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    जमुई में आशा कार्यकर्ता ने सरकार को लगाया चूना, एक साथ 2 विभागों से सैलरी लेने का आरोप; RTI से खुला राज 

    Updated: Tue, 14 Jul 2026 03:54 PM (GMT+05:30)

    जमुई के झाझा प्रखंड में एक आशा कार्यकर्ता शीला कुमारी पर दो सरकारी/अर्धसरकारी विभागों से एक साथ वेतन लेने का आरोप है। आरटीआई से खुलासा हुआ कि वह सीएचस ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. आशा कार्यकर्ता शीला कुमारी दो पदों पर कार्यरत थी।

    2. सीएचसी झाझा और जीविका में एक साथ नौकरी।

    3. आरटीआई और शिकायत से वित्तीय अनियमितता का खुलासा।

    संवाद सूत्र, बोड़वा (जमुई)। सरकारी व्यवस्था की नाक के नीचे दोहरा लाभ और वित्तीय अनियमितता का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक हलके में हड़कंप मचा दिया है।

    मामला झाझा प्रखंड का है, जहां एक ही महिला दो अलग-अलग सरकारी व अर्धसरकारी विभागों में पूर्णकालिक पदों पर तैनात रहकर न केवल नियमों की धज्जियां उड़ा रही थी, बल्कि सरकारी खजाने को भी चूना लगा रही थी।

    शिकायतकर्ता द्वारा जिलाधिकारी को सौंपे गए शिकायती-पत्र और सूचना का अधिकार से मिले दस्तावेजों ने इस पूरे फर्जीवाड़े की पोल खोलकर रख दी है।

    मामला तब उजागर हुआ जब बीपीआईयू झाझा के पूर्व प्रभारी प्रखंड परियोजना प्रबंधक सूचित कुमार साह ने लिखित पत्र के तहत झाझा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से पूरी रिपोर्ट मांगी।

    अस्पताल में मरीजों की सेवा, जीविका में विकास का जिम्मा!

    जांच में जो सच सामने आया वो चौंकाने वाला था। रामदासपुर की रहने वाली शीला कुमारी एक तरफ सीएचसी झाझा में आशा कार्यकर्ता के रूप में तैनात है, तो दूसरी तरफ अधिकार जीविका महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड (ग्राम बेनीबांक, ग्राम पंचायत जामुखरेया) में मास्टर बुक कीपर के महत्वपूर्ण पद पर भी अपनी सेवाएं दे रही है।

    शिकायतकर्ता ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि शीला एक ही समय में दो अलग-अलग पदों का लाभ उठाकर सरकारी कोष का सरेआम दुरुपयोग कदाचार और धोखाधड़ी कर रही है। अब गेंद जिलाधिकारी के पाले में है कि इस गंभीर वित्तीय अनियमितता पर क्या कानूनी और दंडणात्मक कार्रवाई की जाती है।

    जब इस संबंध में आशा शीला कुमारी से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने से हिचकिचाते हुए फोन काट दिया। जानकारी के अनुसार, शीला कुमारी की नियुक्ति 21 मई 2010 को आशा कार्यकर्ता के रूप में हुई थी, जबकि 01 जुलाई 2020 को जीविका में एमबीके पद पर उनकी बहाली हुई।

    मामले की जानकारी मुझे नहीं है। अगर ऐसा बात है तो नियम के विरुद्ध है। आगे की कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. अशोक कुमार सिंह, सिविल सर्जन, जमुई

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