ में 5 प्राथमिक विद्यालयों के पास अपनी जमीन या भवन नहीं है।
इसी तरह मांझा में 3, पंचदेवरी में 8, फुलवरिया में 6, थावे में 7, उचकागांव में 1 और विजयीपुर में 3 प्राथमिक विद्यालय भवनहीन चिह्नित किए गए हैं। अब इन विद्यालयों के लिए जमीन तलाशने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
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उच्च माध्यमिक स्कूलों में बैकुंठपुर और हथुआ आगे
उच्च माध्यमिक विद्यालयों की स्थिति देखें तो बैकुंठपुर में 12 विद्यालयों के पास अपना भवन नहीं है। हथुआ में भी 12 विद्यालय जमीन के अभाव में भवन से वंचित हैं, जबकि मांझा में ऐसे विद्यालयों की संख्या 12 है।
गोपालगंज में 11, कुचायकोट में 10 और बरौली में 9 उच्च माध्यमिक विद्यालयों के पास अपना भवन नहीं है। इसके अलावा भोरे में 3, कटेया में 2, पंचदेवरी में 4 और फुलवरिया में 3 विद्यालय शामिल हैं।
इन प्रखंडों में भी स्कूलों को जमीन का इंतजार
थावे प्रखंड में 5, उचकागांव में 6, विजयीपुर में 9 और सिधवलिया में 7 उच्च माध्यमिक विद्यालयों के पास अपना भवन नहीं है। इन विद्यालयों के लिए भी भूमि उपलब्ध कराने की कवायद शुरू कर दी गई है।
शिक्षा विभाग का मानना है कि जमीन की समस्या दूर होने के बाद भवन निर्माण की प्रक्रिया को गति मिलेगी।
इससे वर्तमान में दूसरे विद्यालयों से संबद्ध होकर चल रहे स्कूलों को भी अपना स्थायी परिसर मिल सकेगा।