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    बिहार: 'मिठाई लेकर आ रही हूं...', मां का आखिरी वादा रह गया अधूरा; घर पहुंचने से पहले ही हादसे में मौत

    Updated: Wed, 01 Jul 2026 04:38 PM (IST)

    कुचायकोट में सड़क हादसे में मां रंजू देवी की मौत हो गई, जबकि पति और बेटा गंभीर रूप से घायल हैं। बेटियों को मिठाई लाने का वादा अधूरा रह गया, जिससे परिव ...और पढ़ें

    मिठाई का वादा अधूरा रह गया, सड़क हादसे ने बच्चों से छीन ली मां (फाइल फोटो)

    मिठाई का वादा अधूरा रह गया, सड़क हादसे ने बच्चों से छीन ली मां (फाइल फोटो)

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    संवाद सूत्र, कुचायकोट (गोपालगंज)। मिठाई लेकर आ रही हूं, घर पहुंचते ही दूंगी...। मंगलवार की रात मां रंजू देवी ने फोन पर अपनी बेटियों से यही कहा था। दोनों बेटियां खुशी-खुशी दरवाजे पर मां का इंतजार कर रही थीं, लेकिन कुछ ही देर बाद सड़क हादसे की खबर ने पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी।

    हादसे में रंजू देवी की मौत हो गई, जबकि उनके पति बीरबल महतो और पुत्र लड्डू कुमार गंभीर रूप से घायल होकर गोरखपुर में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

    बघौच गांव स्थित घर पर बड़ी बेटी करिश्मा और छोटी बेटी वर्षा कुमारी माता-पिता के लौटने की राह देख रही थीं। हादसे से करीब एक घंटे पहले मां से हुई बातचीत के बाद दोनों काफी खुश थीं, लेकिन जैसे ही दुर्घटना की सूचना गांव पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया।

    मां की मौत की खबर सुनकर छोटी बेटी वर्षा बार-बार बेहोश हो रही थी, जबकि बड़ी बेटी करिश्मा का भी रो-रोकर बुरा हाल था। स्वजन ने बताया कि रंजू देवी का मायका बरौली थाना क्षेत्र के चैनपुर सलोना गांव में था। उनका पालन-पोषण अपनी मौसी के घर हुआ था और वहीं से उनका विवाह बीरबल महतो के साथ हुआ था।

    कुछ दिन पहले मौसी के घर आयोजित मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए वह परिवार के साथ गई थीं। मंगलवार की रात सभी लोग पिकअप से घर लौट रहे थे, तभी कुचायकोट थाना क्षेत्र के सिरसिया गांव के पास उनकी पिकअप सड़क किनारे खड़े ट्रक से टकरा गई।

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    हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने वाहन में फंसे सभी घायलों को बाहर निकालकर सदर अस्पताल पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने रंजू देवी को मृत घोषित कर दिया, जबकि गंभीर रूप से घायल बीरबल महतो और उनके पुत्र लड्डू कुमार को बेहतर इलाज के लिए गोरखपुर रेफर कर दिया गया। साथ में मौजूद दोनों भांजियों प्रिया कुमारी और अंशिका कुमारी को मामूली चोटें आईं।

    घटना की सूचना मिलते ही बघौच गांव में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण पीड़ित परिवार के घर पहुंचे और स्वजन को सांत्वना दी। गांव में हर किसी की जुबान पर बस यही बात थी कि बच्चों के लिए मिठाई लाने का मां का वादा हमेशा के लिए अधूरा रह गया।