सावन में भी सूखी हैं मोरहर और बलदईया नदियां, जहानाबाद में सूखने की कगार पर धान की फसल
जहानाबाद के रतनी-फरीदपुर क्षेत्र में मोरहर और बलदईया नदियां सावन में भी सूखी हैं, जिससे धान की फसल सूखने की कगार पर है। ...और पढ़ें

HighLights
सावन में भी मोरहर और बलदईया नदियां सूखी पड़ी हैं।
जहानाबाद में धान की फसल सूखने के कगार पर है।
किसान स्थायी सिंचाई के लिए नहर निर्माण की मांग कर रहे हैं।
मनोज कुमार नारायण, रतनी-फरीदपुर (जहानाबाद)। रतनी-फरीदपुर प्रखंड क्षेत्र से होकर गुजरने वाली मोरहर और बलदईया नदी इस इलाके की खेती के लिए जीवनदायिनी मानी जाती है। रतनी-फरीदपुर के साथ मखदुमपुर और जहानाबाद प्रखंड के बड़ी संख्या में किसान सिंचाई के लिए इन्हीं दोनों नदियों पर निर्भर हैं।
क्षेत्र में पर्याप्त नहर की सुविधा नहीं होने के कारण किसानों के लिए इन नदियों का महत्व और बढ़ जाता है। लेकिन इस बार सावन माह बीतने को है और बरसात के नव नक्षत्र का दौर भी चल रहा है, इसके बावजूद दोनों नदियां अभी तक पानी के लिए तरस रही हैं।
किसानों की खेती पर पड़ रहा असर
सामान्य तौर पर सावन माह में अच्छी बारिश होने पर मोरहर और बल्दईया नदी में बाढ़ का पानी पहुंच जाता है। इससे किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने के साथ भूजल स्तर में भी सुधार होता है। नदी में पानी आने से आसपास के क्षेत्रों में वाटर लेवल बढ़ जाता है और किसान आसानी से पंपसेट के माध्यम से खेतों की सिंचाई कर लेते हैं।
इस वर्ष पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण नदी में बाढ़ का पानी नहीं आया है। इसका सीधा असर किसानों की खेती पर पड़ रहा है।
पंपसेट के सहारे खेतों की सिंचाई
किसानों ने किसी तरह पंपसेट के सहारे खेतों की सिंचाई कर धान की रोपनी लगभग पूरी कर ली है। इसके लिए उन्हें डीजल, बिजली और मजदूरी पर काफी राशि खर्च करनी पड़ी है। अब लगातार भूजल स्तर नीचे जाने के कारण पंपसेट भी पहले की तरह पानी नहीं दे रहा है।
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कई जगहों पर मोटर चलाने के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं निकल रहा है। ऐसे में खेतों में लगी धान की फसल सूखने के कगार पर पहुंचने लगी है। किसानों को अपनी पूंजी डूबने की चिंता सताने लगी है।किसानों का कहना है कि पिछले वर्ष इस समय सदर प्रखंड की दो पंचायतों और रतनी-फरीदपुर प्रखंड की तीन पंचायतों को छोड़कर लगभग सभी पंचायतों में धान की फसल खेतों में लहलहा रही थी। इस वर्ष स्थिति इसके विपरीत है। जिन खेतों में किसानों ने अपनी जमा पूंजी लगाकर धान की फसल लगाई है, वहां पानी के अभाव में पौधों की बढ़वार प्रभावित हो रही है।
बिजली की समस्या ने बढ़ाई परेशानी
सिंचाई के लिए किसानों की परेशानी केवल पानी की कमी तक सीमित नहीं है। कई गांवों में अधिक लोड के कारण ट्रांसफार्मर जलने की समस्या सामने आ रही है। वहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी के बाद बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है। बिजली नहीं रहने पर पंपसेट नहीं चल पाता और खेतों में समय पर पानी नहीं पहुंच पाता। इससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है।
नहर निर्माण की उठ रही मांग
किसानों का कहना है कि यदि इस इलाके में पर्याप्त नहर की सुविधा उपलब्ध होती तो उन्हें हर वर्ष बारिश और नदियों के पानी पर इस तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता। नहर के माध्यम से सिंचाई की स्थायी व्यवस्था होने पर किसानों को समय पर पानी मिल सकता है और भूजल स्तर पर भी दबाव कम होगा।
किसानों ने सरकार और संबंधित विभाग से क्षेत्र में नहर निर्माण तथा सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की है, ताकि खेती को प्राकृतिक बारिश के भरोसे नहीं छोड़ना पड़े।