जमुई के 'कूल' DM के सामने क्लर्क ने बोला झूठ, खुली पोल तो चढ़ा पारा; सैलरी पर लगी रोक
जमुई में डीएम के सामने डीसीएलआर कार्यालय का सहायक जन शिकायत के लंबित मामलों पर झूठ बोलते पकड़ा गया। डीएम ने सहायक मृत्युंजय कुमार का जुलाई माह का वेतन ...और पढ़ें

जिला पदाधिकारी नवीन कुमार।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सहयोगी, जमुई। भूमि सुधार उप समाहर्ता सह जिला पदाधिकारी के विशेष कार्य पदाधिकारी सुजीत कुमार के कार्यालय के सहायक डीएम के सामने ही झूठ बोल रहा था। जन शिकायत कोषांग से प्राप्त प्रतिवेदन की समीक्षा में वह झूठ पकड़ लिया गया।
इसके बाद तो अमूमन कूल-कूल रहने वाले जिला पदाधिकारी नवीन कुमार (Jamui DM) का गुस्सा हाई हुआ और संबंधित सहायक मृत्युंजय कुमार को न सिर्फ कड़ी फटकार लगी, बल्कि तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण समर्पित करने का आदेश भी जारी हो गया।
सैलरी रोकी
साथ ही स्पष्टीकरण पर अंतिम आदेश पारित होने तक जुलाई माह के वेतन को भी स्थगित कर दिया गया। उक्त लिपिक के साथ राजस्व शाखा के प्रधान लिपिक पप्पू मरांडी को भी स्पष्टीकरण के साथ एक दिन का वेतन स्थगित किए जाने का दंड मिला है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, महीने के प्रथम सोमवार को प्रधान लिपिकों की समीक्षा बैठक जिला पदाधिकारी द्वारा की जाती है। जून महीने की बैठक में भी प्रधान लिपिक की उपस्थित चिंताजनक थी और आधे अधूरे प्रतिवेदन संबंधित कार्यालय की कार्य प्रणाली को बताने के लिए पर्याप्त था।
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तब चेतावनी देकर सुधार की नसीहत दी गई थी। फिर बीते सोमवार को जुलाई माह की बैठक में भी जून की बैठक की ही पुनरावृति हो गई। यह जिला पदाधिकारी को नागवार गुजरा और उन्होंने उक्त दिवस को ही रात के 8:00 बजे स्पष्टीकरण के साथ संबंधित सभी प्रधान लिपिकों तलब कर लिया।
उक्त बैठक में वैसे लापरवाह प्रधान लिपिकों को कड़ी फटकार लगाई गई और यह संदेश दे दिया गया कि आगे से ऐसी गलती की पुनरावृत्ति हुई तो निलंबन से नीचे समझौता नहीं किया जाएगा।
इसी कड़ी में समीक्षा के दौरान भूमि सुधार कार्यालय के निम्न वर्गीय लिपिक मृत्युंजय कुमार द्वारा जन शिकायत मामले के लंबित मामले की गलत सूचना पकड़ ली गई।
उन्होंने जन शिकायत के लंबित मामलों की संख्या शून्य होने की जानकारी दी थी, जबकि जन शिकायत से प्राप्त प्रतिवेदन की समीक्षा में इसकी संख्या 27 पाई गई।
इसे जिला पदाधिकारी ने गंभीर मामला बताते हुए कहा कि इस प्रकार का आचरण सरकारी कार्य के प्रति घोर लापरवाही एवं अनुशासनहीनता का द्योतक है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं होने पर संबंधित कर्मी के विरुद्ध आरोप पत्र गठन कर विभागीय कार्यवाही संचालित की जाएगी।