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यूट्यूब से सीखा; जीविका से लोन लिया, जमुई की अन्नपूर्णा 'मछली' बनाकर कमा रहीं ₹300000

Published: Fri, 05 Jun 2026 04:24 PM (GMT+05:30)Updated: Fri, 05 Jun 2026 05:06 PM (GMT+05:30)

जमुई जिले के बरहट प्रखंड की अन्नपूर्णा देवी ने जीविका समूह से ऋण लेकर और यूट्यूब से कृत्रिम मछली बनाने का हुनर सीखकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है।

जमुई की अन्नपूर्णा देवी। (जागरण)

जमुई की अन्नपूर्णा देवी। (जागरण)

HighLights

  1. यूट्यूब से कृत्रिम मछली बनाने का हुनर सीखा।

  2. जीविका ऋण से व्यवसाय शुरू कर बनीं सफल उद्यमी।

  3. 25 हजार मासिक मुनाफा, 10 ग्रामीण महिलाओं को रोजगार।

संवाद सूत्र, बरहट (जमुई)। ग्रामीण महिलाएं अब सिर्फ चौके-चूल्हे और परंपरागत कामों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं।

जमुई जिले के बरहट प्रखंड मलयपुर गांव की अन्नपूर्णा देवी आज ऐसी ही लाखों ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं।

अन्नपूर्णा ने अपनी सूझ-बूझ और कड़ी मेहनत की बदौलत न सिर्फ अपने परिवार को तंगी के दौर से निकाला, बल्कि खुद को एक सफल उद्यमी के रूप में स्थापित कर लिया है।

अन्नपूर्णा देवी कुछ समय पहले तक घर चलाने और पति का हाथ बंटाने के लिए सिलाई का काम करती थीं। यद्यपि, सीमित आमदनी के कारण परिवार का गुजारा बेहद मुश्किल से हो पाता था।

इसी बीच 2017 में अन्नपूर्णा जीविका समूह से जुड़ीं, जिसने उनके जीवन को एक नया मोड़ दे दिया। उन्होंने समूह के माध्यम से 30 हजार रुपये का ऋण लिया और कुछ नया करने की ठानी।

डिजिटल क्रांति का उठाया लाभ, यूट्यूब से सीखा हुनर

अन्नपूर्णा ने इंटरनेट और डिजिटल क्रांति का सही उपयोग किया। उन्होंने यूट्यूब के जरिए आर्टिफिशियल मछली बनाने का हुनर सीखा और जीविका से लोन लेकर मशीन की खरीदारी कर आज वह क्रिस्टल फाइबर की मदद से हुबहू असली दिखने वाली रंग-बिरंगी मछलियां मशीन से तैयार करती हैं।

Artificial Fish

मशीन से आर्टिफिशियल मछली तैयार करती अन्नपूर्णा।

इन कृत्रिम मछलियों की मांग होम डेकोरेशन, एक्वेरियम और बच्चों के खिलौनों के रूप में काफी अधिक है। शुरुआत में अन्नपूर्णा ने स्थानीय दुकानदारों को अपनी बनाई मछलियों के सैंपल दिखाए।

धीरे-धीरे उनके काम की फिनिशिंग और खूबसूरती देखकर मांग बढ़ने लगी। आज आलम यह है कि अन्नपूर्णा राजगीर के ऐतिहासिक मलमास मेले में अपना स्टाल लगा रही हैं, जहां उनके उत्पादों को खूब पसंद किया जा रहा है।

इसके साथ ही वह सीजन में पतंग निर्माण का कार्य भी करती हैं। इसके इस कार्य में उनके पति राजू कुमार रावत भी सहयोग करते हैं।

हर महीने 25 हजार तक का मुनाफा

अन्नपूर्णा बताती हैं कि इस कारोबार में कच्चे माल पर हर महीने करीब आठ से दस हजार रुपये की लागत आती है। वहीं, बाजार में इसकी बिक्री 30 से 35 हजार रुपये तक हो जाती है। वह सलाना 3 लाख रुपये तक मुनाफा कमा रही हैं।

तमाम खर्चे और लोन की मासिक किस्त समय पर चुकाने के बाद भी वह हर महीने 20 से 25 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रही हैं।

गांव की 10 अन्य महिलाओं को दे रहीं रोजगार

अन्नपूर्णा की इस सफलता ने गांव की अन्य महिलाओं की सोच को भी बदल दिया है। उन्हें देखकर मलयपुर गांव की करीब 10 अन्य महिलाएं भी अब यह हुनर सीख रही हैं।

अन्नपूर्णा अब अपने इस काम को बड़े स्तर पर ले जाने और खुद की एक छोटी उत्पादन इकाई स्थापित करने की तैयारी में हैं, जिससे गांव की अन्य दीदियों को भी नियमित रोजगार मिल सके। अन्नपूर्णा के तीनों बच्चे बड़ा बेटा ग्रेजुएशन, मंझला बेटा एमए और छोटा बेटा इंटर की पढ़ाई कर रहा है।

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अन्नपूर्णा जैसी कर्मठ दीदियां समाज और अन्य महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा हैं। जीविका का मुख्य उद्देश्य ही ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत कर आत्मनिर्भर बनाना है। अन्नपूर्णा ने यह साबित किया है कि अगर अवसर और सही मार्गदर्शन मिले तो ग्रामीण महिलाएं किसी भी क्षेत्र में कमाल कर सकती हैं।

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धर्मेंद्र कुमार चौधरी, बीपीएम, जीविका, बरहट

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