गोपालगंज: सासामुसा चीनी मिल बचाने की उम्मीद पर स्क्रैप कटाई का साया, आंदोलन की राह पर किसान
छह साल से बंद सासामुसा चीनी मिल में स्क्रैप कटाई की तैयारी से हजारों गन्ना किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। किसान संघर्ष समिति ने बकाया भुगतान ...और पढ़ें

पटना पहुंची किसान संघर्ष समिति, मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कराने की उठाई मांग
HighLights
सासामुसा चीनी मिल में स्क्रैप कटाई की तैयारी शुरू।
हजारों गन्ना किसानों की मिल पुनर्जीवन की उम्मीदें धूमिल।
किसान संघर्ष समिति ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।
संवाद सूत्र, कुचायकोट (गोपालगंज)। छह वर्षों से बंद पड़ी सासामुसा चीनी मिल को दोबारा चालू कराने की उम्मीदों के बीच अब स्क्रैप कटाई शुरू होने की तैयारी ने हजारों गन्ना किसानों की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) की प्रक्रिया के तहत नीलाम किए गए स्क्रैप को हटाने की कवायद शुरू होते ही किसान संघर्ष समिति फिर सक्रिय हो गई है।
किसानों का कहना है कि यदि सरकार ने शीघ्र हस्तक्षेप नहीं किया तो मिल के पुनर्जीवन की संभावना हमेशा के लिए समाप्त हो सकती है। मिल परिसर में स्क्रैप की कटाई की सूचना मिलते ही किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष मो. तौहीद के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने पटना पहुंचकर सत्तारूढ़ दल के उपसचेतक मंजीत सिंह से मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री स्तर पर हस्तक्षेप कर मिल को बचाने की मांग उठाई। उपसचेतक ने मुख्यमंत्री से इस संबंध में बातचीत कर आवश्यक पहल का आश्वासन दिया है। वर्ष 2020 से बंद पड़ी सासामुसा चीनी मिल के पुनः संचालन की मांग को लेकर किसान और पूर्व मिलकर्मी लगातार आंदोलन करते रहे हैं।
सेंट्रल बैंक के करीब 40 करोड़ रुपये के बकाया की वसूली के लिए मामला एनसीएलटी पहुंचा, जिसके बाद पिछले वर्ष नवंबर में ट्रिब्यूनल ने मिल के स्क्रैप की बिक्री का आदेश दिया।
इसके विरोध में किसानों ने दिसंबर में अनिश्चितकालीन धरना भी दिया था, जिसे सरकार की ओर से सकारात्मक पहल के आश्वासन के बाद समाप्त किया गया था। बाद में गन्ना उद्योग विभाग की पहल पर मार्च और अप्रैल में चार निवेशक कंपनियों ने मिल का निरीक्षण किया और संचालन में रुचि दिखाई, लेकिन भूमि की सीमित उपलब्धता तथा अन्य तकनीकी और वित्तीय कारणों से मामला आगे नहीं बढ़ सका।
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इस बीच सरकार ने किसानों के करीब 43 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान को मंजूरी भी दी, लेकिन भुगतान और मिल के भविष्य पर अंतिम निर्णय अब भी लंबित है।
इधर, स्क्रैप खरीदने वाली कंपनी के डेढ़ दर्जन से अधिक कर्मी मिल परिसर में पहुंचकर साफ-सफाई शुरू कर चुके हैं। जल्द ही मशीनों और अन्य ढांचों की कटाई की तैयारी है। इससे किसानों और पूर्व मिलकर्मियों में गहरी बेचैनी है।
किसान संघर्ष समिति ने साफ कहा है कि जब तक बकाया भुगतान नहीं होता और मिल के पुनः संचालन पर सरकार स्पष्ट निर्णय नहीं लेती, तब तक स्क्रैप को मिल परिसर से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। साथ ही सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने की भी चेतावनी दी गई है।