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बचाने की कोशिश बनी मौत का कारण, टंकी में एक के बाद एक उतरते गए चार कामगार; गोपालगंज में बुझ गए चार घरों के चिराग

Updated: Sat, 29 Aug 2026 05:32 PM (GMT+05:30)

गोपालगंज के सवनही जगदीश गांव में शौचालय की टंकी की सेंट्रिंग खोलते समय जहरीली गैस से चार कामगारों की मौत ...और पढ़ें

चार मौतों से चार परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

चार मौतों से चार परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

HighLights

  1. गोपालगंज में शौचालय की टंकी में जहरीली गैस से मौत।

  2. एक कामगार को बचाने उतरे तीन अन्य भी चपेट में आए।

  3. हादसे में चार परिवारों के चिराग बुझ गए।

विवेक कुमार तिवारी, फुलवरिया (गोपालगंज)। श्रीपुर थाना क्षेत्र के सीमावर्ती और गोपालपुर थाना क्षेत्र के सवनही जगदीश गांव में शनिवार की दोपहर दर्दनाक हादसा हो गया। शौचालय की टंकी की सेंट्रिंग खोलने के दौरान एक कामगार अंदर फंस गया।

उसे बचाने के लिए ठेकेदार समेत तीन अन्य कामगार भी टंकी में उतरते चले गए। कुछ ही देर में चारों की हालत बिगड़ गई। जहरीली गैस की आशंका के बीच दम घुटने से चारों की मौत हो गई। बचाव के प्रयास में दो युवक भी घायल हो गए।

एक को बचाने उतरे, फिर कोई बाहर नहीं आया

मृतकों की पहचान बंटी बैठा, टीपू मियां उर्फ जावेद, सबे आलम और उमेश यादव के रूप में हुई है। टीपू मियां निर्माण कार्य के ठेकेदार बताए जाते हैं।

बताया जाता है कि सबसे पहले बंटी बैठा टंकी के अंदर सेंट्रिंग खोलने के लिए उतरे थे। अंदर जाते ही उनकी हालत बिगड़ने लगी। उन्हें बचाने के लिए ठेकेदार टीपू मियां अंदर गए। इसके बाद उमेश यादव और सबे आलम भी उन्हें निकालने के लिए टंकी में उतर गए।

कुछ ही देर में मच गई चीख-पुकार, चारों को निकाला गया बाहर

एक के बाद एक चार लोगों के टंकी में जाने के बाद सभी की स्थिति खराब हो गई। आसपास मौजूद लोगों ने जब उन्हें परेशानी में देखा तो बचाव की कोशिश शुरू की।

किसी तरह चारों को टंकी से बाहर निकाला गया और फुलवरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने चारों को मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक तौर पर टंकी में मौजूद जहरीली गैस को हादसे की वजह माना जा रहा है। घटना के बाद गांव में मातम पसर गया।

चार मौतों से चार परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

बंटी बैठा की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी बबुवंती देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। उनके दो बेटे विक्की और लकी हैं।

वृद्ध मां रिकेशिया कुंवर भी बेटे की मौत से सदमे में हैं। स्वजन ने आरोप लगाया कि समय रहते बचाव की कोशिश की जाती तो शायद जान बचाई जा सकती थी। घटना के बाद स्वजन में आक्रोश भी देखने को मिला।

इकलौते कमाऊ सदस्य की मौत, बेटी बार-बार पुकारती रही पिता को

उमेश यादव अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य बताए जाते थे। उनकी मौत से पत्नी संयोजी देवी बदहवास हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद वह बार-बार बेहोश होती रहीं।

उनकी 15 वर्षीय इकलौती बेटी पुतुल कुमारी पिता को याद कर रोती रही। घर में जमा लोग परिवार को ढांढस बंधाते रहे। वहीं मंगहा गांव निवासी सबे आलम के घर भी घटना के बाद मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है।

जिस घर में शादी की तैयारी थी, वहां छा गया मातम

हादसे में जान गंवाने वाले टीपू मियां उर्फ जावेद अविवाहित थे। स्वजन के अनुसार कुछ ही दिनों बाद उनकी शादी होने वाली थी और घर में इसकी तैयारियां चल रही थीं।

अचानक हुई मौत ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। उनकी मां मेहरून निशा का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना की सूचना मिलने के बाद कुचायकोट के अंचलाधिकारी मनोरंजन कुमार शुक्ला भी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया।

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