जमुई जिले में गैस किल्लत और ऑनलाइन व्यवस्था से ग्रामीण परेशान, चूल्हे ठंडे पड़ने की आई नौबत
जमुई के अलीगंज प्रखंड में रसोई गैस की किल्लत और ऑनलाइन बुकिंग की तकनीकी समस्याओं से ग्रामीण परेशान हैं। सर्वर डाउन और ओटीपी न मिलने से सिलेंडर नहीं मि ...और पढ़ें

जमुई जिले में गैस किल्लत और ऑनलाइन व्यवस्था से ग्रामीण परेशान, चूल्हे ठंडे पड़ने की आई नौबत

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सूत्र, अलीगंज (जमुई)। प्रखंड क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों रसोई गैस की किल्लत ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। गैस सिलिंडर नहीं मिलने से कई घरों के चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं और लोग मजबूरी में लकड़ी के सहारे खाना बनाने को विवश हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि समस्या केवल गैस की कमी नहीं, बल्कि उसे प्राप्त करने की जटिल प्रक्रिया भी है। मनोज राम और रिंकी कुमारी ने बताया कि गैस एजेंसी अब केवल ऑनलाइन बुकिंग के आधार पर ही सिलिंडर दे रही है, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण बुकिंग करना मुश्किल हो गया है।
उन्होंने बताया कि पुराने मोबाइल से घंटों प्रयास करने के बावजूद कभी सर्वर डाउन रहता है तो कभी ओटीपी नहीं आता या आईवीआर कॉल कनेक्ट नहीं होती। बिना बुकिंग एजेंसी जाने पर भी उन्हें खाली हाथ लौटा दिया जाता है।
ग्रामीण महिलाओं ने उज्ज्वला योजना को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि सरकार ने सिलिंडर तो दे दिया, लेकिन रिफिल की प्रक्रिया इतनी जटिल बना दी गई है कि कम पढ़े-लिखे लोग इसे पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
खबरें और भी
गैस खत्म होने के बाद अब अधिकांश घरों में लकड़ी और कोयले के चूल्हे जल रहे हैं। इससे धुएं के कारण स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। महिलाओं और बच्चों में सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
वहीं, बाजार में लकड़ी की कीमत में दोगुनी बढ़ोतरी हुई है, जिससे दिहाड़ी मजदूर परिवारों का बजट बिगड़ गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गैस एजेंसी के कर्मचारी उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। लोगों ने मांग की है कि जल्द ही तकनीकी बाधाओं को दूर किया जाए या ऑफलाइन बुकिंग की व्यवस्था फिर से शुरू की जाए, ताकि उन्हें इस संकट से राहत मिल सके।