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    जहानाबाद में डिजिटल पुस्तकालयों का बुरा हाल: 18 पंचायतों में खुले ज्ञान केंद्र, पर ताला तक नहीं खुला

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 02:53 PM (GMT+05:30)

    जहानाबाद में करोड़ों की लागत से स्थापित 18 डिजिटल पुस्तकालय अपनी मूल भावना से भटक गए हैं। संचालन व्यवस्था और निगरानी के अभाव में अधिकांश केंद्र नियमित ...और पढ़ें

    जहानाबाद में डिजिटल पुस्तकालय

    जहानाबाद में डिजिटल पुस्तकालय

    HighLights

    1. जहानाबाद में 18 डिजिटल पुस्तकालयों का संचालन ठप।

    2. करोड़ों खर्च के बावजूद अधिकांश केंद्रों पर ताले।

    3. ग्रामीण छात्र आधुनिक शिक्षा से वंचित, निजी कोचिंग पर निर्भर।

    जागरण संवाददाता,जहानाबाद। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा संसाधनों से जोड़ने के उद्देश्य से पंचायत स्तर पर स्थापित किए गए ज्ञान केंद्र सह डिजिटल पुस्तकालय जिले में अपनी मूल भावना से भटकते नजर आ रहे हैं। 

    पहले चरण में 18 पंचायतों में स्थापित इन डिजिटल पुस्तकालयों में अधिकांश का ताला आज तक नियमित रूप से नहीं खुल सका है। करोड़ों रुपये खर्च कर स्थापित किए गए इन केंद्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट, कंप्यूटर सिस्टम, ई-लर्निंग सामग्री और ऑनलाइन अध्ययन की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं, लेकिन संचालन व्यवस्था के अभाव में ये संसाधन बेकार पड़े हैं।

    लोगो को डिजिटल पुस्तकालय के बारे में जानकरी नहीं

    ग्रामीण छात्रों को शहरों जैसी डिजिटल शिक्षा उपलब्ध कराने की मंशा से शुरू की गई यह योजना धरातल पर सफल होती नहीं दिख रही है। कई पंचायतों में स्थानीय लोगों को यह तक जानकारी नहीं है कि उनके पंचायत में डिजिटल पुस्तकालय स्थापित है।

    नियमित कर्मियों की तैनाती नहीं होने और प्रभावी निगरानी के अभाव में अधिकांश ज्ञान केंद्र केवल कागजों पर संचालित हो रहे हैं। 

    निजी कोचिंग के भरोसे छात्र

    स्थिति यह है कि ग्रामीण विद्यार्थियों को आज भी पढ़ाई के लिए निजी कोचिंग संस्थानों या शहर के पुस्तकालयों का सहारा लेना पड़ रहा है,जबकि इन डिजिटल पुस्तकालयों का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को इंटरनेट आधारित अध्ययन सामग्री,ऑनलाइन कक्षाओं और डिजिटल पुस्तकों की सुविधा उपलब्ध कराना था। 

    शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि इन पुस्तकालयों का नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाए तो गांव के छात्रों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने में यह योजना बेहद प्रभावी साबित हो सकती है।

    इन पंचायतों में स्थापित हैं ज्ञान केंद्र सह डिजिटल पुस्तकालय

    सदर प्रखंड के मादिल और कल्पा,रतनी-फरीदपुर प्रखंड के पंडौल, जुनाठी, सोहरैया और नोआमा, काको प्रखंड के पिंजोरा, दमुहा, अमथुआ तथा मनियावां (दो केंद्र), मखदुमपुर प्रखंड के कोहरा, बेला, बिर्रा, छरियारी, डाकरा, भैख और जमनगंज तथा घोसी प्रखंड के लखावर पंचायत में ज्ञान केंद्र सह डिजिटल पुस्तकालय स्थापित किए गए हैं। इनमें से अधिकांश केंद्रों के नियमित संचालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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    पुस्तकालयों के सफल संचालन मुखिया और पंचायत सचिव की जिम्मेदारी है, जबकि इसे रोजाना खोलने का उत्तरदायित्व कचहरी सचिव का होता है। हाल ही में सोरहैया में पुस्तकालय बंद होने का मामला हमारे संज्ञान में आया है,जिस पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। व्यावहारिक रूप से देखा जाए तो यदि पाठक आते हैं, तो पुस्तकालय खोला जाता है। अगर इसे यूं ही खुला छोड़ दिया जाए,तो वहां रखे कंप्यूटर, वाई-फाई नेटवर्क, किताबें और अन्य उपकरण चोरी होने या खराब होने का जोखिम बना रहता है। इसलिए सुरक्षा और संसाधनों के सही उपयोग के बीच संतुलन बनाना बेहद आवश्यक है। - सुजीत कुमार, जिला पंचायती राज पदाधिकारी