आंध्र में की मजदूरी, गांव लौटकर खड़ा किया 35 लाख का फिश फार्म; अब सालाना 10 लाख तक कमा रहे जहानाबाद के देव
देव शरण प्रसाद ने आंध्र प्रदेश में मजदूरी करते हुए मछली पालन की तकनीक सीखी और जहानाबाद लौटकर 35 लाख का इंटीग्रेटेड फिश फार्म शुरू किया। यह फार्म अब सा ...और पढ़ें

अपने फिश फार्म में देवशरण। जागरण
HighLights
देव शरण ने आंध्र में मजदूरी कर सीखी मछली पालन की तकनीक।
जहानाबाद में 35 लाख की लागत से बनाया इंटीग्रेटेड फिश फार्म।
फार्म से सालाना 10 लाख रुपये की बचत, आत्मनिर्भरता की मिसाल।
जागरण संवाददाता, जहानाबाद। रोजगार की तलाश में कभी अपना गांव छोड़कर आंध्र प्रदेश में मजदूरी करने वाले मखदुमपुर नगर पंचायत के मखदुमपुर डीह निवासी देव शरण प्रसाद ने परिस्थितियों को सीखने का जरिया बनाया।
वहां मत्स्य पालन के क्षेत्र में श्रमिक के रूप में काम करते हुए उन्होंने मछली पालन की आधुनिक तकनीक और बारीकियां सीखीं।
जब घर लौटे तो उसी अनुभव को अपने गांव की मिट्टी में आजमाने का निर्णय लिया। वर्ष 2024 में शुरू किया गया उनका छोटा सा प्रयास आज इंटीग्रेटेड फिश फार्मिंग के रूप में रोजगार और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गया है।
मछली के साथ पोल्ट्री,डेयरी, झींगा और बकरी पालन भी
देव शरण प्रसाद करीब डेढ़ एकड़ लीज की जमीन पर इंटीग्रेटेड फार्मिंग कर रहे हैं। यहां मछली पालन के साथ पोल्ट्री, डेयरी, झींगा और बकरी पालन को भी जोड़ा गया है।
उनका मानना है कि एक ही जमीन और संसाधन से आय के कई स्रोत तैयार किए जाएं तो खेती-किसानी को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
गरीबी में पढ़ाई, फिर बाहर जाकर मजदूरी
देव शरण का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। आर्थिक तंगी के बीच उन्होंने दसवीं तक पढ़ाई करने के बाद ITI की शिक्षा हासिल की और मैकेनिक का काम शुरू किया।
बेहतर रोजगार की तलाश में उन्हें घर से बाहर जाना पड़ा। आंध्र प्रदेश में मजदूरी करते हुए उन्होंने मत्स्य पालन का काम नजदीक से देखा और धीरे-धीरे इसकी तकनीक सीखने लगे।
उन्होंने मछली पालन, तालाब और फीड प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने के तरीकों को समझा। इसके बाद उनके मन में विचार आया कि क्यों न सीखी हुई तकनीक का इस्तेमाल अपने गांव में ही किया जाए।
इसी सोच के साथ वर्ष 2024 में उन्होंने अपने फार्म की शुरुआत की।
सरकारी सहयोग से तालाब, 35 लाख से तैयार किया फार्म
देव शरण बताते हैं कि तालाब की खुदाई प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से सरकारी स्तर पर कराई गई। इसके बाद मछली का प्रथम बीज भी सरकारी स्तर पर अनुदानित दर पर उपलब्ध कराया गया।
धीरे-धीरे उन्होंने अपने स्तर से फार्म को विकसित किया। पूरे फार्म को स्थापित करने में करीब 35 लाख रुपये की लागत आई।
उनके फार्म में साल में दो बार मछली का उत्पादन होता है। एक चक्र में करीब 30 टन मछली का उत्पादन होता है। देव शरण के अनुसार एक उत्पादन चक्र में करीब पांच लाख रुपये की बचत होती है।
एक साल में 10 लाख तक बचत
इस तरह साल में करीब 10 लाख रुपये की बचत हो जाती है। फार्म के संचालन में एक श्रमिक और उनके भाई भी सहयोग करते हैं।
फिलहाल सभी मछलियां फार्म से ही स्थानीय व्यापारियों के माध्यम से बिक जा रहा है। देव शरण ने मछली पालन के साथ पोल्ट्री, डेयरी, झींगा और बकरी पालन को जोड़कर इंटीग्रेटेड फार्मिंग का माॅडल तैयार किया है।
इससे एक गतिविधि से निकलने वाले संसाधन का उपयोग दूसरी गतिविधि में किया जा सकता है। हालांकि अभी मछली उत्पादन का कार्य प्रगति पर है। अन्य फार्म भी जल्द संचालित हो जाएंगे।