दुग्ध उत्पादन से बदल रही गांव की महिलाओं की तकदीर, मुजफ्फरपुर में आत्मनिर्भर बन रहीं जीविका दीदी
मुजफ्फरपुर में जीविका समूह और सरकारी योजनाओं की मदद से ग्रामीण महिलाएं दुग्ध उत्पादन कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। ...और पढ़ें

भैंस को चार खिलाती जीविका दीदी संगीता देवी। (जागरण)
HighLights
जीविका समूह और सरकारी योजनाओं से महिलाओं को मदद।
संगीता देवी जैसी महिलाएं दुग्ध उत्पादन से बनीं आत्मनिर्भर।
मुजफ्फरपुर में 9000 जीविका दीदियां दुग्ध उत्पादन से जुड़ीं।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। जिले में जीविका समूह, सरकारी योजनाओं व तिरहुत दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड तिमूल के सहयोग से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति तेजी से मजबूत हो रही है।
दुग्ध उत्पादन के जरिए महिलाएं न सिर्फ आमदनी बढ़ा रहीं, बल्कि कर्जमुक्त होकर आत्मनिर्भर भी बन रही हैं। सकरा के रानी रामपुर की संगीता देवी इसकी मिसाल हैं।
उन्होंने कठिन आर्थिक परिस्थितियों से निकलकर दुग्ध उत्पादन के सहारे परिवार की स्थिति बदल दी। संगीता ने बताया दो वर्ष पहले उनका परिवार भारी कर्ज में डूबा था।
आर्थिक संकट इतना गहरा गया था कि वर्ष 2024 में उन्हें अपनी दो भैंसें 80 हजार रुपये में बेचनी पड़ीं। इससे परिवार की तत्काल जरूरतें तो पूरी हुईं, लेकिन नियमित आय का स्रोत समाप्त हो गया।
20 हजार रुपये का लोन
हालांकि उन्होंने एक भैंस को बचाकर उसकी देखभाल जारी रखी और भविष्य में फिर से दुग्ध उत्पादन शुरू करने का संकल्प लिया। जीविका समूह से उन्हें 20 हजार रुपये का ऋण मिला।
मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत 10 हजार रुपये की सहायता प्राप्त हुई। साथ ही लेबर कार्ड से पति व पत्नी दोनों को पांच-पांच हजार रुपये मिले। कुल 40 हजार रुपये जुटाकर उन्होंने एक भैंस खरीदी और फिर से दूध उत्पादन शुरू किया।
नियमित रूप से दूध बेचकर सबसे पहले जीविका समूह का 20 हजार रुपये का ऋण चुका दिया। इसके बाद 30 हजार रुपये बचत कर एक और भैंस खरीदी। अब उनके पास कुल तीन भैंसें हैं।
परिवार पूरी तरह कर्जमुक्त हो चुका है और आर्थिक स्थिति सामान्य हो गई है। उनके गांव की रेखा देवी, गुड्डी देवी व रीमा देवी भी दुग्ध उत्पादन कर परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही हैं।
दुग्ध उत्पादन समितियों से जुड़ीं 9000 जीविका दीदियां
जीविका की कार्यक्रम प्रबंधक अनीशा ने बताया जिले में करीब नौ हजार जीविका दीदियां दुग्ध उत्पादन समितियों से जुड़ी हैं। इनके दूध की उचित बिक्री के लिए उन्हें तिमूल से जोड़ा गया है।
स्वरोजगार से आर्थिक रूप से मजबूत बन रहीं। जानकारी के अनुसार जिले में प्रतिदिन करीब 10 लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है, जिसमें करीब पांच लाख लीटर की खपत हो जाती है।
तिमूल के प्रबंध निदेशक फूल कुमार झा ने बताया जिले से प्रतिदिन डेढ़ लाख लीटर दूध का संग्रह किया जा रहा है। दुग्ध विकास को बढ़ावा देने के लिए सभी राजस्व गांवों में संग्रह केंद्र व दुग्ध समितियां बनाने की पहल की जा रही है।
वर्तमान में जिले में करीब 1300 संग्रह केंद्र संचालित हैं। दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए अधिक दूध देने वाली नस्ल की गाय व भैंसों के लिए कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा रही है।
अभी जिले में 300 केंद्र संचालित हैं। सेक्स सार्टेड सीमेन के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे 80 प्रतिशत तक बछिया होने की संभावना रहती है।
इससे भविष्य में दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा। हरा चारा के लिए किसानों को बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। हरे चारे की कमी न हो इसके लिए जिले में साइलेंज प्लांट स्थापित किया गया है। सालाना दो हजार टन उत्पादन हो रहा है।