Chaiti Chhath Puja 2026: कब है चैती छठ? जानिए नहाय-खाय से अर्घ्य तक का पूरा कार्यक्रम और महत्व
चैती छठ महापर्व 22 मार्च से नहाय-खाय के साथ शुरू होगा, जो 25 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ समाप्त होगा। चार दिवसीय इस अनुष्ठान में व्रती 3 ...और पढ़ें

चैती छठ (फाइल फोटो)
HighLights
चैती छठ 22 मार्च से नहाय-खाय के साथ होगा शुरू।
व्रती 36 घंटे का निर्जला उपवास रखकर करते हैं आराधना।
परिवार की सुख-समृद्धि हेतु सूर्य और छठी मैया की पूजा।
संवाद सूत्र, कलेर (अरवल)। आस्था, साधना और सूर्य उपासना का महापर्व Chaiti Chhath इस वर्ष 22 मार्च से शुरू होगा। चार दिनों तक चलने वाले इस पवित्र पर्व की शुरुआत नहाय-खाय के साथ होगी। पर्व को लेकर व्रतियों और श्रद्धालुओं के घरों में अभी से भक्तिमय माहौल बनने लगा है।
गांवों और शहरों में छठ पर्व की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। लोग पूजा सामग्री जुटाने में लग गए हैं और छठ घाटों की सफाई भी शुरू कर दी गई है।
सनातन परंपरा में बेहद महत्वपूर्ण है छठ
छठ पर्व को सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व भगवान Surya और Chhathi Maiya की आराधना का प्रतीक है।
इस दौरान व्रती कठोर नियमों का पालन करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और खुशहाली की कामना करते हैं। छठ व्रत को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है।
36 घंटे का निर्जला उपवास रखते हैं व्रती
इस व्रत में व्रती लगभग 36 घंटे तक निर्जला उपवास रखते हैं। पूरे नियम और श्रद्धा के साथ व्रती पूजा-अर्चना करते हैं।
इस दौरान शुद्धता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखा जाता है। घरों में छठ गीत गूंजने लगते हैं और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।
22 मार्च को नहाय-खाय से होगी शुरुआत
चार दिवसीय इस अनुष्ठान की शुरुआत 22 मार्च को नहाय-खाय के साथ होगी। इस दिन व्रती स्नान कर शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं और व्रत का संकल्प लेते हैं।
यह दिन छठ पर्व की शुरुआत का प्रतीक होता है, जिसमें घरों की साफ-सफाई और पूजा की तैयारी की जाती है।
23 मार्च को मनाया जाएगा खरना
पर्व के दूसरे दिन 23 मार्च को खरना मनाया जाएगा। इस दिन व्रती दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को गुड़ और चावल की खीर तथा रोटी का प्रसाद ग्रहण करते हैं।
खरना के बाद व्रती निर्जला व्रत की शुरुआत करते हैं, जो अगले दिन सूर्य को अर्घ्य देने तक जारी रहता है।
24 और 25 मार्च को अर्घ्य के साथ होगा समापन
तीसरे दिन 24 मार्च की शाम को व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे। इस दौरान छठ घाटों पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु एकत्र होकर सूर्य देव की पूजा करेंगे।
चौथे और अंतिम दिन 25 मार्च की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही इस महापर्व का समापन होगा।
बाजारों में बढ़ी रौनक, घाटों की सफाई शुरू
पर्व को लेकर बाजारों में भी रौनक बढ़ने लगी है। लोग फल, पूजा सामग्री और छठ से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी कर रहे हैं।
वहीं प्रशासन और स्थानीय समितियों द्वारा छठ घाटों की साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था की तैयारी भी शुरू कर दी गई है, ताकि व्रतियों और श्रद्धालुओं को पूजा में किसी प्रकार की परेशानी न हो।