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    बिहार की रेखा ने घर-आंगन में शुरू की मशरूम की खेती, 6 लाख तक होती है कमाई

    Updated: Wed, 18 Mar 2026 07:40 PM (GMT+05:30)

    गोपालगंज के हथुआ की रेखा कुमारी ने घर के आंगन से मशरूम की खेती (Mushroom Farming) शुरू कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। कृषि विज्ञान केंद्र से ...और पढ़ें

    मशरूम के बिजनेस से लाखों की कमाई। फोटो जागरण

    मशरूम के बिजनेस से लाखों की कमाई। फोटो जागरण

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    संवाद सूत्र, हथुआ (गोपालगंज)। मजबूत संकल्प और कड़ी मेहनत के बल पर सीमित संसाधनों में भी सफलता हासिल की जा सकती है। इसका सजीव उदाहरण जिले के हथुआ प्रखंड की रेखा कुमारी हैं, जिन्होंने घर के आंगन से मशरूम की खेती शुरू कर आज आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है।

    नगर पंचायत हथुआ के मनीछापर निवासी रेखा कुमारी ने अपने घर के खाली पड़े कमरों का उपयोग करते हुए मशरूम उत्पादन की शुरुआत की। शुरुआती दौर में संसाधनों की कमी जरूर थी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।

    धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई और आज उनके स्तर पर तैयार आयस्टर, बटन तथा मिल्की प्रजाति के मशरूम की मांग स्थानीय बाजार के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी बढ़ गई है।

    रेखा बताती हैं कि विवाह के बाद ससुराल आने पर आर्थिक चुनौतियां सामने थीं। इसी बीच उन्हें कृषि विज्ञान केंद्र से मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण मिला, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी।

    हर महीने 40 से 50 हजार की कमाई 

    वर्ष 2013 में उन्होंने छोटे स्तर पर इस कार्य की शुरुआत की। अनुभव और लगन के बल पर उन्होंने उत्पादन को लगातार बढ़ाया। वर्तमान में वे आनंद ज्योति मशरूम उद्योग का संचालन कर रही हैं, जहां विभिन्न प्रजाति के मशरूम का उत्पादन किया जाता है। इसके साथ ही मशरूम से लड्डू, भुजिया, बिस्किट, पाउडर, बीज तथा हर्बल गुलाल जैसे उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं।

    उनके उत्पाद पटना, हैदराबाद सहित देश के कई हिस्सों में भेजे जा रहे हैं। रेखा कुमारी बताती हैं कि करीब पांच हजार रुपये की लागत से शुरू किए गए इस कार्य से अब उन्हें प्रति माह 40 से 50 हजार रुपये तक की आमदनी हो रही है।

    बाकी महिलाओं की भी करती हैं मदद

    वे केवल खुद तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनके प्रयास से कई महिलाएं अब घर से ही रोजगार कर रही हैं।

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    रेखा का मानना है कि महिलाएं यदि अपने खाली समय और उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग करें, तो वे आसानी से आत्मनिर्भर बन सकती हैं। उनका यह प्रयास क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल बन गया है।

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