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    जहानाबाद में मधुमक्खी पालन से 200 परिवारों की जिंदगी में घुली मिठास, सालाना होती है लाखों की कमाई

    Updated: Sun, 03 May 2026 04:11 PM (IST)

    जहानाबाद जिले में मधुमक्खी पालन ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए स्वरोजगार का एक सशक्त माध्यम बन गया है, जिससे लगभग 200 परिवार सालाना लाखों की कमाई कर ...और पढ़ें

    मधुमक्खी पालन। फोटो जागरण

    मधुमक्खी पालन। फोटो जागरण

    HighLights

    1. मधुमक्खी पालन से 200 परिवारों को मिला स्वरोजगार।

    2. सरकार 70% अनुदान पर मधुमक्खी बॉक्स उपलब्ध करा रही।

    3. जहानाबाद में लाखों की कमाई, ग्रामीण पलायन में कमी।

    जागरण संवाददाता, जहानाबाद। जिले में मधुमक्खी पालन का दायरा तेजी से बढ़ रहा है, जो ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए स्वरोजगार का एक सशक्त माध्यम बन गया है। यह उद्योग कम लागत में अधिक मुनाफा देने के कारण बेरोजगारी की कड़वाहट को दूर कर शहद की मिठास घोल रहा है।

    वर्तमान में करीब 200 परिवार इस स्वरोजगार से जुड़कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। जिले में सबसे बड़ा मधुमक्खी पालन केंद्र काको प्रखंड के नदियामां गांव में है, जहां संतोष कुमार केसरी 375 बॉक्स के माध्यम से बड़े पैमाने पर शहद उत्पादन कर रहे हैं। एक बॉक्स की बाजार कीमत करीब 4000 रुपये है, सरकार द्वारा 70 प्रतिशत अनुदान पर यह मात्र 1200 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है।

    एक बॉक्स से औसतन 5000 रुपये तक का शहद उत्पादन होता है, जिससे लगभग 3800 रुपये का मुनाफा मिलता है। इस हिसाब से 375 बॉक्स से एक चक्र में करीब 14 लाख 25 हजार रुपये की आय होती है। इसमें रखरखाव, श्रमिकों काे भुगतान और मधुमक्खियों के भोजन पर भी खर्च आता है।

    भंडारण की बेहतर व्यवस्था की कमी

    संतोष केसरी बताते हैं कि शहद की कीमत स्थिर नहीं रहती, जिससे कभी-कभी मुनाफा कम भी जाता है। वर्तमान में व्यापारी 80 रुपये प्रति किलो की दर से शहद खरीद रहे हैं। खुदरा बिक्री में इससे अधिक कीमत मिल जाती है। जिले में अभी शहद भंडारण की सुविधा नहीं होने के कारण उत्पादकों को तत्काल बिक्री करनी पड़ती है।

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    यदि भंडारण की व्यवस्था होती तो किसान बेहतर कीमत मिलने पर शहद बेच सकते थे। नदियामां के अलावा मोदनगंज प्रखंड के मननपुर निवासी विनय कुमार, मैना मठ के नवलेश कुमार सहित कई लोग छोटे स्तर पर मधुमक्खी पालन कर रहे हैं। धीरे-धीरे इस व्यवसाय के प्रति लोगों का रुझान बढ़ रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जिससे पलायन भी थम रहा है।

    आत्मा और उद्यान विभाग की संयुक्त पहल से मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इच्छुक लोगों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ 70 से 75 प्रतिशत अनुदान पर बॉक्स और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। विभाग का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को इस रोजगार से जोड़ना है,ताकि उन्हें काम के लिए बाहर पलायन न करना पड़े और गांव में ही आय का स्रोत विकसित हो सके। -रूपेश कुमार अग्रवाल, जिला उद्यान पदाधिकारी