तेजस एक्सप्रेस से निकले बिहार के 80 मुखिया, उत्तराखंड में तलाशेंगे गांवों के विकास का 'सीक्रेट'
जहानाबाद से 12 मुखिया सहित बिहार के 80 मुखियाओं का दल उत्तराखंड की मॉडल पंचायतों का अध्ययन करने देहरादून रवाना हुआ है। यह दल ग्रामीण विकास, स्वच्छता औ ...और पढ़ें

राज्य के 80 मुखियाओं का दल उत्तराखंड की मॉडल पंचायतों का अध्ययन करने देहरादून रवाना
HighLights
बिहार के 80 मुखिया उत्तराखंड की मॉडल पंचायतों का अध्ययन करने गए।
जहानाबाद के 12 मुखिया ग्रामीण विकास के गुर सीखेंगे।
स्वच्छता, जल संरक्षण, जनभागीदारी पर विशेष ध्यान रहेगा।
जागरण संवाददाता, जहानाबाद। पंचायती व्यवस्था को अधिक सशक्त, पारदर्शी और विकासोन्मुख बनाने की दिशा में बिहार सरकार ने नई पहल की है। इसी कड़ी में राज्य के 80 मुखियाओं का दल उत्तराखंड की मॉडल पंचायतों का अध्ययन करने देहरादून रवाना हुआ है।
इस दल में जहानाबाद जिले के विभिन्न प्रखंडों के 12 मुखिया भी शामिल हैं। सभी प्रतिनिधि सरकार के खर्च पर तेजस एक्सप्रेस से पटना से देहरादून के लिए रवाना हुए हैं।
अब इनकी नजर उत्तराखंड की उन पंचायतों पर है, जिन्होंने विकास के नए मानक कायम किए हैं।
पंचायतों में ऐसा क्या कर रहे हैं उत्तराखंड के लोग
अध्ययन भ्रमण 25 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान मुखिया उत्तराखंड की मॉडल पंचायतों की कार्यप्रणाली को करीब से समझेंगे।
ग्रामीण विकास, स्वच्छता, जल संरक्षण और आजीविका के क्षेत्र में किए जा रहे कामों का अध्ययन किया जाएगा।
इसके साथ ही डिजिटल प्रशासन और जनभागीदारी के सफल प्रयोगों की भी जानकारी ली जाएगी। प्रतिनिधि यह जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर ऐसी कौन-सी कार्यप्रणाली है, जिसने इन पंचायतों को मॉडल बनाया।
सबसे अहम सवाल यही है कि वहां की कौन-सी सीख जहानाबाद के गांवों की तस्वीर बदल सकती है।
देहरादून से लौटेंगे तो क्या बदलेगा जहानाबाद?
भ्रमण के बाद सभी जनप्रतिनिधियों से उम्मीद की जा रही है कि वे उत्तराखंड के सफल मॉडल को अपने-अपने पंचायतों में लागू करने की कोशिश करेंगे।
इससे पंचायतों में बेहतर प्रशासन, पारदर्शिता और जनसहभागिता को बढ़ावा मिल सकता है। स्वच्छता और जल संरक्षण जैसे क्षेत्रों में भी नई पहल शुरू होने की उम्मीद है।
ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जाएगा। हालांकि असली चुनौती देहरादून में सीखने के बाद उस सीख को अपने गांवों की जमीन पर उतारने की होगी।
सरकार ने खोला खजाना, 12 मुखिया के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी
जिला पंचायती राज पदाधिकारी सुजीत कुमार ने बताया कि अध्ययन भ्रमण का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है।
इसका उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को बेहतर कार्यप्रणाली से परिचित कराना और ग्रामीण विकास के नए मॉडल से जोड़ना है। सरकार चाहती है कि पंचायतों में विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़े।
इसके लिए प्रतिनिधियों को दूसरे राज्यों की सफल पंचायत व्यवस्था से रूबरू कराया जा रहा है। अब देखना होगा कि सरकार के इस निवेश का कितना फायदा जहानाबाद के गांवों को मिलता है।
12 मुखिया, एक मिशन और लौटकर बदलने की चुनौती
अध्ययन दल में जहानाबाद प्रखंड की मांदिल पंचायत से बबलू कुमार, गोनवां पंचायत से अमरनाथ सिंह, घोसी प्रखंड की शाहपुर पंचायत से ललित कुमार शामिल हैं।
हुलासगंज प्रखंड की मुरगांव पंचायत से विनोद कुमार, बौरी पंचायत से ओम प्रकाश सुमन और चिरी पंचायत से बिपिन कुमार भी दल का हिस्सा हैं।
मोदनगंज प्रखंड की देवरा पंचायत से नरेंद्र यादव अध्ययन दौरे पर गए हैं। मखदुमपुर प्रखंड की डाकरा पंचायत से जितेंद्र कुमार सिंह और धराउत पंचायत से धनंजय कुमार भी शामिल हैं।
इसके अलावा मंझोस पंचायत से राम निवास शर्मा, मलाठी पंचायत से धीरज कुमार और मकरपुर पंचायत से अजीत कुमार भी उत्तराखंड गए हैं।
उत्तराखंड का ‘विकास मंत्र’ लेकर लौटेंगे
इन जनप्रतिनिधियों से उम्मीद है कि वे उत्तराखंड की पंचायतों में अपनाई जा रही नवाचार आधारित कार्यप्रणाली को समझकर अपने क्षेत्रों में लागू करने की पहल करेंगे।
इससे पंचायतों की कार्यसंस्कृति में बदलाव आने के साथ ग्रामीणों की भागीदारी भी बढ़ सकती है। लेकिन इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा सवाल यही है कि देहरादून से लौटने के बाद कितने मॉडल जहानाबाद की धरती पर उतर पाते हैं।
अगर सीख को सही तरीके से लागू किया गया तो यह अध्ययन दौरा सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि गांवों के विकास की नई शुरुआत बन सकता है।